12 दिनों में 4 बार बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों को भारी घाटा! पेट्रोल पर 13 तो डीजल पर 38 रुपए नुकसान

पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ने के बावजूद OMCs की आफत कम नहीं हुई है। टैक्स हटाकर देखें तो कंपनियों को अब भी पेट्रोल पर 13 रुपए और डीजल पर 38 रुपए प्रति लीटर का भारी नुकसान हो रहा है।

भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में हाल ही में हुई लगभग 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बावजूद आम उपभोक्ताओं और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के बीच एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों को इस मामूली मूल्य संशोधन से बहुत मामूली राहत मिली है, क्योंकि लागत और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच का अंतर अब भी एक बहुत बड़ी खाई बना हुआ है। अगर सभी प्रकार के स्थानीय टैक्स और डीलर कमीशन को हटाकर शुद्ध रूप से देखा जाए, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण तेल कंपनियों को आज भी पेट्रोल (Petrol) पर प्रति लीटर 13 रुपये और डीजल (Diesel) पर प्रति लीटर 38 रुपए का एक बहुत बड़ा अंडर-रिकवरी (वित्तीय नुकसान) उठाना पड़ रहा है। इस भारी घाटे के कारण इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक दौर में पहुंच गई है, जिससे देश के ऊर्जा सुरक्षा नेटवर्क पर भी गहरा असर पड़ने का खतरा पैदा हो गया है।

Petrol Diesel

नहीं कम हो रहा नुकसान

ईंधन की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी के बावजूद देश की सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अगर सभी प्रकार के स्थानीय टैक्स और डीलर कमीशन को हटाकर शुद्ध रूप से देखा जाए, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची लागत के कारण तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को आज भी पेट्रोल पर प्रति लीटर 13 रुपए और डीजल पर प्रति लीटर 38 रुपए का एक बहुत बड़ा नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा है।

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