ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और जीवाश्म ईंधन पर बढ़ती निर्भरता के बीच दुनिया के कई देश ऐसी तकनीक विकसित करने में जुटे हैं, जो भविष्य में स्वच्छ, सुरक्षित और लगभग असीमित ऊर्जा उपलब्ध करा सके। इसी दिशा में चीन ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। दुनिया स्वच्छ और लगभग असीमित ऊर्जा के स्रोत की तलाश में है। इसी दिशा में न्यूक्लियर फ्यूजन (Nuclear Fusion) को ऊर्जा का भविष्य माना जा रहा है।
चीन ने हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े Superconducting Fusion Magnet का सफल परीक्षण पूरा किया है। यह मैग्नेट चीन के Artificial Sun यानी फ्यूजन रिएक्टर (CFETR) परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। चीन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक फ्यूजन ऊर्जा से बिजली उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल करना है।
जानिए आखिर क्या है Artificial Sun?
Artificial Sun वास्तव में कोई कृत्रिम तारा नहीं है, बल्कि यह एक न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर है। इसका उद्देश्य सूरज के भीतर होने वाली ऊर्जा उत्पादन की प्राकृतिक प्रक्रिया को पृथ्वी पर नियंत्रित वातावरण में दोहराना है। सूरज के केंद्र में अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण हाइड्रोजन के परमाणु आपस में मिलकर हीलियम बनाते हैं। इस प्रक्रिया को न्यूक्लियर फ्यूजन कहा जाता है। इसी दौरान भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जिससे सूरज अरबों वर्षों से लगातार प्रकाश और ऊष्मा दे रहा है। वैज्ञानिक इसी प्रक्रिया को पृथ्वी पर सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। यदि इसमें सफलता मिलती है तो भविष्य में बिजली उत्पादन का एक ऐसा स्रोत उपलब्ध हो सकता है, जो लगभग असीमित, स्वच्छ और कम प्रदूषण वाला होगा।
सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट (Superconducting Fusion Magnet) क्या है?
सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट (Superconducting Fusion Magnet) एक अत्यंत शक्तिशाली चुंबक (Magnet) होता है, जिसका उपयोग न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर (Artificial Sun) में किया जाता है। इसका मुख्य काम करोड़ों डिग्री तापमान वाले प्लाज्मा (Plasma) को नियंत्रित करके रिएक्टर के अंदर सुरक्षित रखना है। Superconducting का अर्थ है ऐसी विशेष सामग्री, जिसमें बहुत कम तापमान (लगभग −269°C) पर बिजली का प्रतिरोध (Resistance) लगभग शून्य हो जाता है।
ITER क्या है?
ITER (International Thermonuclear Experimental Reactor) दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन परियोजना है। इसमें यूरोपीय संघ, अमेरिका, रूस, चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया सहित कई साझेदार देश शामिल हैं।इस परियोजना का उद्देश्य यह साबित करना है कि न्यूक्लियर फ्यूजन के जरिए बड़े पैमाने पर व्यावसायिक ऊर्जा उत्पादन तकनीकी रूप से संभव है। चीन का नया सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट इसी क्षेत्र में उसकी बढ़ती तकनीकी क्षमता का संकेत माना जा रहा है।
क्या अब जल्द मिलने लगेगी फ्यूजन बिजली?
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक स्तर पर फ्यूजन ऊर्जा उत्पादन अभी भी एक बड़ी वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग चुनौती बना हुआ है।फ्यूजन रिएक्टर को लंबे समय तक स्थिर रखना, उससे निकली ऊर्जा को व्यावहारिक रूप से बिजली में बदलना, अत्यधिक तापमान सहने वाली नई सामग्री विकसित करना और पूरी प्रणाली को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना जैसे कई बड़े लक्ष्य अभी बाकी हैं।यही कारण है कि दुनिया के अधिकांश वैज्ञानिक मानते हैं कि फ्यूजन ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग में अभी कुछ और वर्षों का समय लग सकता है, हालांकि इस दिशा में लगातार तेजी से प्रगति हो रही है।
क्या उपलब्धि हासिल की है चीन ने ?
चीन के इंस्टीट्यूट ऑफ प्लाज्मा फिजिक्स (Institute of Plasma Physics), जो Chinese Academy of Sciences के अंतर्गत आता है, ने दुनिया का सबसे बड़ा सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट विकसित किया है। यह मैग्नेट D-आकार का है और इसकी लंबाई लगभग 21 मीटर, चौड़ाई 12 मीटर तथा कुल वजन 582 टन है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह अब तक तैयार किया गया सबसे बड़ा फ्यूजन रिएक्टर सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट है। रिसर्चरों का दावा है कि इसका आयतन दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन परियोजना ITER (International Thermonuclear Experimental Reactor) के लिए बनाए गए समान मैग्नेट की तुलना में लगभग 1.3 गुना अधिक है, जबकि इसमें ऊर्जा संग्रहित करने की क्षमता लगभग तीन गुना ज्यादा है।
'इससे देश की विदेशी सप्लाई पर निर्भरता खत्म हो गई'
बीजिंग का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी पूरी तरह से घरेलू सामान और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं की मदद से डेवलप की गई है। इससे देश की विदेशी सप्लाई पर निर्भरता खत्म हो गई, जिसमें जरूरी फ्यूजन पार्ट्स भी शामिल हैं। एक आर्टिफिशियल सूरज एक न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्टर है जिसे सूरज को फ्यूल देने वाले प्रोसेस की नकल करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो एटॉमिक न्यूक्लिआई को फ्यूज करके एनर्जी बनाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में बिजली का लगभग असीमित, साफ और सुरक्षित स्रोत उपलब्ध कराकर यह ऊर्जा उत्पादन में क्रांति ला सकता है।
क्या भविष्य में घर इसी ऊर्जा से चलेंगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फ्यूजन तकनीक व्यावसायिक रूप से सफल हो जाती है, तो आने वाले दशकों में यह दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। हालांकि अभी यह तकनीक अनुसंधान और परीक्षण के चरण में है और बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन के लिए इसे व्यावसायिक रूप से परिपक्व होने में समय लगेगा।
