Gaza Food Crisis: जब किसी इलाके में 'अकाल' घोषित किया जाता है, तो पूरी दुनिया की निगाहें उस त्रासदी पर टिक जाती हैं। पिछले साल अगस्त में जब संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों के प्रमुख वैज्ञानिक निकाय इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन (IPC) ने गाजा के कुछ हिस्सों में अकाल का ऐलान किया था, तब वह मध्य पूर्व के इतिहास में अपनी तरह की पहली आधिकारिक घोषणा थी।अब एक साल बीतने के बाद IPC ने गाजा की खाद्य सुरक्षा पर अपनी नवीनतम आकलन रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में कुछ सकारात्मक बदलावों के संकेत जरूर दिए गए हैं, लेकिन साथ ही एक गंभीर चेतावनी भी दी गई है, और वो ये है कि गाजा में भुखमरी की तीव्रता भले ही कम हुई हो, लेकिन संकट का खतरा टला नहीं है। अगर राहत सामग्री में छोटी सी भी रुकावट आई, तो पुरानी स्थिति तुरंत लौट आएगी। आइए समझते हैं कि गाजा की 21 लाख आबादी किस दौर से गुजर रही है, IPC रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु क्या हैं और यह संकट मासूम बच्चों के भविष्य को कैसे लील रहा है।
क्या बदले हैं हालात?
IPC की रिपोर्ट अप्रैल से जून की अवधि के आंकड़ों पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में हालात पहले के मुकाबले थोड़े सुधरे हैं, लेकिन स्थिति अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है। सुधार के दो मुख्य कारण हैं, पहला युद्ध की विभीषिका में थोड़ी कमी और दूसरा इजराइल की ओर से गाजा में अधिक मानवीय सहायता को आने देना, इन दोनों स्थितियों से हालात में जरूरी असर पड़ा है, लेकिन ये नतीजा बराबर नहीं है, यानी इसका लाभ पूरे गाजा में एक जैसा नहीं दिखा है। कई इलाके आज भी भोजन के लिए पूरी तरह तरस रहे हैं। रिपोर्ट ये साफ करती है कि गाजा की 21 लाख फलिस्तीनी आबादी को इस भीषण खाद्य संकट से तुरंत बाहर निकालने की कोई हाल फिलहाल संभावना नहीं दिखाई दे रही है।
जमीनी हकीकत बता रही हालात
कागजी आंकड़ों से अलग, गाजा की गलियों में जिंदगी बेहद कठिन है। इजराइली सेना का नियंत्रण गाजा के आधे से अधिक हिस्से पर है। इस वजह से लाखों लोग संकरे, मलबे में तब्दील हो चुके शहरी इलाकों और बदबूदार तंबू शिविरों में रहने को मजबूर हैं। सीवेज सिस्टम पूरी तरह ठप हो चुका है, जिससे आए दिन बीमारियां फैल रही हैं। एपी ने खान यूनिस के विस्थापित तंबूओं में रह रहे परिवारों से बातचीत करके एक रिपोर्ट छापी है, जिसके मुताबिक रोजाना लोग अपने परिवार के लिए भोजन जुटाने चैरिटी किचन की लंबी कतार में खड़ी होती हैं। जो थोड़ा बहुत मिल जाता है, उससे ही पूरा परिवार खाता है।
गाजा चैंबर ऑफ कॉमर्स के आंकड़ों के अनुसार, बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इतनी अधिक हैं कि आम लोगों के लिए उन्हें खरीद पाना असंभव है।
'स्टंटिंग' का शिकार होता बचपन: यूनिसेफ की गंभीर चेतावनी
अपर्याप्त और कुपोषित भोजन का सबसे भयानक और स्थायी असर गाजा के नन्हें बच्चों पर पड़ रहा है। लगातार महीनों तक पेट भरकर पौष्टिक खाना न मिलने के कारण बच्चों में 'स्टंटिंग' (Stunting) के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आसान भाषा में कहें तो स्टंटिंग वह शारीरिक और मानसिक स्थिति है, जिसमें लंबे समय तक सही पोषण न मिलने के कारण बच्चे की शारीरिक लंबाई उसकी उम्र के अनुपात में बहुत कम रह जाती है। यह केवल कद छोटा रहने की बात नहीं है, बल्कि इससे बच्चे के मस्तिष्क का विकास और इम्युनिटी भी जीवनभर के लिए कमजोर हो जाती है।
यूनिसेफ (UNICEF) की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने इस पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि गाजा में अब भी अनगिनत बच्चे हर रात भूखे पेट सोने को मजबूर हैं। दुखद सच यह है कि लंबे समय तक पोषण न मिलने के कारण जो नुकसान इन बच्चों के शरीर और दिमाग को हुआ है, उससे कई बच्चे शायद जीवनभर कभी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाएंगे।
IPC क्या है और यह अकाल कैसे तय करता है?
IPC (Integrated Food Security Phase Classification) दुनिया भर के खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का एक समूह है, जिस पर संयुक्त राष्ट्र (UN) और तमाम वैश्विक संस्थाएं आंखें मूंदकर भरोसा करती हैं। यह संस्था तीन मुख्य पैमानों पर भुखमरी को नापती है:
- घरों में भोजन की उपलब्धता: कितने प्रतिशत परिवार भोजन की अत्यधिक कमी झेल रहे हैं।
- बच्चों में कुपोषण: कितने छोटे बच्चे कुपोषण के गंभीर लक्षणों से पीड़ित हैं।
- मृत्यु दर: भुखमरी और पोषण की कमी के कारण प्रतिदिन कितने लोगों की जान जा रही है।
सोमालिया और सूडान जैसे देशों में अकाल घोषित करने के बाद, IPC ने पिछले साल गाजा में पहली बार यह खौफनाक चेतावनी जारी की थी। हालांकि, पिछले साल अक्टूबर में हुए समझौते के बाद भी जारी छिटपुट हमलों और गोलाबारी में स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 1,185 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
उम्मीद और खौफ के बीच झूलता गाजा
गाजा में राहत सामग्री की गाड़ियों का प्रवेश बढ़ना निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, जिसने भुखमरी की उस तेजी से बढ़ती लहर को थोड़ा रोका है जो इंसानियत को निगल रही थी। लेकिन जब तक बाजारों में कीमतें सामान्य नहीं होतीं, युद्ध पूरी तरह शांत नहीं होता और हर नागरिक तक साफ पानी और पौष्टिक भोजन नहीं पहुंचता, तब तक गाजा की 21 लाख आबादी के सिर पर संकट की यह तलवार यूं ही लटकती रहेगी।