भारत में E20 पेट्रोल पर बबाल मचा हुआ है। देशभर में सोशल मीडिया से लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया में यह मामला छाया हुआ है। बता दें कि ई20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण। इस पेट्रोल को लेकर गाड़ी मालिकों का कहना है कि इसे डालने से उनकी गाड़ी खराब हो रही है और माइलेज में गिरावट है। हालांकि, सरकार इसे नहीं मान रही है। खैर, इस बबाल के बीच आपको यह जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में गाड़ियों को चलाने के लिए 10 से ज्यादा तरह के ईंधनों (Fuel) का इस्तेमाल हो रहा है।
भारत में भी पेट्रोल, डीजल, CNG, इलेक्ट्रिक और एथेनॉल जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, जबकि हाइड्रोजन, मेथनॉल और सोलर जैसी तकनीकों पर तेजी से काम चल रहा है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले 10 प्रमुख ईंधन कौन-कौन से हैं और उनके फायदे-नुकसान क्या हैं।
1. पेट्रोल
पेट्रोल दुनिया भर में गाड़ियों के लिए इस्तेमाल होने वाला सबसे आम और पारंपरिक ईंधन है। पेट्रोल भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला भी वाहन ईंधन है। यह मुख्य रूप से कारों, बाइक और स्कूटर में उपयोग होता है।
किसके लिए बेस्ट है: 4-व्हीलर गाड़ियां और सभी प्रकार की मोटरसाइकिल/स्कूटर।
फायदे
- डीजल और हाइब्रिड तकनीक की तुलना में पेट्रोल गाड़ियां शुरुआती तौर पर सस्ती होती हैं।
- यह इंजन को बेहतरीन Pick-up और स्मूथ परफॉर्मेंस प्रदान करता है।
- देश के कोने-कोने में पेट्रोल पंप आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे लंबी दूरी की यात्रा में कोई परेशानी नहीं होती।
नुकसान
- पेट्रोल इंजन से प्रदूषण अधिक होता है।
- डीजल या सीएनजी की तुलना में पेट्रोल गाड़ियों का माइलेज कम होता है, जिससे दैनिक रनिंग कॉस्ट बढ़ जाती है।
2. डीजल
डीजल भी कच्चे तेल से ही प्राप्त होता है, लेकिन इसे विशेष रूप से भारी इंजनों और हाई-टॉर्क वाले कंप्रेसर इंजनों के लिए तैयार किया जाता है।
किसके लिए बेस्ट है: भारी वाहन जैसे ट्रक्स, बसें, ट्रेनें, एसयूवी (SUVs) और कमर्शियल गाड़ियां।
फायदे
- डीजल गाड़ियां बेहतरीन टॉर्क जेनरेट करती हैं, जो भारी लोड खींचने और एक्सप्रेसवे पर लंबी दूरी तय करने के लिए शानदार है।
- यह पेट्रोल के मुकाबले 25-30% बेहतर माइलेज देता है, जिससे लंबी दूरी के सफर में यह किफायती साबित होता है।
नुकसान
- डीजल इंजनों का मेंटेनेंस (रखरखाव) का खर्च पेट्रोल गाड़ियों की तुलना में काफी ज्यादा होता है।
- वर्तमान समय में डीजल इंजनों से होने वाले प्रदूषण के कारण सरकारें इस पर कड़े प्रतिबंध लगा रही हैं और यह हर कार मॉडल में उपलब्ध नहीं होता।
3. सीएनजी (CNG)
शहरी इलाकों में प्रदूषण कम करने और पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों से राहत पाने के लिए सीएनजी एक बेहद लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरा है। इसमें मुख्य रूप से कंप्रेस्ड मीथेन गैस होती है।
किसके लिए बेस्ट है: दैनिक रूप से शहर में चलने वाली पैसेंजर कारें, ऑटो-रिक्शा, टैक्सियां और सिटी बसें।
फायदे
- इसे पर्यावरण के अनुकूल यानी 'ग्रीन फ्यूल' कहा जाता है क्योंकि इसमें लेड और सल्फर नहीं होता।
