John Bolton : भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने घर में बुरी तरह घिर गए हैं। अमेरिका के पूर्व अधिकारी और विशेषज्ञ भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के उनके फैसले की आलोचना कर रहे हैं। ट्रंप की मुखर आलोचना करने वालों में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन भी शामिल हैं। टैरिफ को लेकर ट्रंप की कई बार आलोचना कर चुके इस पूर्व अधिकारी ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति को निशाने पर लिया है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं बोल्टन। तस्वीर-AP
'निजी केमेस्ट्री अब बीते दिनों की बात'
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बोल्टन ने कहा है कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रपति ट्रंप के बहुत अच्छे रिश्ते थे लेकिन यह 'निजी केमेस्ट्री अब बीते दिनों की बात हो गई है।' पूर्व एनएसए ने आगाह करते हुए कहा कि 'अमेरिका नेताओं के साथ करीबी रिश्ते वैश्विक नेताओं को 'बुरे हालात' से बचा नहीं सकते।'
अपने पूर्व बॉस के कड़े आलोचक हैं बोल्टन
उन्होंने हाल ही में ब्रिटिश मीडिया पोर्टल एलबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'मेरा मानना है कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नेताओं के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्तों के नजरिये से देखते हैं। तो अगर उनके व्लादिमीर पुतिन से अच्छे संबंध हैं, तो इसका मतलब है कि अमेरिका के रूस से अच्छे संबंध हैं। जबकि असलियत में ऐसा नहीं है।' बोल्टन, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन में पहले कार्यकाल के दौरान एनएसए के रूप में सेवा दी थी, अपने पूर्व बॉस के कड़े आलोचक रहे हैं।
ब्रिटेन की यात्रा पर जाने वाले हैं ट्रंप
उन्होंने कहा, 'ट्रंप के प्रधानमंत्री मोदी से व्यक्तिगत स्तर पर बहुत अच्छे संबंध थे। मुझे लगता है कि अब वे खत्म हो गए हैं, और यह सबके लिए एक सबक है, उदाहरण के तौर पर (ब्रिटेन के प्रधानमंत्री) कीयर स्टार्मर के लिए भी कि एक अच्छा व्यक्तिगत रिश्ता कभी-कभी मदद कर सकता है, लेकिन यह आपको सबसे बुरे हालात से नहीं बचा सकता।' ट्रंप 17 से 19 सितंबर तक ब्रिटेन की यात्रा पर जाने वाले हैं।
दशकों की अमेरिकी नीति को पहुंचाया नुकसान-बोल्टन
एलबीसी के साथ अपने इंटरव्यू के साथ सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में बोल्टन ने कहा कि व्हाइट हाउस ने 'अमेरिका-भारत संबंधों को दशकों पीछे धकेल दिया है, जिससे मोदी रूस और चीन के और करीब आ गए हैं। बीजिंग ने खुद को अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के विकल्प के रूप में पेश किया है।' पूर्व एनएसए ने कहा कि पिछले कई महीनों में ट्रंप द्वारा भारत के साथ किए गए बर्ताव ने वर्षों से चली आ रही द्विदलीय अमेरिकी कोशिशों को कमजोर कर दिया है, जिनका उद्देश्य नई दिल्ली को रूस के शीत युद्ध कालीन गठबंधन से दूर करना और भारतीय नीति-निर्माताओं को यह समझाना था कि चीन उनकी मुख्य सुरक्षा चुनौती है।
भारत को चीन के करीब लाए ट्रंप
उन्होंने कहा, 'यह सब उलट गया है। मुझे लगता है कि इसे दोबारा ठीक किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल यह बहुत खराब स्थिति है।' बोल्टन पहले भी कह चुके हैं कि भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ ने शायद नई दिल्ली को बीजिंग-मॉस्को धुरी के और करीब ला दिया, जिसे उन्होंने 'अनचाही गलती' करार दिया था।
