Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार को 52वें G7 समिट में शामिल होने के लिए फ्रांस के रिसॉर्ट टाउन एवियन-लेस-बेन्स पहुंचे। मध्य पूर्व में हाल ही में हुए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समझौते के बाद उनके पास इस बैठक में मजबूत कूटनीतिक बढ़त मानी जा रही है। मीडिया से थोड़ी दूरी से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "सब कुछ बहुत अच्छा है" (Everything is very nice) और रिपोर्टरों की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप G7 समिट में शामिल होने के लिए पहुंचे (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)
फ्रांस के खूबसूरत स्पा शहर एवियन में आयोजित यह शीर्ष स्तर का बहुपक्षीय सम्मेलन 15 से 17 जून तक चलने वाला है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया आर्थिक और सुरक्षा से जुड़ी बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। इस प्रमुख कूटनीतिक समूह में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं, जबकि यूरोपीय संघ 1981 से इसका हिस्सा बना हुआ है। ट्रंप हाल ही में जिनेवा पहुंचे और वहां से फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस के लिए रवाना हुए। ईरान के साथ हाल ही में घोषित शांति समझौता इस बैठक के प्रमुख मुद्दों में से एक होने की संभावना है।
कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी भी मौजूद
ट्रंप वॉशिंगटन से देर रात उड़ान भरकर रवाना हुए। वे तड़के सुबह के समय अमेरिका से निकले। वहीं उनकी एक द्विपक्षीय बैठक जी7 के होस्ट और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ होने वाली है। इस यात्रा में एयर फोर्स वन पर उनके साथ कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें US सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो, ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट, कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक, एम्बेसडर जैमीसन ग्रीर और मोनिका क्राउली, व्हाइट हाउस चीफ और डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ सूसी विल्स और डैन स्कैविनो, व्हाइट हाउस डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ फॉर ऑपरेशंस ब्यू हैरिसन, प्रेसिडेंट के असिस्टेंट और व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर स्टीवन चेउंग, US के नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट, सेक्रेटरी के पॉलिसी प्लानिंग स्टाफ के डायरेक्टर माइकल ए. नीधम के साथ-साथ व्हाइट हाउस स्टाफ सेक्रेटरी विल शार्फ, व्हाइट हाउस के स्पीचराइटिंग डायरेक्टर रॉस वर्थिंगटन और व्हाइट हाउस ओवल ऑफिस ऑपरेशंस के डायरेक्टर वॉल्ट नौटा भी विमान में मौजूद थे।
एक दिन पहले ही सम्मेलन छोड़ा था
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की इच्छा थी कि शिखर सम्मेलन में यूरोपीय नेताओं से मुलाकात से पहले शांति समझौते को लेकर एक रूपरेखा (फ्रेमवर्क) तैयार हो जाए, जिसकी शुरुआत आज से हो रही है। गौरतलब है कि 2025 में कनाडा में आयोजित जी7 बैठक के दौरान उन्होंने एक दिन पहले ही सम्मेलन छोड़ दिया था। उस समय इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष तेजी से बढ़ रहा था। व्हाइट हाउस ने तब कहा था कि मध्य पूर्व की स्थिति को देखते हुए राष्ट्रपति को अमेरिका लौटना पड़ा। कनानास्किस नामक रिसॉर्ट टाउन में नेताओं से मुलाकात के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था कि ईरान अब लगभग बातचीत की मेज पर है और वे समझौता करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि जैसे ही वे वहां से रवाना होंगे, इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर चेतावनी देते हुए कहा था कि “सभी लोगों को तुरंत तेहरान खाली कर देना चाहिए!”, हालांकि उन्होंने इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया। इसके कुछ दिनों बाद उन्होंने ईरान के अंदर तीन परमाणु ठिकानों पर भारी बमबारी करने के लिए अमेरिकी लड़ाकू विमानों को आदेश दिया।
17 जून तक चलेगा सम्मेलन
इस बीच, 52वां जी7 शिखर सम्मेलन सोमवार से फ्रांस के खूबसूरत स्पा शहर एवियन में शुरू हो रहा है, जहां दुनिया के प्रमुख नेता आर्थिक असंतुलन, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक शासन से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। फ्रांस इस तीन दिवसीय उच्च-स्तरीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जो 15 से 17 जून तक चलेगा। सम्मेलन की शुरुआत से एक दिन पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक्स (X) पर एक वीडियो संदेश जारी कर बैठक की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, "मैं एवियन पहुंच चुका हूं।" उन्होंने आगे बताया कि इस शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय संकटों, वैश्विक व्यापार असंतुलन और साइबर सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
वैश्विक मुद्दों पर आगे बढ़ने की कोशिश
मैक्रों ने शिखर सम्मेलन में शामिल प्रमुख प्रतिभागियों का जिक्र करते हुए कहा कि एवियन में संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान, यूरोपीय आयोग और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष का स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी मिलकर प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। जी7 के मुख्य सदस्य देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं, जो उच्च स्तरीय वार्ताओं में भाग लेते हैं। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने के लिए फ्रांस ने कुछ प्रमुख साझेदार देशों को भी इस पहल में शामिल करने पर जोर दिया है। मैक्रों ने कहा कि इस प्रयास में दक्षिण कोरिया, भारत, केन्या और ब्राजील जैसे देशों के साथ विशेष सहयोग और तालमेल स्थापित करने की कोशिश की जाएगी।
13वीं बार भारत पार्टनर देश के रूप में शामिल
इस पहल के तहत मेजबान देश ने ब्राजील, मिस्र, भारत, केन्या, दक्षिण कोरिया, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, यूक्रेन और संयुक्त अरब अमीरात को आउटरीच पार्टनर देशों के रूप में आमंत्रित किया है। यह उच्च-स्तरीय भागीदारी भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह 13वीं बार है जब भारत जी7 शिखर सम्मेलन में पार्टनर देश के रूप में शामिल हो रहा है। यह वैश्विक मंच पर नई दिल्ली के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। साथ ही, यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में लगातार सातवीं उपस्थिति भी होगी।
मैक्रोइकोनॉमिक गवर्नेंस और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचा
इस बार की चर्चाओं का मुख्य फोकस कई अहम वैश्विक मुद्दों पर है, जिनमें मैक्रोइकोनॉमिक गवर्नेंस और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचा शामिल हैं। इसके अलावा, वैश्विक स्वास्थ्य और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोगी रूपरेखाओं पर भी विचार किया जा रहा है। सम्मेलन में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर भी विशेष चर्चा होगी, खासकर ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते को लेकर। ट्रंप ने रविवार को दावा किया था कि ईरान के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है और इसके बाद रणनीतिक जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी फिर से खोल दिया जाएगा, जिसकी औपचारिक पुष्टि शुक्रवार को समझौते पर हस्ताक्षर के बाद होगी।