- इसका ऑटो-इग्निशन टेम्परेचर (540°C) बहुत हाई होता है और यह लीक-प्रूफ प्रमाणित सिलेंडरों में स्टोर होती है, जिससे यह काफी सुरक्षित है।
- पेट्रोल के मुकाबले इसकी रनिंग कॉस्ट काफी कम होती है।
नुकसान
- सीएनजी सिलेंडर गाड़ी के बूट स्पेस (डिक्की) का लगभग 1/3 हिस्सा घेर लेता है, जिससे सामान रखने की जगह नहीं बचती।
- पेट्रोल-डीजल की तुलना में सीएनजी स्टेशनों पर अक्सर लंबी लाइनें मिलती हैं।
- नियमित इस्तेमाल से इंजन के फ्यूल इंजेक्टर्स जल्दी ड्राई हो जाते हैं, जिससे 3-4 साल बाद गाड़ी की परफॉर्मेंस में 10% तक की गिरावट आ सकती है।
4. बायो-डीजल
बायो-डीजल एक जैविक ईंधन (Biofuel) है, जिसे वनस्पति तेल (Vegetable Oil), पशुओं की चर्बी (Animal Fat) और रेस्टोरेंट के वेस्ट कुकिंग ऑयल को रिसाइकिल करके ट्रांसएस्टरीफिकेशन प्रक्रिया के जरिए बनाया जाता है। हालांकि, चुनिंदा सरकारी पंपों पर बायोडीजल (या बायोडीजल-मिश्रित डीजल) उपलब्ध होता है। पेट्रोल-डीजल की तुलना में इसकी उपलब्धता बेहद सीमित है।
किसके लिए बेस्ट है: डीजल से चलने वाले ट्रक्स, एसयूवी और विशेष रूप से निर्मित कमर्शियल गाड़ियां।
फायदे
- यह पूरी तरह से रिन्यूएबल है, जो पारंपरिक डीजल की तुलना में 11% कम कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जित करता है।
- यह इंजन के भीतर जमा गंदगी को साफ करने के लिए एक Solvent के रूप में काम करता है, जिससे इंजन की लाइफ बढ़ती है।
- इसे मौजूदा डीजल इंजनों में बिना किसी बड़े बदलाव के सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है।
नुकसान
- कम तापमान या सर्दियों के मौसम में बायो-डीजल में 'गेलिंग' (Gelling) की समस्या होती है, यानी इसका पैराफिन घटक जम जाता है, जिससे इंजन स्टार्ट करने में दिक्कत आती है।
- इंजन की गंदगी साफ करते समय कभी-कभी वह गंदगी गैसकेट या फिल्टर में फंस जाती है, जिससे रबर होसेस को नुकसान पहुंच सकता है।
5. एलपीजी (LPG )
लिक्विड पेट्रोलियम गैस को ऑटो-गैस भी कहा जाता है। यह प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है, जो पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाती है। हालांकि, सीएनजी आने के बाद इसका इस्तेमाल बहुत ही कम हो गया है।
किसके लिए बेस्ट है: लाइट-ड्यूटी पैसेंजर गाड़ियां और रेट्रो-फिटेड गाड़ियां।
फायदे
यह पेट्रोल-डीजल की तुलना में काफी कम कार्बन छोड़ती है और इंजन के पुर्जों पर कम दबाव डालती है।
नुकसान
सीएनजी की तरह इसमें भी बूट स्पेस की कमी हो जाती है।
6. इथेनॉल
इथेनॉल एक अल्कोहल-आधारित ईंधन है, जिसे गन्ने के रस, मक्के या भारी शीरे को फर्मेंट करके बनाया जाता है। भारत सरकार वर्तमान में पेट्रोल में 20% तक इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) कर रही रही है।
किसके लिए बेस्ट है: रेसिंग कारें और फ्लेक्स-फ्यूल या इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल इंजन वाली गाड़ियां।
फायदे
- यह पूरी तरह स्वदेशी और कृषि आधारित ईंधन है, जिससे देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है।
- इसका ऑक्टेन नंबर बहुत हाई होता है, जिससे इंजन को अधिक पावर मिलती है।
नुकसान
