Trump Approval Ratings: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को आगे बढ़ाने के अपने फैसले का कड़ा बचाव करते हुए कहा है कि चाहे यह कदम राजनीतिक रूप से लोकप्रिय हो या न हो, वे अपनी निगरानी में दुनिया को परमाणु हथियारों से तबाह होने नहीं दे सकते।
ट्रंप ने कहा कि मैं किसी हालत में ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दूंगा। AI IMAGE
व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब अमेरिकी जनता को यह समझ आएगा कि यह पूरा मामला लॉस एंजिल्स जैसे बड़े शहरों को परमाणु हमले के खतरे से बचाने और ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने से जुड़ा है, तो यह फैसला अपने आप लोकप्रिय हो जाएगा।
ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 36 प्रतिशत पर आ गई
गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से सीएनएन के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 36 प्रतिशत पर आ गई है, लेकिन राष्ट्रपति ने साफ किया है कि वे रेटिंग की परवाह किए बिना वैश्विक सुरक्षा के लिए यह कड़ा रुख जारी रखेंगे।
इससे पहले सोमवार को ट्रम्प ने यह बड़ा खुलासा भी किया था कि सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे मित्र देशों के अनुरोध पर उन्होंने ईरान पर होने वाले एक बड़े सुनियोजित हमले को कुछ समय के लिए टाल दिया है, क्योंकि ये खाड़ी देश दोनों पक्षों के बीच किसी शांतिपूर्ण समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं। ट्रम्प के अनुसार, यदि ईरान पर भीषण बमबारी किए बिना बातचीत के जरिए इस मसले का समाधान निकलता है तो उन्हें सबसे ज्यादा खुशी होगी, हालांकि वे स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए हैं।
ईरान के साथ बड़े डील की संभावना
इससे पहले ट्रंप ने सोमवार (18 मई) को बड़ा ऐलान करते हुए ईरान पर मंगलवार (19 मई) को होने वाले संभावित हमले को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के शीर्ष नेताओं की अपील के बाद लिया गया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि खाड़ी देशों के नेताओं ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि ईरान के साथ एक 'बड़ी डील' होने की संभावना है।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि उन्हें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद और कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी ने मैसेज भेजा था और अपील की थी कि 'इस समय ईरान के साथ बेहद गंभीर बातचीत चल रही है, इसलिए मिलिट्री एक्शन को रोक दिया जाए। इन नेताओं का मानना है कि बातचीत के जरिए एक ऐसा समझौता हो सकता है जो अमेरिका और पूरे मिडिल ईस्ट के लिए मंजूर होगा। '
