सोशल मीडिया पर हर दिन कोई न कोई वीडियो वायरल होता रहता है। कभी किसी की सफलता की कहानी चर्चा में आ जाती है तो कभी मेहनत भरी जिंदगी की सच्चाई सामने आती है। इन दिनों ऐसा ही एक वीडियो (Uber Driver) खूब देखा जा रहा है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला एक भारतीय युवक Uber Cab चलाकर अपनी एक दिन की कमाई और मेहनत दिखाता नजर आता है। यह वीडियो तुषार बरेजा ने बनाया है। तुषार ने लोगों को बिना किसी दिखावे के यह बताने की कोशिश की कि विदेश में कैब ड्राइवर बनकर पैसा कमाना असल में कितना मुश्किल होता है।
महीने के 6 लाख रुपये कमा रहा ये Uber Driver, देखें वीडियो(Instagram/tusharbareja23)
12 घंटे का लिया ड्राइविंग चैलेंज
तुषार ने खुद पर एक 12 घंटे Uber ड्राइविंग चैलेंज लिया, ताकि लोग यह समझ सकें कि सिर्फ ज्यादा कमाई दिखने के पीछे कितनी मेहनत छुपी होती है। वीडियो में तुषार बताते हैं कि उनका दिन सुबह करीब 4 बजे शुरू हुआ। पूरी नींद भी नहीं मिली थी फिर भी ज्यादा राइड मिलने की उम्मीद में वे जल्दी घर से गाड़ी लेकर निकल पड़े। वे शहर की तरफ ड्राइव करते हैं ताकि शुरुआत से ही सवारी मिल सके।
एक दिन में कमाए 330 डॉलर
दिन की पहली बड़ी राइड उन्हें एयरपोर्ट की मिली, जिससे उन्हें करीब 47 डॉलर की कमाई हुई। इससे उन्हें थोड़ा हौंसला मिला लेकिन इसके बाद हर ट्रिप उतनी आसान नहीं रही। सुबह के समय कुछ अच्छी राइड्स मिलीं और करीब 7 बजे तक उनकी कमाई लगभग 100 डॉलर तक पहुंच गई लेकिन इसी बीच उन्हें कार में पेट्रोल भी भरवाना पड़ा जिससे खर्च भी बढ़ गया। तुषार इस वीडियो में आगे बताते हैं कि लोग अक्सर सिर्फ कमाई देखते हैं, लेकिन यह नहीं सोचते कि ईंधन, गाड़ी की देखभाल और लगातार ड्राइव करने की थकान भी साथ-साथ चलती है।
तुषार का प्लान पूरे 12 घंटे Uber चलाने का था, लेकिन लगातार बैठकर ड्राइव करने से उनका शरीर थकने लगा। इसलिए उन्होंने करीब 10 घंटे बाद ही काम रोक दिया। इतनी मेहनत के बाद उनकी कुल कमाई करीब 330 डॉलर हुई, जो भारतीय रुपयों में लगभग 20 हजार से ज्यादा बैठती है। इस हिसाब से अगर बात करें तो महीने का 6 लाख रुपये होता है। इस वीडियो को सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम पर tusharbareja23 नामक अकाउंट से शेयर किया गया है। यूजर्स ने वीडियो देखने के बाद कई तरह के कमेंट्स भी किए हैं। वीडियो में तुषार साफ कहते हैं कि Uber ड्राइविंग बाहर से जितनी आसान लगती है, असल में उतनी नहीं होती। इसमें लंबी शिफ्ट, कम नींद, ट्रैफिक, यात्रियों से बातचीत और खर्चों का भी दबाव रहता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
