बिहार को अक्सर पारंपरिक खेती और छोटे किसानों के राज्य के रूप में देखा जाता है, लेकिन समस्तीपुर के किसान सुधांशु कुमार ने इस सोच को बदलने का काम किया है। कभी टाटा के चाय बागान में शानदार नौकरी, बंगला और बुलेट की सवारी करने वाले सुधांशु आज आधुनिक खेती के जरिए करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर चुके हैं।
आज वह 60 से 70 एकड़ जमीन पर हाईटेक खेती कर रहे हैं और उनका सालाना टर्नओवर करीब 2 से 3 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उनकी सफलता की कहानी बताती है कि खेती अगर सही सोच, तकनीक और बिजनेस मॉडल के साथ की जाए तो यह भी एक बड़ा करियर विकल्प बन सकती है।
दार्जिलिंग से दिल्ली तक की पढ़ाई, फिर टाटा में मिली शानदार नौकरी
सुधांशु कुमार की कहानी आम किसानों से अलग है। सुधांशु ने टाइम्सनाउ नवभारत से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई दार्जिलिंग में हुई। इसके बाद वह दिल्ली पहुंचे और हंसराज कॉलेज से बीए और एमए की पढ़ाई पूरी की। दिल्ली में रहते हुए उन्होंने आईएएस बनने की तैयारी भी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद साल 1988 में उन्हें टाटा चाय बागान, मुन्नार (केरल) में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी मिल गई।
sudhanshu kumar farmer samastipur
उस समय उनकी सैलरी करीब 4000 रुपये थी, जो काफी अच्छी मानी जाती थी। कंपनी की ओर से उन्हें रहने के लिए बंगला, चलने के लिए बुलेट मोटरसाइकिल और सुरक्षा के लिए गार्ड जैसी सुविधाएं मिली हुई थीं। बाहर से जिंदगी बेहद शानदार थी, लेकिन उनके मन में अपनी मिट्टी और खेती से जुड़ने की इच्छा बनी रही।
नौकरी छोड़कर लौटे गांव, 20 साल तक किया संघर्ष
कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर सुधांशु कुमार ने बिहार लौटने का फैसला किया। उन्होंने खेती शुरू की, लेकिन शुरुआत आसान नहीं रही। करीब 20 साल तक उन्होंने कई प्रयोग किए और खेती के नए तरीकों को समझा। इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि केवल धान, गेहूं और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों से बड़ी आर्थिक सफलता हासिल करना मुश्किल है। इसके बाद उन्होंने खेती को सिर्फ उत्पादन नहीं बल्कि एक बिजनेस की तरह देखना शुरू किया और प्रीमियम फलों की खेती पर ध्यान दिया।
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ड्रैगन फ्रूट से स्ट्रॉबेरी तक, खेत बना प्रीमियम फ्रूट हब
आज सुधांशु कुमार के फार्म में कई तरह के महंगे और डिमांड वाले फल उगाए जाते हैं। इनमें ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, मौसमी, अमरूद, केला, आम, शाही लीची आदि शामिल हैं। उन्होंने ऐसी फसलों का चुनाव किया जिनकी बाजार में कीमत ज्यादा है और जिन्हें सीधे बड़े ग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है।
sudhanshu kumar bihar farmer
खेती में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, बना बिहार का हाईटेक फार्म
सुधांशु कुमार का फार्म सिर्फ बड़ा ही नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक से लैस भी है। उन्होंने खेती में कई डिजिटल और ऑटोमेशन सिस्टम अपनाए हैं। फार्म में केले की खेती के लिए ऑटोमैटिक खाद और पानी देने की व्यवस्था है। पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी इंटरनेट के जरिए की जाती है।
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इसके अलावा पानी की बचत और बेहतर उत्पादन के लिए ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि उनका फार्म देखने के लिए देश के कई राज्यों से किसान और कृषि विशेषज्ञ पहुंच चुके हैं।
मंडी पर निर्भरता खत्म, सीधे कंपनियों तक पहुंचाई फसल
सुधांशु कुमार ने खेती के साथ मार्केटिंग पर भी ध्यान दिया। उन्होंने अपनी फसलों को सिर्फ स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सीधे बड़ी फूड और रिटेल कंपनियों तक पहुंचाना शुरू किया। इससे उन्हें बेहतर कीमत मिली और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई। यही बिजनेस सोच उनकी सफलता का बड़ा कारण बनी।
खेती से रोजगार भी बढ़ाया, 100 लोगों को मिला काम
सुधांशु कुमार की सफलता सिर्फ उनकी कमाई तक सीमित नहीं है। उनके फार्म से कई लोगों को रोजगार भी मिला है। फार्म पर नियमित रूप से 50 से 55 लोग काम करते हैं। इसके अलावा मैनेजमेंट के लिए सुपरवाइजर और स्थायी कर्मचारी भी जुड़े हुए हैं। सीजन के दौरान रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या 100 तक पहुंच जाती है।
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नए किसानों को दी सफलता की तीन सलाह
सुधांशु कुमार का मानना है कि आज के किसानों को खेती को नए नजरिए से देखने की जरूरत है। वह युवाओं को सलाह देते हैं कि पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर बाजार की मांग के हिसाब से खेती करनी चाहिए।
उनके अनुसार सफलता के लिए तीन बातें जरूरी हैं:
- ऐसी फसलों का चुनाव करें जिनकी बाजार में ज्यादा मांग और कीमत हो।
- खेती में आधुनिक तकनीक और ऑटोमेशन अपनाएं।
- खेती को सिर्फ काम नहीं बल्कि एक बिजनेस की तरह चलाएं।
