US Troops Leave Iraq 2026: अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मिडिल ईस्ट से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। साल 2003 में सद्दाम हुसैन का तख्तापलट करने के लिए इराक में दाखिल हुई अमेरिकी सेना अब वहां से पूरी तरह विदा होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने व्हाइट हाउस में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस ऐतिहासिक फैसले का ऐलान किया है। 30 सितंबर 2026 तक इराक से सभी अमेरिकी सैनिकों की वापसी पूरी हो जाएगी और इसके साथ ही 23 साल लंबे सैन्य अभियान का औपचारिक रूप से अंत हो जाएगा। आइए आसान भाषा में इस पूरे घटनाक्रम और इसके पीछे की रणनीतिक इनसाइड स्टोरी को 5 पॉइंट्स में समझते हैं।
23 साल बाद इराक से पूरी तरह हटेगी अमेरिकी सेना, ट्रंप और अल-जैदी के 'ऐतिहासिक समझौते' की 5 बड़ी बातें
1. व्हाइट हाउस में क्या तय हुआ?
इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ ओवल ऑफिस में मुलाकात के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि अब वाशिंगटन को इराक में अपनी सेना रखने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती। डोनाल्ड ट्रंप ने अपना रुख जाहिर करते हुए कहा, 'हमें नहीं लगता कि अब वहां सेना की जरूरत है। इराक के साथ हमारे संबंध अब बहुत बड़े और व्यापक हो चुके हैं, जहां सेना की आवश्यकता नहीं रह गई है। अगर जरूरत पड़ी तो हम उनकी मदद और सुरक्षा के लिए तैयार हैं, लेकिन अब इसकी नौबत नहीं आएगी।'
वहीं, इराकी प्रधानमंत्री अल-जैदी ने एक अनुवादक के जरिए स्पष्ट किया, '30 सितंबर तक अमेरिकी सेना इराक से पूरी तरह बाहर हो जाएगी, जबकि अमेरिकी कंपनियां इराक के भीतर रहकर अपना काम जारी रखेंगी।'
2. बंदूक की जगह 'बिजनेस': क्या है नया गेमप्लान?
इस सैन्य वापसी का मतलब यह कतई नहीं है कि अमेरिका इराक को पूरी तरह छोड़ रहा है। दरअसल, अब अमेरिका का फोकस 'सैन्य शक्ति' से हटकर 'आर्थिक साझेदारी' पर आ गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियां (Oil Companies) अब इराक में बड़े पैमाने पर जा रही हैं और इराकी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रही हैं। ट्रंप ने नए फोकस को लेकर बात की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब सैनिकों की सुरक्षा पर पैसा खर्च करने के बजाय वहां से तेल आयात और व्यापारिक सौदों के जरिए भारी मुनाफा कमाने और दोनों देशों में रोजगार पैदा करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ बैठक। (AP)
3. सुरक्षा की जिम्मेदारी अब किसके पास? ISIS का क्या?
पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) ने स्पष्ट किया कि यह वापसी 2024 में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन के दौरान इराक के साथ हुए सुरक्षा समझौते की अगली कड़ी है।
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट (IS/ISIS) के खिलाफ लड़ाई की मुख्य कमान धीरे-धीरे इराकी सुरक्षा बलों को सौंप दी है, जिन्हें अमेरिकी सैनिकों ने ही ट्रेनिंग और सपोर्ट दिया था।
2024 के समझौते के समय इराक में करीब 2,500 अमेरिकी सैनिक थे। हाल के महीनों में अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को लगातार घटाया है (जैसे जनवरी में ऐन अल-असद एयरबेस को पूरी तरह खाली कर दिया गया था)। अब जो थोड़े-बहुत मिलिट्री एडवाइजर्स बचे हैं, वे भी 30 सितंबर तक हट जाएंगे।
4. इराक के भीतर का आंतरिक समीकरण और 'मिलिशिया' का अंत
प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के लिए यह सैन्य वापसी एक बड़ी राजनीतिक जीत है, लेकिन इसके साथ ही उनके सामने एक बहुत बड़ी घरेलू चुनौती भी है। जैसे हथियारों पर केवल सरकार का हक। पीएम अल-जैदी ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार का मुख्य एजेंडा इराक के भीतर सक्रिय विभिन्न सशस्त्र गुटों (Iran-backed Militias) का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण करना है। उन्होंने कहा कि 30 सितंबर की समयसीमा के बाद देश में किसी भी गुट या धड़े के पास राज्य (सरकार) के नियंत्रण से बाहर हथियार रखने का कोई कानूनी अधिकार या औचित्य नहीं बचेगा और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
5. टाइमलाइन: 2003 से 2026 तक अमेरिकी सैन्य सफर
अमेरिकी सेना का इराक में सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है, जिसे इस संक्षिप्त टाइमलाइन से समझा जा सकता है:
-मार्च 2003 (आक्रमण): अमेरिका ने सद्दाम हुसैन के पास 'विनाशकारी हथियार' (WMD) होने का दावा कर इराक पर हमला किया (हालांकि बाद में कोई हथियार नहीं मिले)।
- 2007 (चरम पर सेना): इराक में गृहयुद्ध और विद्रोह को दबाने के लिए अमेरिका ने अपने सबसे ज्यादा 1,70,000 से अधिक सैनिक तैनात किए।
-दिसंबर 2011 (पहली वापसी): ओबामा प्रशासन के दौरान अधिकांश लड़ाकू सैनिकों को वापस बुला लिया गया।
-2014 (ISIS के खिलाफ वापसी): इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंक के बाद इराकी सरकार के बुलावे पर अमेरिकी सेना दोबारा ट्रेनिंग और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए इराक लौटी।
-2021 से 2024: ISIS का क्षेत्रीय नियंत्रण खत्म होने के बाद केवल 2,500 सैनिक गैर-लड़ाकू (Non-combat) भूमिका में बचे और 2024 में पूर्ण वापसी का रोडमैप तैयार हुआ।
- 30 सितंबर 2026 (पूर्ण अंत): 23 साल बाद इराक से आधिकारिक रूप से अमेरिकी मिलिट्री मिशन का हमेशा के लिए अंत।
बता दें कि यह फैसला मिडिल ईस्ट (भू-राजनीति) के लिए एक नए युग की शुरुआत है। जहां अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी बेहद अफरातफरी और अराजकता के बीच हुई थी, वहीं इराक से हो रही यह विदाई एक सुव्यवस्थित द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते के तहत हो रही है। अब देखना यह होगा कि अमेरिकी सेना के जाने के बाद इराकी सरकार वहां के आंतरिक गुटों और ईरान के प्रभाव को कैसे संभालती है।
