US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर का ऐलान हो चुका है और अब दुनियाभर की निगाहें पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता पर टिकी हुई हैं। इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को उम्मीद है कि ईरान के साथ वार्ता सकारात्मक रहेगी। हालांकि, वार्ता को सफल बनाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन?
ईरान के साथ शांति वार्ता की टेबल पर अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, पश्चिम एशिया के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर शामिल हो रहे हैं। तीनों ही 'एयर फ़ोर्स टू' में सवार होकर पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुके हैं, जो राष्ट्रपति ट्रंप से प्राप्त निर्देश के आधार पर बातचीत करेंगे। ट्रंप ने तीनों नेताओं को साफ-साफ समझा दिया है कि बातचीत कैसी होनी चाहिए। हालांकि, वेंस ने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी।
ईरान संग शांति वार्ता जेडी वेंस के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 1979 के बाद दोनों देशों के बीच यह उच्चस्तरीय बैठक हो रही है। अब तक वेंस की भूमिका मुख्य रूप से घरेलू राजनीति तक सीमित रही है, लेकिन अब उन्हें एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। युद्ध से पहले वेंस मिडटर्म चुनावों के लिए प्रचार की तैयारी कर रहे थे और महंगाई जैसे मुद्दों पर डेमोक्रेट्स को घेरना उनकी रणनीति का हिस्सा था, लेकिन मौजूदा हालात ने उनका पूरा फोकस बदल दिया है।
तेल कीमतों में बढ़ोतरी
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से संघर्ष शुरू होने के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान ने अपना नियंत्रण स्थापित कर रखा है। जिसकी वजह से जहाजों की आवाजाही सुचारू ढंग से नहीं हो पा रही है। जिसकी वजह से तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे स्थिति और भयावह हो गई है।
JD Vance
ट्रंप ने वेंस पर लगाया दांव
41 वर्षीय वेंस अब तक बड़े विदेशी मिशनों से दूर ही रहे। फरवरी में जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका से ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने का प्रस्ताव रखा था, उस वक्त वेंस अजरबैजान में थे। हाल ही वेंस हंगरी की यात्रा पर थे, जहां पर वह आगामी चुनावों से पहले प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन का समर्थन कर रहे थे, जबकि वाशिंगटन में ट्रंप ईरान को लेकर सख्त टिप्पणी कर रहे थे।
वेंस को ही क्यों चुना गया?
अब जेडी वेंस को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह ईरान को मनाएं कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखे। इसी बीच इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष भी जारी है, जो स्थिति को और जटिल बना रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, पाकिस्तान के अधिकारियों को वेंस का युद्ध के खिलाफ रुख पसंद आया था, इसलिए उन्होंने उनका नाम सुझाया। इसके बाद ट्रंप ने उन्हें शांति वार्ता की जिम्मेदारी सौंपी। वेंस के करीबी उन्हें 'स्विस आर्मी नाइफ' की तरफ बताते हैं। जिसका मतलब है कि जहां जरूरत हो, वहां काम भूमिका निभाने के लिए तैयार रहते हैं।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे मिशन
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार फिलिप एच. गॉर्डन के मुताबिक, ''उपराष्ट्रपति ही ऐसा पद है, जो राष्ट्रपति की तरह सभी पहलुओं को एक साथ जोड़ सकता है।'' इससे पहले 2021 में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को फ्रांस भेजा गया था ताकि एमैनुएल मैक्रों के साथ संबंध सुधारे जा सकें, जबकि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान, 2019 में माइक पेंस तुर्किए जाकर संघर्षविराम की कोशिश कर चुके हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि यह भूमिका वेंस के राजनीतिक करियर को या तो बुलंदी तक पहुंचा सकती है या फिर जटिल बना सकती है, क्योंकि अब उनका इससे सीधा जुड़ाव हो गया है। इसलिए इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता वेंस के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा मानी जा रही है।
