ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की समुद्री घेराबंदी (Blockade) के ऐलान के बाद तेहरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि दोनों देश समझौते के बेहद करीब थे, लेकिन अमेरिका के अड़ियल रवैये ने सब बिगाड़ दिया।
अराघची ने X पर किया पोस्ट
समझौते के 'करीब' होकर दूर हुए दोनों देश
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई बातचीत के दौरान दोनों पक्ष समझौते से महज कुछ 'इंच' की दूरी पर थे। अराघची के अनुसार, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए नेक नियत के साथ अमेरिका से बातचीत की थी, लेकिन ऐन वक्त पर अमेरिका ने अपनी शर्तें बदल दीं और 'अधिकतमवाद' (Maximalism) का रास्ता अपनाया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अच्छाई के बदले अच्छाई मिलती है और दुश्मनी के बदले दुश्मनी।"
अमेरिका का 'समुद्री घेराबंदी' का बड़ा ऐलान
इस्लामाबाद में बातचीत विफल होने के तुरंत बाद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने घोषणा की कि 13 अप्रैल की रात (भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे) से ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी शुरू कर दी जाएगी। इस घेराबंदी के तहत ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों (अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी) में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों को रोका जाएगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि इस घेराबंदी में अन्य देश भी अमेरिका का साथ देंगे।
ट्रंप का सख्त रुख: "सीधे नरक भेज दिए जाओगे"
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान को सख्त चेतावनी दी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में माइन्स बिछा रखी हैं और वह देशों से "अवैध टोल" वसूल कर उन्हें जबरन डरा-धमका रहा है। ट्रंप ने लिखा, "समुद्र में अवैध टोल देने वाले किसी भी व्यक्ति को सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। कोई भी ईरानी जो हम पर या शांतिपूर्ण जहाजों पर गोली चलाएगा, उसे 'सीधे नरक' भेज दिया जाएगा!"
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ढोने के मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य वर्तमान में वैश्विक संकट का केंद्र बन गया है। ट्रंप ने ईरान पर अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान ने इस मार्ग को खुला रखने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह इसमें विफल रहा है। वहीं, अमेरिका का दावा है कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर सहमत नहीं हुआ, जिसके कारण बातचीत विफल रही।
