Times Now Navbharat
live-tv
Premium

मिडटर्म में हार के बाद ट्रंप से क्यों दूरी बना रहे हैं उप राष्ट्रपति जेडी वेंस? क्या रखना चाहते हैं अपना दामन पाक-साफ

अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयानों ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। जानिए कैसे वेंस ईरान युद्ध को हार की वजह बताकर ट्रंप से अपनी अलग राह बना रहे हैं।

Image
Photo : AP
ट्रंप के साये से बाहर निकलने की कोशिश में जेडी वेंस
Authored by: निशांत तिवारी
Updated Nov 6, 2026, 15:44 IST
Follow on Google News

वाशिंगटन की सियासत में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। अमेरिका के मिडटर्म चुनावों के नतीजे जब सामने आए, तो रिपब्लिकन पार्टी के पैरों तले जमीन खिसक गई। दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की बंपर जीत यानी 'ब्लू सुनामी' ने व्हाइट हाउस के गलियारों में सन्नाटा खींच दिया है। इस करारी शिकस्त के बाद रिपब्लिकन खेमे में हार की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन सबसे बड़ा झटका खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके अपने ही डिप्टी यानी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मिला है। चुनाव के तुरंत बाद वेंस ने सोशल मीडिया पर जिस बेबाकी से हार का ठीकरा ट्रंप प्रशासन की नीतियों, विशेषकर ईरान युद्ध पर फोड़ा है, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वेंस ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की बिसात अभी से बिछानी शुरू कर दी है और वे ट्रंप की विफलता के दाग अपने ऊपर नहीं लगने देना चाहते?

ईरान युद्ध बना हार की मुख्य वजह: वेंस का तीखा हमला

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने लंबे बयान में जेडी वेंस ने बिना लाग-लपेट के स्वीकार किया कि अमेरिकी मतदाताओं ने रिपब्लिकन पार्टी से किनारा क्यों कर लिया। उन्होंने साफ शब्दों में लिखा कि पार्टी की हार का मुख्य कारण वह सैन्य संघर्ष है, जिसे लेकर जनता में भारी रोष था। वेंस यहीं नहीं रुके। उन्होंने उन नेताओं को भी आड़े हाथों लिया जो इस जंग को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। उनका सीधा संकेत था कि ईरान के खिलाफ छेड़ी गई इस लड़ाई ने सीनेट में पार्टी का बहुमत गंवा दिया। अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में यह बेहद दुर्लभ नजारा है, जहां किसी मौजूदा उपराष्ट्रपति ने सीधे तौर पर विदेश नीति के सबसे बड़े फैसले पर राष्ट्रपति से सार्वजनिक असहमति जताई हो।

एक रैली के दौरान वेंस

एक रैली के दौरान वेंस

महंगाई, युद्ध और भटका हुआ 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडा

मिडटर्म नतीजों के आंकड़े डराने वाले हैं। सीनेट से लेकर प्रतिनिधि सभा और गवर्नर चुनावों तक डेमोक्रेट्स ने भारी बहुमत हासिल किया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस भारी विरोध के पीछे कई ठोस कारण थे:

ईरान युद्ध और अलोकप्रिय विदेश नीति: अमेरिकी वोटर एक और अंतहीन विदेशी दलदल में नहीं फंसना चाहते थे। इस सैन्य संघर्ष ने देश के भीतर गहरी बेचैनी पैदा कर दी थी।

महंगाई और आसमान छूती कीमतें: युद्ध और वैश्विक टैरिफ नीतियों के कारण गैस और जीवनयापन का खर्च आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गया था।

'अमेरिका फर्स्ट' की मूल भावना से भटकाव: पार्टी के पारंपरिक वर्किंग-क्लास वोटर नाराज थे क्योंकि प्रशासन का ध्यान स्थानीय नागरिकों की समस्याओं के बजाय बड़े भू-राजनीतिक झगड़ों में उलझ गया था।

2028 का राष्ट्रपति चुनाव और वेंस की 'सेफ गेम'

राजनीतिक गलियारों में चर्चा आम है कि वेंस का यह कदम महज एक चुनावी समीक्षा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है। वेंस अच्छी तरह जानते हैं कि जनता का मूड क्या है। चूंकि ईरान युद्ध और आर्थिक नीतियों के फैसले सीधे तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप से जुड़े थे, इसलिए वेंस इन फैसलों से खुद को अलग कर यह संदेश देना चाहते हैं कि वे जमीनी हकीकत से वाकिफ हैं। साल 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से दावेदारी पेश करने की अटकलों के बीच, वेंस अपनी एक स्वतंत्र और जन-हितैषी राजनेता की छवि गढ़ रहे हैं। वे अपना दामन पाक-साफ रखकर मतदाताओं को यह जताना चाहते हैं कि पार्टी की गलतियों के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं।

मिडटर्म इलेक्शन में हारे ट्रंप

मिडटर्म इलेक्शन में हारे ट्रंप

क्या ट्रंप बर्दाश्त करेंगे बगावत के सुर?

यह देखना दिलचस्प होगा कि डोनाल्ड ट्रंप अपने सबसे करीबी सहयोगी के इस रुख पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। ट्रंप अपनी टीम से पूर्ण वफादारी की उम्मीद रखते हैं, हालांकि उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि मिडटर्म नतीजों पर युद्ध का असर पड़ा है। फिलहाल, इन बयानों ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति में बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। क्या वेंस की यह बगावत उन्हें 2028 की रेस में आगे ले जाएगी या पार्टी के भीतर आंतरिक कलह को और बढ़ाएगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

End of Article