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छोटे बोट ताइवान भेज रहा है चीन! आखिर क्या है इसके पीछे का मकसद

चीन लमबे समय से अपनी नेवी और एयरफोर्स भेजकर ताइवान को धमकाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस बार उसने छोटी नौकाएं भेजी है जो ताइवान के लिए चिंता का सबब है ।

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इस बार चीन ने छोटी नौकाएं भेजी है जो ताइवान के लिए चिंता का सबब है ।

ताइपे: चीन लंबे समय से अपनी विशाल नौसेना, वायुसेना और दुनिया की सबसे बड़ी सेना के बल पर ताइवान को धमकाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अब उसके द्वारा भेजी जा रहीं छोटी नौकाएं अधिक परेशानी का सबब बन रही हैं। ताइवान के तट रक्षक बल के उप महानिदेशक ह्सिएह चिंग-चिन के अनुसार, तट रक्षक बल ने पांच ऐसे मामलों का दस्तावेजीकरण किया है, जिनमें कुल 38 चीनी नागरिक शामिल हैं, जिन्होंने 160 किलोमीटर (100 मील) चौड़े ताइवान जलडमरूमध्य को पार किया। यह जलडमरुमध्य स्वशासित लोकतांत्रिक द्वीप को सत्तावादी चीनी मुख्य भूमि से अलग करता है।

एक मामले का वीडियो टिकटॉक के चीनी संस्करण डॉयिन पर पोस्ट किया गया है, जिसमें एक व्यक्ति चीन की भाषा में बोलता हुआ सुनाई दे रहा है और एक चीनी झंडा उस स्थान पर लगाते हुए दिखाई देता है, जिसे वह ताइवान का समुद्र तट बताता है। पृष्ठभूमि में दिखाई देने वाले दृश्य में राजधानी ताइपे के दक्षिण में समुद्र तट का हिस्सा प्रतीत हो रहा है।

ताइवान पर चीन करता रहा है दावा

चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और दावा करता है कि ज़रूरत पड़ने पर वह बलपूर्वक इसे अपने नियंत्रण में ले सकता है। टिकटॉक पर दिखाई दे रहे उस व्यक्ति का पता नहीं चल पाया है और न ही उसकी पहचान सार्वजनिक की गई है। ताइवान के अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उसे द्वीप पर किसी से मदद मिली थी।

ताइवान के रडार के लिए पकड़ना मुश्किल

एक अन्य मामले में एक पिता और पुत्र को ताइवान की सरजमीं पर पहुंचने के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया, साथ ही एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया जो ताइपे के उत्तर में एक लोकप्रिय पर्यटक क्षेत्र में मछली पकड़ने वाले बंदरगाह पर पहुंचा था। छोटे आकार की नौकाओं में से कुछ समुद्र तट पर मौज-मस्ती के लिए हैं, लेकिन इन्हें ताइवान के रडार के लिए पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इस चुनौती से निपटने के लिए द्वीप के आस-पास के दुर्गम तटरेखा की निगरानी के लिए अधिक कैमरों और अन्य पहचान उपकरणों और जनशक्ति की आवश्यकता होगी।

चीन लगातार सैन्य अभ्यास कर रहा है

हालांकि, ऐसे मामले असामान्य नहीं हैं, परंतु ये दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने के बीच सामने आए हैं। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने चीन को एक ऐसा शत्रु घोषित किया है, जिससे बचाव किया जाना चाहिए। वहीं, चीन लगातार सैन्य अभ्यास कर रहा है, जिसे ताइवान पर आक्रमण या उसकी घेराबंदी के पूर्वाभ्यास के रूप में देखा जा रहा है। ताइवान में अवैध रूप से प्रवेश करने वालों को 500,000 ताइवान डॉलर (16,666 अमेरिकी) का जुर्माना और पांच साल की जेल की सजा हो सकती है, लेकिन आमतौर पर ऐसे दंड माफ कर दिए जाते हैं, बशर्ते कि किसी को चोट न पहुंचे और संपत्ति को कोई नुकसान न पहुंचे। (एजेंसी इनपुट - भाषा/AP)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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