Times Now Navbharat Explainer: पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन दावा करते हैं कि ईरान के साथ स्थायी शांति समझौता अपने आखिरी चरण में है और जब मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से ऐसी खबरें सामने आती हैं कि अंतिम समझौता हो गया है तो वॉशिंगटन तत्काल ही उस पर स्पष्टीकरण जारी करता है और इन रिपोर्ट्स को भ्रामक बताता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एनबीसी न्यूज के साथ बातचीत में दावा किया कि वॉशिंगटन ईरान के साथ समझौता करने के बहुत करीब है। उन्होंने कहा, ''हम समझौते के बेहद करीब हैं और अगर समझौता नहीं हुआ, तो भी हम किसी न किसी तरह से इसे कर लेंगे। दोनों ही स्थिति में हमारी ही जीत होगी।''
हाल के दिनों में लेबनान, गाजा, इजरायल और कुवैत से हमलों की खबरें सामने आई हैं। ट्रंप ने भी कुछ वक्त पहले स्वीकार किया था कि क्षेत्र में लागू युद्धविराम पूरी तरह हिंसा नहीं रोक पाए हैं। कई जगहों पर युद्धविराम का मतलब 'कम तीव्रता वाली गोलीबारी' रह गया है, न कि युद्ध का अंत।
बेरूत पर नहीं रुके हमले
लेबनान और गाजा में इजरायली हवाई हमले जारी हैं, हिजबुल्लाह भी जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इजरायली सेना ने रविवार को ही बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कहर बरपाया। इस दौरान, तीन धमाकों की आवाजें सुनाई दीं। जबकि हाल ही में इजरायल और लेबनान के बीच वॉशिंगटन ने युद्धविराम समझौता लागू कराया था।
Iran
साथ ही ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से कहा था कि बेरूत पर हमला करना स्वीकार्य नहीं होगा, क्योंकि वह हिजबुल्लाह के सहयोगी देश ईरान के साथ एक शांति समझौता करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान के साथ किसी अल्पकालिक समझौते में लेबनान का शामिल होना उनके लिए अनिवार्य नहीं है।
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लेबनान में क्यों नहीं थम रहा संघर्ष?
इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच 2024 की लड़ाई के बाद एक युद्धविराम समझौता हुआ था, लेकिन दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं। फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले के बाद लड़ाई फिर तेज हो गई। इसके बाद, हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले शुरू किए, जबकि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया और हवाई हमले तेज कर दिए।
16 अप्रैल को ट्रंप ने 10 दिन के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद बेरूत पर हमले अपेक्षाकृत कम हुए, लेकिन दक्षिणी लेबनान में संघर्ष जारी रहा। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक, 16 अप्रैल के बाद इजरायली हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और मार्च से अब तक कुल मृतकों की संख्या 3,500 से अधिक हो गई है, जबकि इजरायल का कहना है कि मार्च के बाद हिजबुल्लाह के हमलों में उसके 26 सैनिक और चार नागरिक मारे गए हैं।
US Iran Talks
ईरान चाहता है कि लेबनान में युद्धविराम को अमेरिका और इजरायल के साथ किसी व्यापक समझौते का हिस्सा बनाया जाए। ट्रंप ने पिछले दिनों दावा किया था कि लेबनान और इजरायल नए युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं, बशर्ते हिजबुल्लाह दक्षिणी क्षेत्रों से हट जाए, लेकिन हिजबुल्लाह ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
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ईरान-US के बीच बनेनी स्थायी सहमति
अमेरिका ने अप्रैल की शुरुआत में ईरान के साथ अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की। हालांकि, पाकिस्तान की मध्यस्थता में कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई व्यापक समझौता नहीं हो सका है। इस बीच, दोनों पक्षों के बीच हमले जारी हैं और ईरान ने इस सप्ताह कुवैत समेत खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया।
क्यों नहीं हो पा रहा समझौता?
पश्चिम एशिया के जानकारों का मानना है कि इजरायल-लेबनान और अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम शुरुआती चरण से आगे नहीं बढ़ पाया है। स्थायी शांति के लिए जिन कठिन राजनीतिक समझौतों की जरूरत है, उन्हें स्वीकार करने के लिए कोई भी पक्ष तैयार नहीं दिखाई दे रहा है।
