अफ्रीकी देश सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक के जाम्बोये इलाके में कैमरून सीमा के पास एक सोने की खदान में हुए भीषण हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया है। अचानक हुए भीषण भूस्खलन और भूमिगत सुरंगों के ढहने के कारण सैकड़ों मजदूर मलबे के नीचे दब गए। रेड क्रॉस और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की गंभीर आशंका जताई जा रही है।
कैमरून सीमा के पास जाम्बोये में दर्दनाक हादसा
बारिश और अस्थिर जमीन से अचानक ढहीं सुरंगे
स्थानीय प्रशासन और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब सैकड़ों पारंपरिक मजदूर खदान के अंदर और आसपास काम कर रहे थे। बाबोआ उप-प्रांत अदालत के बयान के मुताबिक, मजदूरों द्वारा खोदी गई कई भूमिगत सुरंगे अचानक ढह गईं, जिससे पूरी जमीन धंस गई और भारी मात्रा में मलबा नीचे आ गिरा। पड़ोसी कैमरून के सीमावर्ती शहर गारोउआ-बुलई के मेयर अब्दोन अदामौ ने बताया कि क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश ने खदान की मिट्टी को बेहद कमजोर कर दिया था, जिसके चलते यह भयावह हादसा हुआ। मृतकों में कम से कम 4 कैमरून और 2 चाड के नागरिक भी शामिल हैं। उपकरणों की कमी के बीच जारी है रेस्क्यू ऑपरेशनघटना के बाद से ही रेड क्रॉस की टीमें, स्थानीय बचावकर्मी और ग्रामीणों की मदद से मलबे को हटाकर फंसे हुए लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, मौके पर भारी मशीनों और विशेषज्ञ उपकरणों की भारी कमी के कारण राहत कार्य में काफी बाधा आ रही है। लोग हाथों से ही मलबा हटाकर अपनों की तलाश करने में जुटे हैं। समय बीतने के साथ मलबे में फंसे लोगों के जीवित बचने की उम्मीदें बेहद धुंधली होती जा रही हैं।
न्यायिक जांच के आदेश और सुरक्षा पर उठे सवाल
हादसे के बाद खान मंत्री रुफिन बेनाम बेल्टोंगू ने पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और असुरक्षित माइनिंग पद्धतियों के खतरों के प्रति चेतावनी जारी की। बाबोआ की अदालत ने घटना के कारणों का पता लगाने, पीड़ितों की पहचान करने और अवैध रूप से खदान संचालित करने वाले संचालकों की आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए न्यायिक जांच शुरू कर दी है।
बता दें कि सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में हजारों लोग बिना किसी सुरक्षा उपकरण और सरकारी नियंत्रण के हाथों से 10-20 फीट गहरे गड्ढे खोदकर सोने की निकासी करते हैं। जाम्बोये क्षेत्र में मशीनें आने के बाद से अवैध और अनियंत्रित खनन काफी बढ़ गया था।
साल 2025 में संयुक्त राष्ट्र (UN) विशेषज्ञों की रिपोर्टों में भी इस बात का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि खनन कार्यों में सशस्त्र समूहों की संलिप्तता थी और सोने के निष्कर्षण के लिए ऐसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा था, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती हैं।
