आज हमारे देश में लोग अपनी पुरानी संस्कृति को छोड़ वेस्टर्न कल्चर को तेजी से अपना रहे हैं, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में आज भी ऐसे कुछ लोग हैं, जो अपनी पुरानी विरासत और संस्कृति को संजोकर रखे हुए हैं। हाल में कुछ ऐसा ही नजारा इस वक्त सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें देखा जा सकता है कि एक बुजुर्ग अपने पोते के साथ डांस करते दिख रहे हैं।
एक साथ डांस करते हुए बुजुर्ग और छोटा बच्चा (X/@anandmahindra)
बुजुर्ग व्यक्ति और बच्चा एक साथ डांस करते आए नजर
बता दें कि वायरल वीडियो (Viral Video) में जो डांस देखा जा रहा है, वह गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र की पारंपरिक “डायरा” सभा का है। यह भारतीय लोक संस्कृति की एक ऐसी जीवंत परंपरा है, जिसे गुजरात के लोग आज भी पूरी सिद्दत के साथ निभाते हैं। वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक बुजुर्ग व्यक्ति और एक छोटे बच्चे के बीच डांस का मजेदार मुकाबला चल रहा है। बुजुर्ग व्यक्ति पारंपरिक सफेद केडियू और धोती पहनकर पूरे जोश के साथ नाचते नजर आते हैं। वहीं छोटा बच्चा भी उसी ऊर्जा और खुशी के साथ उनके साथ जुगलबंदी करते हुए उनके कदम से कदम मिलाकर नाचता है।
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आनंद महिंद्रा ने शेयर किया यह Video
सोशल मीडिया पर इस डांस मुकाबले का वीडियो (Video) इस वक्त जमकर वायरल हो रहा है। जिस पर हमारे देश के जाने-माने उद्योगपति आनंद महिंद्रा की नजर पड़ी और इसे उन्होंने अपने सोशल साइट अकाउंट से शेयर करते हुए इस वीडियो को आज का मोटिवेशन बताया। बता दें कि आनंद महिंद्रा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर हर सोमवार को एक मोटिवेशनल वीडियो या फिर स्टोरी शेयर करते हैं और वे इसे मंडे मोटिवेशन (Monday Motivation) बताते हैं।
Video से बहुत ही ज्यादा इम्प्रेस हुए आनंद महिंद्रा
इस मंडे मोटिवेशन सीरिज के तहत आनंद महिंद्रा ने अपने अकाउंट पर आज इस वीडियो को शेयर किया है और इसे पोस्ट करते हुए उन्होंने वीडियो के कैप्शन में लिखा है, "यह वीडियो दिखाता है कि कैसे पुरानी पीढ़ी अपनी संस्कृति, परंपराएं और कला नई पीढ़ी को सिखा रही है। यह सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक विरासत को आगे बढ़ाने का तरीका है। यह वीडियो मझे काफी सुकून देता है। इसे देख मैं इस बात को लेकर पूरी तरह से सहमत हूं कि चाहे दुनिया कितनी भी बदल जाए, हमारी परंपराएं हमेशा जीवित रहेंगी। यह वीडियो यह दिखाता है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितना जरूरी है। साथ ही हमें यह भी सिखाता है कि बदलाव के बीच भी हमारी पहचान और संस्कृति कायम रह सकती है। परंपराएं तभी जिंदा रहती हैं, जब उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।"
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
