US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच रुक-रुक कर चल रहा सैन्य संघर्ष अब एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध में पहली बार सऊदी अरब सार्वजनिक रूप से अमेरिका के साथ सीधे सैन्य अभियानों में शामिल हो गया है। दोनों देशों ने इराक में ईरान-समर्थित लड़ाकों के ठिकानों पर संयुक्त एयरस्ट्राइक की हैं। दूसरी ओर, दोनों दुश्मन देशों के बीच गहराते अविश्वास के कारण शांति बहाली की कोशिशें पूरी तरह से ठप हो चुकी हैं। बीते 24 घंटों के भीतर हुए ताजा सैन्य हमलों ने पूरे क्षेत्र में पूर्ण युद्ध के खतरे को एक बार फिर से बढ़ा दिया है।
मध्यावधि चुनाव से पहले बैकफुट पर ट्रंप
जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमला
हालिया तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने जॉर्डन स्थित मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसे अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट करने का दावा किया। इस हमले के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे पहले ही माफी मांग चुके हैं, लेकिन हमें उन्हें थोड़ा सबक सिखाने की जरूरत है। अब हमारी बारी है, हम उन पर बहुत जोरदार हमला करने जा रहे हैं।
इसके अलावा, मिस्र के एक बंदरगाह पर खड़े दो प्राकृतिक गैस जहाजों में ड्रोन हमले के बाद आग लग गई। यदि इसमें ईरान या उसके सहयोगियों की संलिप्तता की पुष्टि होती है, तो यह युद्ध का मिस्र जैसे मध्यस्थ देश तक फैलाव माना जाएगा।
सऊदी अरब की सैन्य एंट्री और इजरायल का रुख
ड्रोन हमलों के जवाब में सऊदी अरब ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर इराक में ईरानी मिलिशिया के हथियार और रसद ठिकानों को नष्ट कर दिया। यह पहला मौका है जब सऊदी अरब ने इराक में इस तरह की सीधी सैन्य कार्रवाई की है। वहीं दूसरी ओर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की। AP के सूत्रों के अनुसार, इजरायली अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अमेरिका में होने वाले आगामी मध्यावधि चुनाव के कारण ट्रंप प्रशासन युद्ध को कम तीव्रता पर रखना चाहता है। साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें उछल रही हैं।
सैनिकों और पेट्रियट मिसाइल स्टोर्स पर गहराता संकट
पेंटागन और अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय उनका घटता मिसाइल इंटरसेप्टर (Patriot और THAAD) भंडार है। लगातार हो रहे हमलों को रोकने में अमेरिका के रक्षा तंत्र का बहुत बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है। अमेरिकी चेयरमैन ऑफ द जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी है कि घटते गोला-बारूद के भंडार से भविष्य के अभियानों पर उल्टा असर पड़ सकता है।
