US Iran Deal: लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह एक-दूसरे पर जमकर हमले कर रहे हैं। युद्धविराम समझौते की खबरें सामने आने के कुछ ही घंटों बाद, शनिवार को दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हमलों में दो बच्चों सहित कम से कम सात लोग मारे गए। लगातार जारी इस लड़ाई ने पश्चिम एशिया में युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते को खतरे में डाल दिया है।
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच छिड़ी जंग
नबातीयेह में अंधाधुंध गोलीबारी
लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी के अनुसार, हमलों में दक्षिणी शहर नबातीयेह और आस-पास के गांवों को निशाना बनाया गया। कम से कम सात लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं। शुक्रवार को इजरायल और चरमपंथी समूह हिजबुल्लाह के बीच भीषण लड़ाई में लेबनान में कम से कम 47 लोगों और चार इजरायली सैनिकों के मारे जाने के बाद मध्यस्थ इस लड़ाई रोकने की कोशिश में जुटे हैं।
हिजबुल्लाह ने दागे 50 से ज्यादा रॉकेट
इजरायली सेना के एक अधिकारी ने बताया कि हिजबुल्लाह ने रात भर में दक्षिणी लेबनान में इज़रायली सेना पर 50 से ज़्यादा रॉकेट दागे, जिसके बाद सेना ने चरमपंथी गुट को निशाना बनाना शुरू कर दिया। शुक्रवार को वाशिंगटन में इज़राइल के राजदूत येचिएल लीटर ने 'एक्स' पर कहा कि अगर हिजबुल्लाह समझौते का पालन करता है और हमले बंद कर देता है, तो इजरायल ''तत्काल युद्धविराम के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध'' है।
वहीं, हिजबुल्लाह ने सार्वजनिक बयान में कहा कि अगर इजरायल युद्धविराम का पालन करता है तो वह भी ऐसा ही करेगा। हालांकि, हिजबुल्लाह ने स्पष्ट तौर पर यह जानकारी नहीं दी कि दोनों पक्षों के बीच कोई औपचारिक युद्धविराम लागू हो चुका है।
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खतरे में अमेरिका-ईरान समझौता
अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए। जिसके कुछ दिनों बाद ही हिजबुल्लाह की एंट्री हुई और इजरायल के साथ उसका युद्ध शुरू हो गया। हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के नागरिक इलाकों पर रॉकेट और ड्रोन हमले किए, जबकि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया और लगातार कहर बरपा रहा है।
इस हफ्ते हुए अंतरिम अमेरिका-ईरान समझौते के बाद होर्मुज को फिर से खोल दिया गया। साथ ही समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता फिर से शुरू करने का भी प्रावधान है, जो इस पूरे संघर्ष का अहम मुद्दा रहा है। हालांकि, इजरायल और हिजबुल्लाह इस समझौते के पक्षकार नहीं हैं। समझौते में लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर लड़ाई जारी रहने के कारण यह समझौता खतरे में पड़ता दिख रहा है।
