Viral Video: भारत के सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क सेवाएं चौबीसों घंटे दी जाती हैं। इसी सेवा का लाभ उठान वाले एक जर्मन कंटेंट क्रिएटर ने भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की तारीफ करते हुए एक वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जो अब सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। डेविड नेबेल (David Nebel) नाम का यह कंटेंट क्रिएटर पिछले कई सालों से दुनिया के अलग-अलग देशों की यात्रा कर चुका है। मगर वह भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था से काफी इम्प्रेस हुआ।
भारत के सरकारी अस्पताल से इम्प्रेस हुआ जर्मन कंटेंट क्रिएटर (Instagram/@indo.german.vibes)
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कुत्ते के काटने के बाद पहुंचे अस्पताल
डेविड ने अपने इस वीडियो (Video) में बताया कि रात को उन्हें एक स्ट्रीट डॉग ने काट लिया था। ऐसे में वे इलाज करवाने के लिए गुजरात के सूरत में भागे-भागे एक सरकारी अस्पताल पहुंचे, ताकि उन्हें रेबीज ना हो जाए। सरकारी अस्पताल में डेविड को मुफ्त इलाज मिला और उनसे कोई पैसे नहीं लिए गए। डेविड ने कहा कि सरकारी अस्पताल की इस सुविधा को देख वे बहुत प्रभावित और खुश हुए क्योंकि खुद उनके देश जर्मनी में मुफ्त इलाज बहुत ही मुश्किल से मिल पाता है।ये भी पढ़ें:
सेवा देखकर हुए प्रभावित
आगे वीडियो में डेविड ने बताया कि उन्हें रेबीज के 4 सुई और लगेंगे। मगर अस्पताल की सेवा देखकर वह काफी हद तक प्रभावित हुए। उनके मुताबिक, अस्पताल में इलाज जल्दी हुआ और वहां की साफ-सफाई भी बहुत अच्छी थी। उन्होंने कहा कि अस्पताल के इस अनुभव से हैरान थे, उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी कि यहां सबकुछ इतना अच्छा होगा।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और अब तक इस वीडियो को लाखों लोगों ने देखा और लाइक किया है। कई लोगों ने वीडियो पर कमेंट भी किया है। जहां कई लोगों ने भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुनिया के कई बड़े देशों से अच्छा बताया। वहीं, कई लोगों ने भारत के सरकारी अस्पतालों को यहां के लोगों के लिए एक वरदान बताया। जबकि कई लोगों का कहना है कि भारत में सरकारी अस्पतालों में कम या मुफ्त इलाज की सुविधा लोगों के लिए काफी मददगार साबित होती है। एक यूजर ने तो वीडियो पर कमेंट करते हुए लोगों को सलाह दिया कि अगर भारत में किसी को कुत्ता, बिल्ली या बंदर काट ले, तो उसे तुरंत सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
