नई दिल्ली: ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर के नीलचक्र पर किसी चील के बैठने की बात एक दुर्लभ और अप्रत्याशित घटना है। पंडितों और कुछ जानकारों का मानना है कि यह एक अपशकुन नहीं, बल्कि जगन्नाथ महाप्रभु की लीला का ही एक हिस्सा है, जो शुभ माना जाता है। जबकि अन्य इसे एक संकेत या संयोग के रूप में देख रहे हैं।
पुरी जगन्नाथ मंदिर के ऊपर नीलचक्र पर दिखी चील (फोटो - टाइम्स नाउ नवभारत)
रिपोर्टों के अनुसार पक्षी कुछ देर तक भगवान जगन्नाथ मंदिर के ऊपर उड़ता रहा और फिर उड़ने से पहले पतितपावन बाना पर कुछ देर विश्राम किया। इस दौरान उत्साही भक्त इस असामान्य घटना की तस्वीरें लेने से नहीं चूके।
यद्यपि श्रीमंदिर से संबंधित ऐसी घटनाओं को ओडिशा में व्यापक रूप से अशुभ माना जाता है, लेकिन भगवान जगन्नाथ के कुछ भक्तों का मानना है कि यह भगवान का संकेत है कि और वे रक्षा के लिए वहां मौजूद हैं। जानकारो के मुताबिक यदि पतितपावन ध्वज पर चील बैठी हो तो भगवान जगन्नाथ मंदिर के दैनिक अनुष्ठान प्रभावित नहीं होते।
इससे पहले इसी साल अप्रैल में एक चील को जगन्नाथ मंदिर का पतितपावन बाना (ध्वज) लेकर उड़ते देखा गया था। बताया जा रहा है कि तब वह वीडियो वायरल हो गया था।