- शुद्ध इथेनॉल का इस्तेमाल सामान्य इंजनों में नहीं किया जा सकता; इसके लिए 'फ्लेक्स-फ्यूल' इंजन की आवश्यकता होती है।
- शुद्ध पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल ब्लेंडेड ईंधन से माइलेज में गिरावट आती है। पुरानी गाड़ियों में इसके इस्तेमाल से समस्या आती है।
7. मेथेनॉल
मेथेनॉल, मुख्य रूप से कोयले, प्राकृतिक गैस या बायोमास से तैयार किया जाता है।
किसके लिए बेस्ट है: रेसिंग कारें, भारी कमर्शियल गाड़ियां और जहाजों के इंजन।
फायदे
- इसकी उत्पादन लागत बहुत कम होती है, जिससे यह एक किफायती विकल्प बन सकता है।
- यह अत्यधिक ज्वलनशील होने के बावजूद पारंपरिक ईंधन की तुलना में कम विषैला धुआं छोड़ता है।
नुकसान
- यह अत्यधिक संक्षारक (Corrosive) होता है, जिसके कारण यह सामान्य इंजन की एल्युमिनियम और रबर लाइनों को जल्दी गला देता है।
- आम कमर्शियल वाहनों के लिए वर्तमान में इसका बुनियादी ढांचा (फ्यूलिंग स्टेशन) उपलब्ध नहीं है।
8. हाइड्रोजन
हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन माना जा रहा है। गाड़ियां इसका उपयोग दो तरीकों से करती हैं – हाइड्रोजन फ्यूल सेल (HFCV), जो हाइड्रोजन से बिजली बनाकर मोटर चलाती है, और हाइड्रोजन इंटरनल कंबशन इंजन, जो सीधे हाइड्रोजन को जलाकर पावर पैदा करता है।
किसके लिए बेस्ट है: भविष्य की एडवांस कारें, भारी ट्रक्स और लंबी दूरी की बसें।
फायदे
- यह 100% प्रदूषण मुक्त है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल गाड़ियों के साइलेंसर से धुएं की जगह सिर्फ शुद्ध पानी (Water Vapor) निकलता है।
- इसकी एनर्जी डेंसिटी बहुत हाई होती है, जिससे यह बेहद कम समय में रीफ्यूल होकर लंबी दूरी तय कर सकती है।
नुकसान
- वर्तमान में हाइड्रोजन उत्पादन और इसके स्टोरेज (अत्यधिक उच्च दबाव वाले सिलेंडर) की तकनीक बहुत महंगी है।
- भारत सहित दुनिया भर में इसके रीफ्यूलिंग स्टेशनों का नेटवर्क अभी शुरुआती स्तर पर है।
9. हाइब्रिड
हाइब्रिड कोई अलग ईंधन नहीं बल्कि एक ऐसी तकनीक है जहां पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल/डीजल) और इलेक्ट्रिक बैटरी दोनों मिलकर गाड़ी को चलाते हैं।
किसके लिए बेस्ट है: मध्यम और प्रीमियम रेंज की पैसेंजर कारें जो शहर और हाईवे दोनों जगह चलती हैं।
फायदे
- यह शहर के ट्रैफिक में सिर्फ बैटरी पर चलती है और हाईवे पर पेट्रोल इंजन पर शिफ्ट हो जाती है, जिससे इसका माइलेज बढ़ जाता है।
- प्लग-इन हाइब्रिड को आप घर पर चार्ज भी कर सकते हैं।
नुकसान
दोहरी तकनीक (इंजन + बैटरी + मोटर) होने के कारण इन गाड़ियों की शुरुआती कीमत काफी ज्यादा होती है।
10. सोलर
ये गाड़ियां सूरज की रोशनी से सीधे ऊर्जा प्राप्त करती हैं। इनकी बॉडी पर फोटोवोल्टिक (Solar) सेल्स लगे होते हैं, जो धूप को बिजली में बदलकर बैटरी चार्ज करते हैं।
किसके लिए बेस्ट है: गोल्फ कार्ट्स और छोटे कमर्शियल लोडर।
फायदे
ईंधन की लागत बिल्कुल शून्य (₹0) है क्योंकि यह पूरी तरह मुफ्त सौर ऊर्जा पर चलती है।
नुकसान
- बादलों वाले मौसम या रात के समय ये गाड़ियां सीधे चार्ज नहीं हो सकतीं।
- सोलर पैनलों की क्षमता अभी इतनी नहीं है कि वे भारी गाड़ियों को बहुत तेज रफ्तार में लंबी दूरी तक चला सकें।
