Oct 06, 2026
रेलवे में अप्रेंटिसशिप युवाओं के लिए किसी काम को सिर्फ किताबों से समझने के बजाय उसे असल काम के दौरान सीखने का मौका होती है।
Credit: canva
रेलवे की अलग-अलग यूनिट और डिवीजन में ITI ट्रेड के आधार पर अप्रेंटिस लिए जाते हैं। चयन होने के बाद उम्मीदवार को संबंधित ट्रेड के अनुसार ट्रेनिंग दी जाती है।
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रेलवे की ओर से जारी अप्रेंटिस नोटिफिकेशन में भी ट्रेनिंग को संबंधित ट्रेड और तय सिलेबस के अनुसार कराने की बात कही जाती है।
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अप्रेंटिस के दौरान मुख्य रूप से अपने ट्रेड से जुड़े काम को सीखना होता है। उदाहरण के लिए इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में बिजली से जुड़े उपकरणों और वायरिंग का काम, फिटर में मशीनों की फिटिंग और मेंटेनेंस, जबकि वेल्डर में वेल्डिंग से जुड़े काम सिखाए जा सकते हैं।
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यह ट्रेनिंग रेलवे की वर्कशॉप, डिवीजन या संबंधित यूनिट में हो सकती है। काम के दौरान सुरक्षा नियमों, मशीनों के इस्तेमाल और तकनीकी प्रक्रिया को भी समझने का मौका मिलता है।
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इस दौरान उम्मीदवार को अपने ITI ट्रेड का प्रैक्टिकल अनुभव मिलता है। मशीनों और उपकरणों को संभालना, काम को सही तरीके से करना, सुरक्षा नियमों का पालन और कार्यस्थल पर अनुशासन जैसी चीजें सीखने को मिलती हैं।
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ट्रेनिंग पूरी होने पर ट्रेड अप्रेंटिस को संबंधित नियमों के अनुसार परीक्षा या असेसमेंट से गुजरना पड़ सकता है और सफल होने पर नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट भी मिल सकता है।
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अप्रेंटिस को नौकरी की तरह नियमित सैलरी नहीं, बल्कि स्टाइपेंड दिया जाता है। इसकी रकम ट्रेड, योग्यता और उस समय लागू सरकारी नियमों के हिसाब से तय होती है।
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रेलवे के नियमों के अनुसार अप्रेंटिस को ट्रेनिंग अवधि में निर्धारित स्टाइपेंड मिलता है। इसलिए किसी खास भर्ती में कितना स्टाइपेंड मिलेगा, यह जानने के लिए उसी भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन देखना सबसे सही रहेगा।
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