आसमान में 174 जिंदगियों पर खतरा मंडरा रहा था। कॉकपिट में पायलट पर हमला हो चुका था और विमान तेजी से नीचे जा रहा था। ऐसे वक्त में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने जिस हिम्मत और सूझबूझ का परिचय दिया, उसकी गूंज अब अमेरिका की संसद तक पहुंच गई है।
अमेरिकी संसद ने स्मित मच्छार को सम्मान के लिए लाया प्रस्ताव।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय पायलट स्मित मच्छार और फ्लाईदुबई फ्लाइट 1073 के चालक दल और यात्रियों के साहस को सम्मानित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया गया है। प्रस्ताव में विमान पर हुए हमले को आतंकवादी कृत्य बताते हुए इसकी निंदा की गई है।
अमेरिकी संसद में सम्मान का प्रस्ताव
5 अक्टूबर को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में यह प्रस्ताव सांसद जोश गॉटहाइमर ने पेश किया। प्रस्ताव को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के पास भेजा गया है। इसमें कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा गया है कि उन्होंने विमान में सवार लोगों की जान बचाने के लिए असाधारण साहस दिखाया। प्रस्ताव में सिर्फ भारतीय पायलट ही नहीं, बल्कि ऑफ-ड्यूटी पायलटों, केबिन क्रू और यात्रियों के साहस की भी तारीफ की गई है। साथ ही अमेरिका ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से इस घटना की पूरी और जल्द जांच करने की अपील की है।
30 सितंबर को फ्लाइट में आखिर हुआ क्या था?
30 सितंबर को फ्लाईदुबई (Flydubai) की फ्लाइट FZ1073 ने दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी। विमान में करीब 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान विमान के ओमानी फर्स्ट ऑफिसर ने कथित तौर पर कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया। जांच से जुड़े विवरण के मुताबिक, उसने क्रैश एक्स से पायलट पर हमला किया और विमान का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की। इस दौरान विमान अचानक हजारों फीट नीचे चला गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि विमान में सवार लोगों की जान पर खतरा मंडराने लगा।
घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोला
हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित मच्छार ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों और ऑफ-ड्यूटी पायलटों को अंदर आने का मौका मिला। लोगों ने कथित हमलावर को काबू किया और रिजर्व पायलटों ने विमान को संभालने में मदद की। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबूक में आपात स्थिति में सुरक्षित उतारा गया। इस पूरी घटना में पायलट के साथ यात्रियों और क्रू की भूमिका भी अहम रही।
14 हजार फीट से ज्यादा नीचे आया था विमान
इस घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विमान कुछ ही समय में करीब 14 हजार फीट नीचे आ गया था। कैप्टन मच्छार ने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो कॉल पर बातचीत में बताया था कि वह बुरी तरह घायल हो चुके थे, लेकिन उन्हें पता था कि अगर उन्होंने कुछ नहीं किया तो विमान में सवार बाकी लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। यही वह क्षण था जब उन्होंने आखिरी ताकत लगाकर कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया।
यूएई ने भी बताया था आतंकवादी कृत्य
घटना की जांच संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व में चल रही है। UAE के अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि शुरुआती जांच में फर्स्ट ऑफिसर की कार्रवाई को आतंकवादी कृत्य के तौर पर देखा गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के प्रस्ताव में भी इस घटना को अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन की सुरक्षा पर हमला बताते हुए इसकी निंदा की गई है। हालांकि, हमले की पूरी पृष्ठभूमि और मकसद को लेकर जांच जारी है।
पीएम मोदी से बातचीत में सुनाई थी पूरी कहानी
अस्पताल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करते हुए स्मित मच्छार ने उस खौफनाक पल को याद किया था। उन्होंने बताया था कि वह जमीन पर गिर चुके थे और बुरी तरह घायल थे। लेकिन उन्हें महसूस हो रहा था कि विमान नीचे जा रहा है। इसके बाद उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। पीएम मोदी ने उनकी बहादुरी की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने कुछ ही सेकंड में कई महत्वपूर्ण फैसले लेकर लोगों की जान बचाई।
इजरायल से भी मिली तारीफ
स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रही। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनसे फोन पर बात की और उन्हें हीरो बताया था।
नेतन्याहू ने उन्हें इजरायल के स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) समारोह में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया था। अमेरिका के उप विदेश मंत्री अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति ने भी मच्छार और विमान में मौजूद यात्रियों की बहादुरी की सार्वजनिक रूप से तारीफ की थी।
