बांग्लादेश में लोकतंत्र का भविष्य संकट में: शेख हसीना के बाद अराजकता, सांप्रदायिक हिंसा और चुनावी अनिश्चितता

शेख हसीना की सत्ता से विदाई को लोकतंत्र की जीत समझा गया था, लेकिन जिस बदलाव की अपेक्षा थी, वह संस्थागत विफलताओं, सांप्रदायिक हिंसा और कट्टरपंथ के उभार में तब्दील हो गया है। नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार स्थायित्व और पारदर्शिता लाने में विफल रही है। यदि जल्द और निर्णायक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो बांग्लादेश लोकतंत्र के पतन, सामाजिक विघटन और क्षेत्रीय अस्थिरता की ओर बढ़ सकता है।

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 2024 में सत्ता से हटाए जाने के बाद जो परिवर्तन की उम्मीद थी, वह अब अराजकता, भीड़तंत्र और कट्टरपंथी ताकतों के उभार में बदलती दिख रही है। देश की बागडोर संभाल रहे नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के अधीन लोकतंत्र की बहाली की बजाय हिंसा और अस्थिरता का माहौल गहराता जा रहा है।

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