TIMES NOW Navbharat EXPLAINER: अमेरिका और इजरायल अपनी साझेदारी को बहुत मजबूत बताते हैं। उनके बीच दुनिया के सबसे करीबी सुरक्षा संबंधों में से एक है। इसलिए, हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन ने काफी ध्यान खींचा है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इजरायली खुफिया एजेंसियां ईरान के साथ बातचीत में शामिल वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के बारे में संवेदनशील जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही हैं।
हालात इतने बिगड़ गए...इजरायल करने लगा अमेरिका की जासूसी? जानना चाहता है ईरान से क्या हो रही डील
यह खबर सबसे पहले NBC न्यूज ने प्रकाशित की। ये जानकारी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रहा है, जबकि इजरायल संघर्ष को खत्म करने के उद्देश्य से की जा रही बातचीत का विरोध कर रहा है।
क्या इजरायल, ट्रंप के ईरान वार्ताकारों की जासूसी कर रहा है?
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में चिंता जताई गई है कि इजरायली खुफिया एजेंसियां तेहरान के साथ शांति समझौते पर काम कर रहे अमेरिकी वार्ताकारों की बातचीत सुन रही हैं। इस जासूसी का मकसद ईरान के साथ बातचीत में अमेरिका के रुख को समझना है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें मुख्य रूप से अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जिनमें राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान मामलों के प्रमुख वार्ताकार स्टीव विटकॉफ, पेंटागन के शीर्ष नीति अधिकारी एलब्रिज ए. कोल्बी और उनके मुख्य सहयोगियों में से एक माइकल पी. डिमिनो IV शामिल हैं।
कुछ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों को पता है कि इजरायल और अमेरिका एक-दूसरे के बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा करते हैं। हालांकि, तेहरान के साथ बातचीत में वॉशिंगटन का रुख जानने की इजरायल की इन कथित कोशिशों ने सीमा पार कर ली है।
ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच, अमेरिकी सेना अपने इजरायली समकक्षों के साथ बड़ी मात्रा में ऑपरेशनल जानकारी साझा कर रही है। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इजरायल की दिलचस्पी इससे कहीं ज्यादा है और वह ईरान के साथ बातचीत को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नजरिए के बारे में जानकारी हासिल करना चाहता है।
खबरों के मुताबिक, खुफिया जानकारी के एक आकलन में इजरायल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस (प्रति-खुफिया) जोखिम के बढ़ने की बात कही गई है और खतरे के स्तर को हाई से बढ़ाकर गंभीर कर दिया गया है।
डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) और सिक्योरिटी एजेंसी की संयुक्त रिपोर्ट में उन कई घटनाओं का जिक्र है जिनमें इजरायल पर अमेरिकी सैन्य कर्मियों और सरकारी अधिकारियों की जासूसी करने की कोशिश का आरोप है।
NYT की रिपोर्ट के अनुसार, डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की यह रिपोर्ट तब तैयार की गई थी जब इजरायल में तैनात एक अमेरिकी रक्षा कर्मी ने पाया कि उनके फोन में ऐसा सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया गया था जो कथित तौर पर उनकी बातचीत को टैप करने में सक्षम था।
इजरायली और अमेरिकी सरकारों की प्रतिक्रिया
इजरायल ने अमेरिकी सरकारी अधिकारियों या अमेरिकी संस्थानों की जासूसी करने के आरोपों का पुरजोर खंडन किया है। NBC की रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन में इजराली दूतावास ने इसे पूरी तरह से गलत बताया।
न्यूज आउटलेट ने प्रवक्ता के हवाले से कहा, 'इजरायल अमेरिकी संस्थाओं और अमेरिकी सरकारी अधिकारियों की तो बात ही छोड़ दें, वह इनके बारे में खुफिया जानकारी इकट्ठा नहीं करता है।'
NBC का हवाला देते हुए अल जजीरा ने बताया कि व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इन रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा, 'पूरी कहानी झूठी है और यह ऐसे व्यक्ति से आई है जिसे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि क्या हो रहा है।'
इजरायल रहा है पहले भी जासूसी का आरोपी
काउंटर-इंटेलिजेंस चेतावनी पर अमेरिकी अधिकारियों का क्या कहना है?
नाम न बताने की शर्त पर बात करने वाले कई मौजूदा और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने काउंटर-इंटेलिजेंस चेतावनी को कुछ मामलों में कोई हैरानी की बात नहीं बताया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उनके मुताबिक इजरायल लंबे समय से अपने दुश्मनों और सहयोगियों, दोनों के खिलाफ बड़े पैमाने पर खुफिया जानकारी जुटाने के ऑपरेशन चलाता रहा है।
फिर भी, अधिकारियों का कहना है कि इजरायल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस (जासूसी-रोधी) खतरे का स्तर अब किसी भी दूसरे सहयोगी देश से ज्यादा है और कुछ दुश्मन देशों से भी ज्यादा है, जिससे इजरायल की जासूसी गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एक सीनियर अधिकारी ने 'ट्रंप 2.0' के दौरान सीनियर अमेरिकी अधिकारियों पर इजरायल की आक्रामक तरीके से खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिशों को बेकाबू बताया।
अमेरिका के दो बड़े सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी कर्मचारी, खासकर वे जो इजरायल में या इजरायली समकक्षों के साथ काम कर रहे थे, इस नई रिपोर्ट से पहले ही काउंटर-इंटेलिजेंस से जुड़े खतरों के बारे में जानते थे।
क्या इजरायल ने पहले भी अमेरिका की जासूसी की है?
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल अपने सहयोगी अमेरिका के खिलाफ जासूसी के मामलों में शामिल रहा है। हालांकि, उनकी करीबी साझेदारी की वजह से ऐसे मामलों पर कम ही चर्चा हुई है।
एक मशहूर मामला जोनाथन पोलार्ड का है, जो अमेरिकी नौसेना के लिए एक सिविलियन इंटेलिजेंस एनालिस्ट थे और उन्होंने इजरायल के लिए जासूसी की थी। इजरायल को बड़ी मात्रा में गोपनीय जानकारी देने के बाद 1985 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
बाद में उन्होंने जासूसी के आरोपों को स्वीकार कर लिया, 30 साल जेल की सजा काटी और 2015 में उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया। अमेरिका-इजरायल संबंधों के इतिहास में, पोलार्ड का मामला जासूसी से जुड़े सबसे अहम घोटालों में से एक माना जाता है।
किंग्स कॉलेज लंदन के सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर एंड्रियास क्रेग ने अल जजीरा को बताया, 'अमेरिका के अंदर इंटेलिजेंस ऑपरेशन चलाने का इजराल का एक लंबा इतिहास रहा है।'
उन्होंने कहा, 'कई दशकों से, इजरायल ने अमेरिकी रणनीतिक सोच और फैसले लेने की प्रक्रिया को समझने के लिए, औपचारिक और अनौपचारिक नेटवर्क (जिसमें इंटेलिजेंस और लॉबिंग चैनल भी शामिल हैं) के जरिए अमेरिकी नीति-निर्माण के दायरे में पैठ बनाने की कोशिश की है।'
यह रिपोर्ट आग में घी का काम कर सकती है, क्योंकि पिछले हफ्ते ट्रंप और नेतन्याहू के बीच तनाव खुलकर सामने आया है। खबरों के मुताबिक, लेबनान में इजरायल की आक्रामक कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजरायली प्रधानमंत्री को 'f crazy' कहा था। हालांकि, जासूसी के इस दावे पर न तो ट्रंप और न ही नेतन्याहू ने कोई प्रतिक्रिया दी है।
