Ajab Gajab News: भारत में अलग-अलग जगहों पर तरह-तरह की परंपराएं निभाई जाती हैं। इनमें से कुछ परंपराएं ऐसी होती हैं, जिनके बारे में जानकर लोगों को यकीन करना मुश्किल हो जाता है। इसी क्रम में आज हम आपको ऐसी ही एक परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जो राजस्थान के भीलवाड़ा जिला में आने वाले एक गांव में निभाई जाती है। यह परंपरा दिवाली के बाद निभाई जाती है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दिवाली के बाद इस गांव में गधों की पूजा की जाती है।
प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार- iStock)
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राजस्थान के गांव में गधों की पूजा
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गधों की पूजा करने के लिए सबसे पहले उन्हें सजाया जाता है। जिस प्रकार किसान बैल की पूजा करते हैं, ठीक उसी तरह इस गांव में गधों की पूजा की जाती है। भीलवाड़ा के जिस गांव में गधों की पूजा की जाती है, उसका नाम मांडल कस्बा है। यहां के रहने वाले कुम्हार जाति के लोग वर्षों से गधों के पूजन की परंपरा निभा रहे हैं। वह सदियों से इस परंपरा का पालन कर रहे हैं। गांव के लोगों का कहना है कि जब आवागमन और माल परिवहन का साधन नहीं था, तब गधों पर लादकर सामान का परिवहन किया जाता था। उसी समय यह अनोखी परंपरा शुरू हुई थी।
गधों की दौड़ का भी होता है आयोजन
गांव के लोग मानते हैं कि गधे ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन थे। वह गधों पर ही तालाब से मिट्टी ढोकर लाते थे। इस मिट्टी का उपयोग बर्तन बनाने में किया जाता था। गधों की सेवा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए कुम्हार समाज के लोगों ने यह परंपरा शुरू की। गांव में हर साल दिवाली के अगले दिन यह परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान मांडल कस्बे में आस-पास के गांवों के लोग इकट्ठा होते हैं और गधों की अर्चना करते हैं। इस दौरान गधों को सजाकर उन्हें विभिन्न पकवान खिलाए जाते हैं। फिर ‘गधों की दौड़’ का आयोजन किया जाता है। जिसे 'भड़काया' कहते हैं।
