Russia-Ukraine Talks:रूस और यूक्रेन के बीच पिछले तीन साल से युद्ध चल रहा है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बदौलत दोनों देश एक साथ एक टेबल पर आए। बता दें कि दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ने पहली बार प्रत्यक्ष शांति वार्ता के लिए मुलाकात की। यह मुलाकात तुर्किए के इस्तांबुल शहर में हुई।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (बाएं) और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (दाएं)
तुर्किए के विदेश मंत्रालय और यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहली बार इस्तांबुल में हो रही शांति वार्ता शुक्रवार को दो घंटे से भी कम समय में समाप्त हो गई। यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रूस पर यहां जारी शांति वार्ता के दौरान 'अस्वीकार्य मांगें' रखने का आरोप लगाया, जिन पर पहले चर्चा नहीं की गई थी।
अधिकारी ने कहा कि इन मांगों में यूक्रेन की सेनाओं को उसके नियंत्रण वाले बड़े क्षेत्र से वापस जाने के लिए कहना भी शामिल है, ताकि पूर्ण संघर्षविराम लागू किया जा सके। नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसा लग रहा था मानो रूसी प्रतिनिधिमंडल 'जानबूझकर अस्वीकार्य मांगें सामने रखना चाहता है ताकि आज की बैठक बेनतीजा रहे।' उन्होंने कहा कि यूक्रेनी पक्ष ने दोहराया कि उसका नजरिया वास्तविक प्रगति हासिल करने पर केंद्रित है, जिसमें तत्काल संघर्षविराम और ठोस कूटनीति का मार्ग तलाशना शामिल है, 'जैसा कि अमेरिका, यूरोपीय साझेदारों और अन्य देशों ने प्रस्तावित किया है।'
रूस-यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल की पहली प्रत्यक्ष शांति वार्ता
शांति वार्ता समाप्त
रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडलों ने युद्ध के तीन वर्षों में पहली बार प्रत्यक्ष शांति वार्ता के लिए इस्तांबुल में मुलाकात की। तुर्किए के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान में कहा कि बैठक समाप्त हो गई है। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हेओरही टाइखई के अनुसार रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव के नेतृत्व में यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी व्लादिमीर मेडिंस्की के नेतृत्व में रूस के एक दल के साथ बैठक की। उन्होंने बैठक की एक तस्वीर भी जारी की।
रूस और यूक्रेन के अधिकारी यू-आकार की एक मेज के चारों ओर आमने-सामने बैठे। तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान ने बैठक की शुरुआत में सभी पक्षों से इस अवसर का लाभ उठाने का आग्रह किया और कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि संघर्षविराम यथाशीघ्र हो। अधिकारियों और पर्यवेक्षकों का मानना है कि तुर्किए की मध्यस्थता वाली वार्ता के माध्यम से तीन साल से अधिक समय से चल रहे युद्ध को रोकने में तत्काल कोई प्रगति नहीं होगी।
