कुछ लोग अपने काम को इतने ईमानदारी से करते हैं कि समाज में वे एक नई मिशाल पेश करते हैं। हाल में ऐसी ही दो महिला शिक्षकों की कहानी सामने आई है, जो शिक्षा के प्रति समर्पण की मिसाल पेश करती हैं। दोनों महिला शिक्षिकाओं का एक वीडियो (Video) भी सामने आया है, जिसमें वे नदी पारकर स्कूल जाते दिख रही हैं। इस वीडियो को ANI ने अपने एक्स अकाउंट से शेयर किया है। ANI के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में दो महिला शिक्षिकाएं बारिश के मौसम में भी मुश्किल रास्तों से गुजरकर बच्चों को पढ़ाने स्कूल जाती हैं। खास बात तो यह है कि इनमें से एक शिक्षिका अपने 9 महीने के बच्चे को गोद में लेकर नदी तक पार करती हैं और बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल पहुंचती हैं।
बच्चे को गोद में लेकर नदी पार करती टीचर (X/@ANI)
नदी पार कर स्कूल पहुंचती हैं शिक्षिकाएं
यह मामला वाड्रफनगर ब्लॉक के धौरपुर गांव का है। बारिश के मौसम में यह गांव आसपास के इलाकों से लगभग कट जाता है। गांव तक पहुंचने के लिए शिक्षिकाओं को पहले स्कूटर से मारना तक जाना पड़ता है। इसके बाद उनका करीब 3 किलोमीटर का पैदल सफर शुरू होता है। रास्ता पहाड़ी और काफी पथरीला है। इसके बाद उन्हें नदी पार करके स्कूल पहुंचना पड़ता है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें:
9 महीने के बच्चे को गोद में लेकर नदी पार करती है टीचर
शिक्षिका संध्या हालदार और कर्मिला टोप्पो लंबे समय से इस मुश्किल रास्ते से स्कूल जा रही हैं। कर्मिला टोप्पो के लिए यह सफर और भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वह अपने 9 महीने के बच्चे को भी साथ लेकर चलती हैं। कई बार नदी का पानी कमर और पेट तक पहुंच जाता है। ऐसे में बच्चे को गोद में लेकर नदी पार करना आसान नहीं होता।
3 KM पहाड़ी रास्ता और उफनती नदी
संध्या हालदार ने बताया कि वे अपना स्कूटर मारना में खड़ा करती हैं। इसके बाद करीब 3 किलोमीटर पहाड़ी रास्ते पर पैदल चलती हैं और फिर नदी पार करके स्कूल पहुंचती हैं। हालांकि, जब नदी में पानी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो उन्हें वापस लौटना पड़ता है। उन्होंने बताया कि बारिश के दिनों में बच्चों की चिंता सबसे ज्यादा रहती है। बच्चे काफी छोटे हैं और जब शिक्षिकाएं स्कूल पहुंचती हैं तो उन्हें देखकर बच्चे बहुत खुश हो जाते हैं। यही खुशी उनके मुश्किल सफर को आसान बना देती है। कर्मिला टोप्पो साल 2014 से इसी स्कूल में तैनात हैं। उनके मुताबिक हर साल बारिश के मौसम में नदी पार करने की समस्या सामने आती है। उन्हें कई बार सलाह दी जाती है कि जब पानी का स्तर ज्यादा हो तो नदी पार करके स्कूल जाने की कोशिश न करें।
कलेक्टर ने की शिक्षा के प्रति जज्बे की तारीफ
इस बीच शिक्षिकाओं की मेहनत और समर्पण की खबर बलरामपुर के कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी तक भी पहुंची। उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में ANI की खबर के जरिए जानकारी मिली कि एक शिक्षिका अपने छोटे बच्चे को साथ लेकर नदी पार करती हैं और बारिश में भी 3 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचती हैं। कलेक्टर ने शिक्षिका कर्मिला टोप्पो की मेहनत और ईमानदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनका समर्पण जिले के दूसरे शिक्षकों के लिए भी एक उदाहरण है।
