Climate Change in World: जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग शुरुआत से ही समूचे संसार के लिए बड़ा और अहम मुद्दा रहे हैं, पर हाल-फिलहाल के बरसों में मौसमी असंतुलन ने सबका ध्यान अपनी ओर तेजी से गहराती चिंता के रूप में खींचा है। यही वजह है कि ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इस संदर्भ में दुनिया के लिए खतरे की घंटी बज रही है। चूंकि, धरती के इस बैलेंस के बिगड़ने के चलते न सिर्फ अपने भारत बल्कि विश्व भर के कई बड़े मुल्कों पर कड़ा असर पड़ा है। यही वजह है कि कुछ जगह तो इमरजेंसी सरीखे हालात पनप आए हैं।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः अभिषेक गुप्ता)
जो यूरोप ठंड के लिए जाना जाता था, वह भी इस मौसम संबंधी असंतुलन का शिकार हुआ और सूरज की गर्म तपिश में झुलसा। यही नहीं, यूरोप में एक साल में छह फीसदी ग्लेशियर भी पिघले। इटली में तापमान 45 के पार रिकॉर्ड किया गया तो दक्षिण कोरिया में बाढ़ से 50 मौतें हो गईं। ग्रीस में बढ़ते तापमान से जंगलों में आग ने थमने का नाम लिया, जिसकी वजह से हाईवे बंद करने पड़े।
इटली के मिलान में भीषण गर्मी के बीच छाता लेकर जाती महिला।
वहीं, अमेरिका में भी तापमान 50 डिग्री के पार दर्ज किया गया। अपने इंडिया के विभिन्न हिस्सों में जुलाई की शुरुआत में बारिश के बाद आने वाले फ्लैश फ्लड से हाहाकार मचा।
स्पेन के मैड्रिड शहर में चिलचिलाती गर्मी के बीच पब्लिक फाउंटेन टैप से पानी पीते हुए एक लड़की।
उटपटांग मौसम पर क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
पिछले कुछ सालों में मौसम ने इस कदर उटपटांग रूप लिया है कि अगर गर्मी पड़ती है तो वह इतनी अधिक होती कि सहन करना मुश्किल हो जाता है, जबकि सर्दी में हांड़ कंपाऊ ठंड छक्के छुड़ा देती है। यही नहीं, गर्मी के मौसम में एकदम से बारिश और बरसात के मौसम में सूखा पड़ने की घटनाओं ने भी इंसान को हाल-फिलहाल में चौंकाया है। आम होती जा रही प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के बीच समुद्र का जल स्तर बढ़ता जा रहा है। आशंका है कि साल 2025 तक आर्कटिक महासागर की बर्फ नहीं बचेगी।इरान की राजधानी तेहरान के Tangeh Vashi कैनयन में ठंडे पानी के बीच आनंद लेते हुए लोग।
साइंटिस्ट की मानें तो जलवायु परिवर्तन के चलते आने वाले समय में एक्स्ट्रीम वेदर इवेंट्स (मौसम संबंधी बड़ी घटनाएं) बढ़ सकती हैं। चेताते हुए उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में धरती उस स्थिति में पहुंच जाएगी, जिसके बाद पृथ्वी को हुए नुकसान को फिर से ठीक करना बेहद नामुमकिन हो जाएगा। संयुक्त राष्ट् (यूएन) भी जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनिया को सावधान कर चुका है और कह चुका है कि यह संकट किसी टाइम बम जैसा है और अभी भी हमारे पास इससे निपटने का समय है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरस बोले थे कि मानवता गंभीर खतरे में है।
