Iran-US Talk Fails: ईरान के सरकारी टीवी ने रविवार को बताया कि अमेरिका से बातचीत विफल होने के बाद प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी से रवाना हो गया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत दो-तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर हमारे विचारों में मतभेद के कारण विफल रही। ईरान के साथ युद्ध फरवरी के अंत में शुरू हुआ था और 21 घंटे की लंबी बातचीत के बाद यह समाप्त हो गई। अमेरिका और ईरान ने बातचीत के लिए 8 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई थी। एक तरह से इसके साथ ही पाकिस्तान के मंसूबों पर भी पानी फिर गया है। पाकिस्तान की कोशिश थी की युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करवाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वाहवाही लूटी जाए, लेकिन उसकी रणनीति सिरे न चढ़ सकीं।
नाकाम हुई यूएस-ईरान वार्ता
अमेरिका की ‘अत्यधिक मांगों' के कारण वार्ता नाकाम : ईरान
ईरान के एक शीर्ष अधिकारी ने रविवार को कहा कि अमेरिका की ओर से अत्यधिक मांगों के कारण ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में हुई वार्ता रविवार को किसी समझौते के बिना समाप्त हो गई। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने हालांकि जोर देते हुए कहा कि कूटनीति कभी समाप्त नहीं होती। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने कहा कि वार्ता शांति समझौते तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने इसका एक प्रमुख कारण यह बताया कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ।
वेंस ने कहा कि अमेरिकी पक्ष ने अपना अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव ईरान को दिया था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। वहीं, बकाई ने कहा कि कुछ मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी, लेकिन दो-तीन महत्वपूर्ण मामलों पर मतभेद बने रहे। सरकारी प्रेस टीवी ने बकाई के हवाले से कहा, अंततः वार्ता किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह पाकिस्तान की मध्यस्थता में शुरू हुई गहन वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई संदेश और दस्तावेजों का आदान-प्रदान हुआ। बकाई ने पहले एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, पिछले 24 घंटों में वार्ता के मुख्य विषयों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दा, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंधों को हटाना और ईरान तथा क्षेत्र के खिलाफ युद्ध का पूर्ण अंत शामिल था।
उन्होंने कहा, इस कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता विरोधी पक्ष की गंभीरता और सद्भावना पर निर्भर करती है, जिसमें अत्यधिक मांगों और अवैध आग्रहों से परहेज तथा ईरान के वैध अधिकारों और हितों को स्वीकार करना शामिल है। बकाई ने कहा कि ये वार्ताएं थोपे गए युद्ध के 40 दिन बाद और अविश्वास एवं संदेह के माहौल में हुईं। ईरान की अर्ध सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने बकाई के हवाले से कहा, यह स्वाभाविक है कि हम शुरुआत से ही एक बैठक में समझौते की उम्मीद न करें। किसी ने भी ऐसी उम्मीद नहीं की थी। उन्होंने कहा, हम अमेरिका द्वारा वादाखिलाफी और दुर्भावनापूर्ण कार्यों के अनुभवों को भूले नहीं हैं और न ही भूलेंगे।
पाकिस्तान का जताया शुक्रिया
उन्होंने वार्ता की मेजबानी और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान का धन्यवाद किया। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि उनके देश ने पिछले 24 घंटों में गहन और रचनात्मक वार्ताओं के कई दौर कराने में मदद की। डार ने उम्मीद जतायी कि दोनों पक्ष स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक रुख बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आने वाले दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
मोहम्मद बगेर गालिबफ के नेतृत्व में हुई बातचीत
ईरानी प्रतिनिधिमंडल संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ के नेतृत्व में शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचा, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शनिवार सुबह पहुंचा, जिसका नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे डी वेंस कर रहे थे। ईरान और अमेरिका के बीच इस स्तर पर 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह पहली उच्च स्तरीय वार्ता थी। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद शुरू हुआ, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ और व्यापार बाधित हुआ। ईरान ने वार्ता के लिए 10 सूत्री योजना पेश की थी, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण शामिल था। दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने की बातचीत के बावजूद समझौता न हो पाने से दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम की प्रभावशीलता और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावना पर सवाल खड़े हो गए हैं।
