ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय ने सोमवार को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। यह हाई-प्रोफाइल राजकीय यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब ईरान युद्ध को लेकर वाशिंगटन और लंदन के बीच कूटनीतिक दरार गहरी होती जा रही है। साथ ही, ट्रंप पर हुए एक ताजा हमले के प्रयास ने इस यात्रा की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
व्हाइट हाउस में ट्रंप और किंग चार्ल्स की मुलाकात (AP)
व्हाइट हाउस में शाही स्वागत
चार्ल्स और क्वीन कैमिला का व्हाइट हाउस के 'साउथ पोर्टिको' में राष्ट्रपति ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने गर्मजोशी से स्वागत किया। ट्रंप और चार्ल्स को धूप में हाथ मिलाते और कुछ अनसुनी निजी बातचीत करते देखा गया।
ईरान युद्ध से "स्पेशल रिलेशनशिप" में दरार
भले ही कैमरों के सामने सब कुछ सामान्य दिख रहा हो, लेकिन पर्दे के पीछे 'विशेष संबंधों' में कड़वाहट है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ न देने पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कड़ी आलोचना की है। ट्रंप ने स्टार्मर को 'नो चर्चिल' करार देते हुए उनके युद्ध विरोध, इमीग्रेशन और ऊर्जा नीतियों पर निशाना साधा है।
कड़ी सुरक्षा के साये में यात्रा
शनिवार को व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट डिनर के दौरान ट्रंप पर हुए गोलीबारी के प्रयास के बाद सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दी गई है। संदिग्ध हमलावर को सोमवार को ही अदालत में पेश किया गया। महाराजा चार्ल्स (77) के लिए यह यात्रा एक व्यक्तिगत परीक्षा भी है, क्योंकि वह पिछले कुछ वर्षों से कैंसर से जूझ रहे हैं।
ऐतिहासिक संबोधन और अगला पड़ाव
मंगलवार को महाराजा चार्ल्स अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करेंगे। वह 1991 में अपनी मां महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के बाद ऐसा करने वाले पहले ब्रिटिश शासक होंगे। बुधवार को शाही जोड़ा 9/11 मेमोरियल जाएगा और गुरुवार को बरमूडा के लिए रवाना होगा। माना जा रहा है कि चार्ल्स अपनी कूटनीतिक कुशलता से ईरान युद्ध के मुद्दे को अपने संबोधन में सं कूटनीतिक तरीके से संबोधित कर सकते हैं।
