Share Market Trend and SIP Stoppage : किसी फंड, शेयर या एसेट में जब गिरावट आती है, तो अक्सर निवेशक वहां निवेश करना बंद कर देते हैं। यहां तक कि पैनिक सेलिंग के चलते बड़े नुकसान भी उठाते हैं। क्योंकि, जब शेयर बाजार में लगातार गिरावट आती है, तो निवेशकों को लगता है कि जब मार्केट अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है, तो निवेश करने का क्या फायदा। लेकिन अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। क्योंकि, ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि मंदी के इस मुश्किल दौर में निवेशित रहने वाले लोग ही लंबी अवधि में बाजार की रिकवरी का सबसे बड़ा फायदा उठाते हैं।
बाजार की गिरावट से डरें नहीं, जमे रहें
व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड (WhiteOak Capital Mutual Fund) की हालिया 'SIP Analysis Report' में एक बेहद आंखें खोलने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश के शुरुआती सालों में मिला कम या सुस्त रिटर्न असल में लंबी अवधि के निवेश क्षितिज (Investment Horizon) में आपके लिए एक बहुत मजबूत और बेहतर रिटर्न की नींव रखता है। इसलिए निवेशकों को शॉर्ट-टर्म मार्केट मूवमेंट को देखकर घबराने के बजाय अपने लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स पर फोकस करना चाहिए।
धीमी शुरुआत मजबूत आधार
रिपोर्ट में अगस्त 1996 से लेकर मई 2026 तक के पिछले 28 से अधिक वर्षों के 'BSE Sensex Total Return Index (TRI)' के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया है। इक्विटी एक ऐसा एसेट क्लास है, जिसमें उतार-चढ़ाव (Volatility) होना स्वाभाविक है, और निवेशकों को शुरुआती सालों में कम रिटर्न का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन इस ऐतिहासिक डेटा से जो बात सामने आई है, वह हर निवेशक का डर दूर कर सकती है।
शुरुआती 5 साल बनाम 10 साल का खेल
आंकड़े गवाह हैं कि जिन SIP ने अपने सफर के शुरुआती 5 वर्षों में अपेक्षाकृत काफी कम या निराशाजनक रिटर्न दिया, उन्होंने ही अगले 10 वर्षों की अवधि में औसतन सबसे बेहतरीन और दमदार रिटर्न जनरेट करके दिखाया।
मंदी का असली फायदा
इस रिपोर्ट में "A Slow Start is a Good Start" को आंकड़ों के साथ सही साबित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक शॉर्ट-टर्म के खराब प्रदर्शन से निवेशकों को बिल्कुल भी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि 'रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee-cost averaging) और लॉन्ग-टर्म कम्पाउंडिंग का असली जादू लंबी अवधि में ही काम करता है।
SIP से जुड़े 3 बड़े भ्रम और उनकी कड़वी सच्चाई
म्यूचुअल फंड निवेशक अक्सर कुछ भ्रामक सवालों में उलझकर अपना बड़ा नुकसान कर बैठते हैं। व्हाइटओक कैपिटल की रिपोर्ट ने डेटा के दम पर इन मिथकों को पूरी तरह तोड़ दिया है।
भ्रम 1: बाजार में एंट्री करने का 'सही समय' होता है
सच्चाई: बाजार के उतार-चढ़ाव को लगातार और सटीक रूप से टाइम करना किसी के लिए भी नामुमकिन है। सही समय के इंतजार में निवेश टालने वाले लोग अक्सर बड़े मौके गंवा देते हैं। निवेश न करना या बाजार से बाहर बैठना, किसी प्रतिकूल या गलत समय पर बाजार में प्रवेश करने से कहीं ज्यादा महंगा साबित हो सकता है। इसलिए हमेशा याद रखें बाजार को टाइम करने से कहीं ज्यादा जरूरी है बाजार में समय बिताना।
भ्रम 2: महीने की कोई विशेष तारीख SIP के लिए सबसे बेस्ट होती है?
सच्चाई: 28 साल से अधिक के सेंसक्स टीआरआई (Sensex TRI) डेटा का विश्लेषण करने पर पाया गया कि महीने की किसी भी तारीख को की गई एसआईपी के लॉन्ग-टर्म रिटर्न में कोई खास या सार्थक अंतर नहीं आता। इसलिए 'बेस्ट डेट' ढूंढने में दिमाग लगाने के बजाय वह तारीख चुनें जो आपकी सैलरी क्रेडिट या कैश-फ्लो साइकिल से मेल खाती हो।
भ्रम 3: रोज, हफ्ते या महीने... कौन सी एसआईपी फ्रीक्वेंसी बेस्ट है?
सच्चाई: रिपोर्ट के मुताबिक, आप चाहे डेली (Daily), वीकली (Weekly) या मंथली (Monthly) एसआईपी फ्रीक्वेंसी चुनें, लंबी अवधि में सभी से मिलने वाला रिटर्न लगभग एक जैसा (Identical) ही रहता है। मुख्य बात यह है कि आप कितनी जल्दी शुरुआत करते हैं और कितने कंसिस्टेंट (नियमित) रहते हैं, न कि यह कि आपने कौन सी फ्रीक्वेंसी चुनी है।
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डिस्क्लेमर: TimesNow Navbharat किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
