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Explainer: इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर हैं ये छह गलतफहमियां, आप विस्तार से समझें, भ्रम में ना रहें

लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर कई तरह के भ्रम और आशंकाएं या सीधे शब्दों में कहें तो गलतफहमियां रखते हैं जो कि पूरी तरह से सच नहीं हैं। आइए ईवी से जुड़े 6 मिथक और सच के बारे में जानते हैं...

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misconceptions about electric vehicles/Photo-Timesnowhindi
Authored by: Pradeep Pandey
Updated Nov 25, 2025, 15:12 IST
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इलेक्ट्रिक वाहन यानी ईवी ने ऑटोमोबाइल उद्योग में एक ऐसी क्रांति ला दी है, जिसने न सिर्फ पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम की है, बल्कि भविष्य की एक नई तस्वीर भी पेश की है। आज भारत सहित पूरा विश्व प्रदूषण, बढ़ती ईंधन कीमतों और जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।

ऐसे में ईवी एक मजबूत विकल्प बनकर उभरे हैं, जो पर्यावरण के साथ-साथ जेब के लिए भी हितकारी साबित हो रहे हैं। लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर कई तरह के भ्रम और आशंकाएं या सीधे शब्दों में कहें तो गलतफहमियां रखते हैं जो कि पूरी तरह से सच नहीं हैं। आइए ईवी से जुड़े 6 मिथक और सच के बारे में जानते हैं...

1. चार्जिंग में समय ज्यादा लगता है?

यह सोच अब पुरानी हो चुकी है। फास्ट-चार्जिंग तकनीक के साथ कई ईवी 60 मिनट में 80% तक चार्ज हो जाती हैं। दैनिक उपयोग में लोग अपनी कार को रात में घर पर ही आराम से चार्ज कर लेते हैं। शहरों और हाईवे पर चार्जिंग पॉइंट्स का बढ़ता नेटवर्क इस सुविधा को और मजबूत बना रहा है।

ev charging

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2. क्या ईवी की रेंज कम होती है?

आज भारत में उपलब्ध कई मॉडल एक बार चार्ज होने पर 300 किलोमीटर से भी ज्यादा चलने की क्षमता रखते हैं। लंबी यात्रा के लिए अब प्रमुख मार्गों पर फास्ट चार्जर भी उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे ‘रेंज एंग्जायटी’ काफी कम हुई है।

3. बारिश और पानी में ईवी असुरक्षित?

आधुनिक ईवी IP67-रेटेड बैटरी सुरक्षा के साथ आती हैं, जो पानी में भी सुरक्षित रहती है। यानी बारिश के मौसम में भी इन्हें निश्चिंत होकर चलाया जा सकता है।

4. चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर अभी कम है?

देश में 26,000 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं। अपार्टमेंट्स, हाउसिंग सोसाइटीज और ऑफिस पार्किंग में भी तेजी से निजी चार्जर लगाए जा रहे हैं। बढ़ती डिमांड के साथ यह संख्या और तेजी से बढ़ रही है।

Electric car

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5. कोयला आधारित बिजली होने पर कैसे पर्यावरण के अनुकूल?

भले ही देश की बिजली का एक हिस्सा अभी जीवाश्म ईंधन से बन रहा है, लेकिन ईवी अपने पूरे जीवनकाल में पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में 25-40% कम प्रदूषण करती हैं। भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे ईवी और ज्यादा ‘ग्रीन’ होती जा रही हैं।

6. क्या बैटरी जोखिमपूर्ण होती है?

हाईटेक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और कठोर भारतीय सुरक्षा मानक ईवी को पूरी तरह सुरक्षित बनाते हैं। सही चार्जिंग और समय-समय पर सर्विसिंग से किसी भी खतरे की गुंजाइश बेहद कम रह जाती है।

ईवी खरीदने का सही समय!

महिंद्रा, टाटा और अन्य कंपनियों के नए मॉडलों के साथ, ग्राहकों के लिए पहले से कहीं ज्यादा विकल्प मौजूद हैं। अगर आपका दैनिक उपयोग शहर और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित है और पार्किंग में चार्जिंग की सुविधा है, तो यह इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का सबसे अच्छा समय है। जो लोग लंबी यात्राएं करते हैं, वे अगले कुछ महीनों में आने वाले नए विकल्पों का भी इंतजार कर सकते हैं।

आज भारत में न केवल ईवी के विकल्प बढ़ रहे हैं, बल्कि चार्जिंग नेटवर्क भी तेजी से विस्तार पा रहा है, जिससे इन्हें अपनाना और भी आसान हो गया है। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक वाहनों की तुलना में काफी बेहतर साबित हो रहे हैं, क्योंकि वे जीवनकाल में कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं और नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से उनका प्रभाव और भी हरित होता जाएगा।

हालांकि ईवी उद्योग अभी विकास के दौर में है और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा बैटरी तकनीक में और सुधार की गुंजाइश बनी हुई है, लेकिन जिस रफ्तार से यह परिवर्तन हो रहा है, वह एक उत्साहजनक तस्वीर पेश करता है। सरकार, ऑटोमोबाइल कंपनियों और उपभोक्ताओं तीनों का संयुक्त प्रयास ही इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

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