Sheikh Hasina Extradition: पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की स्वदेश वापसी को लेकर बांग्लादेश और भारत के बीच कूटनीतिक चर्चाएं एक बार फिर गरमा गई हैं। रविवार को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत से अपील की कि वह शेख हसीना के प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाए। बांग्लादेश का मानना है कि हसीना को वापस लाने के लिए केवल कानूनी दस्तावेज ही काफी नहीं हैं, बल्कि इसके लिए मजबूत 'राजनीतिक इच्छाशक्ति' की भी जरूरत है।
भारत से शेख हसीना को वापस लाने की जंग तेज (फाइल फोटो)
विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने ढाका में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ही एक द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि लागू है। इस संधि के तहत पूर्व प्रधानमंत्री को वापस लाया जा सकता है और बांग्लादेशी अधिकारी इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस मामले में सकारात्मक कदम उठाएगा। हालांकि, कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में इस संधि के प्रावधानों को लागू करना इतना आसान नहीं होगा।
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बांग्लादेशी मंत्री का यह बयान भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की उस टिप्पणी के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने हसीना की वापसी के लिए कोई भी समय-सीमा बताने से साफ इनकार कर दिया था। त्रिवेदी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि भारत सरकार इस मामले की कानूनी और सुव्यवस्थित तरीके से जांच कर रही है और बिना पूरी प्रक्रिया के कोई अंतिम समय सीमा तय नहीं की जा सकती।
आपको बता दें कि 79 वर्षीय शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में हुए व्यापक छात्र आंदोलन और तख्तापलट के बाद ढाका छोड़कर भारत आ गई थीं। तब से वे भारत में ही रह रही हैं, जबकि बांग्लादेश में उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं और उन्हें वापस लाने की कोशिशें जारी हैं।
