पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ अपने कूटनीतिक और द्विपक्षीय संबंधों को एक बार फिर पटरी पर लाने के लिए भारत सरकार ने एक बेहद असाधारण और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने बांग्लादेश में भारत के नवनियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को 'केंद्रीय कैबिनेट मंत्री' के समकक्ष का दर्जा प्रदान किया है।
भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए फिर शुरू किया ट्रैवल वीजा (फाइल फोटो | PTI)
केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, 76 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को 'टेबल ऑफ प्रिसिडेंस' में यह विशेष दर्जा व्यक्तिगत तौर पर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि इसके लिए मूल वरीयता क्रम की तालिका में कोई संशोधन नहीं किया गया है और प्रोटोकॉल का यह पद केवल औपचारिक व राजनयिक समारोहों के लिए मान्य होगा।
28 जून से शुरू होगा ट्रैवल वीजा
इस विशेष दर्जे के साथ ही दिनेश त्रिवेदी ने गुरुवार को ढाका स्थित आधिकारिक आवास में बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को अपना परिचय पत्र सौंपा और औपचारिक रूप से अपने राजनयिक मिशन की शुरुआत की। इस गरिमामयी समारोह के ठीक बाद, त्रिवेदी ने ढाका में भारतीय वीजा केंद्र का दौरा किया, जो उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। वहां उन्होंने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी का ऐलान करते हुए कहा मुझे यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि हम बांग्लादेशी नागरिकों के लिए 'सामान्य यात्रा वीजा' की सेवाओं को फिर से बहाल कर रहे हैं। आने वाले 28 जून से इस वीजा के लिए आवेदन जमा किए जा सकेंगे।
क्यों बंद था वीजा और क्या हैं इस फैसले के सियासी मायने?
भारत और बांग्लादेश के बीच यह यात्रा वीजा सेवाएं पिछले करीब दो साल से पूरी तरह ठप थीं। अगस्त 2024 में बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने और तख्तापलट के बाद वहां की कमान नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने संभाली थी। उस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के बेहद बिगड़ने और नई दिल्ली के साथ कूटनीतिक तल्खी के कारण भारत ने सुरक्षा कारणों से वीजा सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी थी। अब एक पेशेवर IFS अधिकारी के बजाय एक कद्दावर और अनुभवी राजनेता को ढाका भेजने का नई दिल्ली का यह फैसला बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। दिनेश त्रिवेदी ने 1994 बैच के IFS अधिकारी प्रणय कुमार वर्मा का स्थान लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना सरकार के पतन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में जो अभूतपूर्व ठंडापन आ गया था, उसे दूर करने के लिए भारत सरकार ने दिनेश त्रिवेदी के राजनीतिक रसूख और अनुभव पर दांव खेला है। उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देना यह दिखाता है कि भारत अपने इस पड़ोसी देश को कितनी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।
