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ऑस्ट्रेलिया में धूल भरी आंधी ने मचाई तबाही, सिडनी में छाया अंधेरा; अलर्ट जारी

इससे पहले दिन में, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने भी पूर्वी तट पर बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के लिए वित्तीय सहायता की प्रतिबद्धता जताई, क्योंकि अधिकारियों ने पुष्टि की कि लगभग 800 घर और व्यवसाय इसकी वजह से नष्ट हो गए हैं। अल्बानीज़ ने बाढ़ संकट के बाद दूसरी बार पूर्वी तट के राज्य न्यू साउथ वेल्स में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, जहां मई में रिकॉर्ड तोड़ बारिश के बाद पांच मौतें हुई हैं।

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ऑस्ट्रेलिया में धूल भरी आंधी ने मचाया कोहराम (प्रतीकात्मक फोटो- Meta)

ऑस्ट्रेलिया में चल रहे एक विशाल धूल भरे तूफान ने सिडनी को घने धुंध में ढंक दिया है। सिडनी में धूल भरी आंधी के कारण अंधेरे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिससे स्वास्थ्य संबंधी अलर्ट जारी किए गए हैं। न्यू साउथ वेल्स स्वास्थ्य विभाग की तरफ से ने मंगलवार को कुछ क्षेत्रों में बहुत खराब वायु गुणवत्ता के लिए अलर्ट जारी किया गया, क्योंकि दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में धूल भरी तेज हवाओं के कारण धुंध छा गई है।

क्यों पैदा हुई ऐसी स्थिति

विशेषज्ञों ने कहा कि यह घटना मौसम के बदलते पैटर्न और भूमि क्षरण के प्रति ऑस्ट्रेलिया की संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी में विजिटिंग फेलो मिल्टन स्पीयर के अनुसार, दीर्घकालिक वायुमंडलीय परिवर्तन दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया में सूखे और पूर्वी तट पर भारी बारिश दोनों में योगदान दे रहे हैं।

गंभीर सूखे की चपेट में रहा है ऑस्ट्रेलिया

मैक्वेरी यूनिवर्सिटी के पॉल बेग्स ने कहा कि इस तरह की घटना दीर्घकालिक जलवायु प्रवृत्तियों को दर्शाती है। शोध से पता चलता है कि 2014 से 2023 तक, ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश भाग में 1950 के दशक की तुलना में अधिक गंभीर सूखा पड़ा है, जिसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। दक्षिणी क्रॉस विश्वविद्यालय के मृदा विशेषज्ञ जॉन ग्रांट ने इस घटना के बाद इसके दीर्घकालिक क्षति की चेतावनी दी। यह धूल भरा तूफ़ान पश्चिमी विक्टोरिया और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में उत्पन्न हुआ, जहां सूखी, भुरभुरी मिट्टी का कटाव हो रहा है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

ग्रांट ने कहा, ऐसे में तेज हवा की वजह से होने वाले कटाव से मिट्टी का सबसे उपजाऊ हिस्सा नष्ट हो जाता है। इससे न केवल उत्पादकता कम होती है, बल्कि भूमि के फिर से कटाव की संभावना भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा- "इसकी वजह से समस्या बढ़ती जा रही है (ऐसा कहा जा सकता है)। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव इस प्रक्रिया को और बढ़ा रहे हैं।"

IANS की रिपोर्ट

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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