RBI on UPI OTP: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शुक्रवार को UPI ट्रांजेक्शन से जुड़े नियमों में कई बदलाव का ऐलान किया है। रिजर्व बैंक ने टू फैक्टर एडिशनल ऑथेंटिकेशन (AFA) के बिना यूपीआई से ऑटो पेमेंट की लिमिट को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। रिजर्व बैंक की घोषणा के अनुसार, एक लाख रुपये तक के भुगतान के लिए किसी वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आधारित वेरिफिकेशन की आवश्यकता नहीं होगी। यह नई लिमिट केवल म्यूचुअल फंड सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम सब्सक्रिप्शन और क्रेडिट कार्ड रीपेमेंट के लिए लागू होगी। मौजूदा समय में ओटीपी-आधारित एएफए तब लागू होता है जब यूपीआई के जरिए ऑटो पेमेंट होता है।
जुर्माना देने से बच जाएंगे
UPI ऑटो पेमेंट से कई फायदे होंगे। ऑटो पेमेंट के जरिए आपका कोई भी बिल आसानी से जमा हो जाएगा। वरना कई बार बिल का भुगतान करना हम भूल जाते हैं, जिसकी वजह से जुर्माना भरना पड़ सकता है। इसके अलावा आप आसानी से कैशलेस तरीके से पेमेंट कर पाएंगे। इसके अलावा अगर आप किसी पेमेंट को ऑटो डेबिट बंद करना चाहते हैं, तो इसकी भी सुविधा उपलब्ध है। यूपीआई के जरिए किसी भी तरह के पेपर वर्क की जरूरत नहीं पड़ती है।
इस व्यवस्था में वेरिफिकेशन की अतिरिक्त व्यवस्था के बिना ग्राहकों के खाते से सीधे पैसा लेने की सीमा वर्तमान में 15,000 रुपये है। इससे ऊपर के भुगतान के लिए वेरिफिकेशन की अतिरिक्त व्यवस्था की जरूरत पड़ती है।
अस्पतालों और स्कूलों की फीस
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि अलग-अलग कैटेगरी में यूपीआई के जरिए लेनदेन की लिमिट की समय-समय पर समीक्षा की गई है। अब अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को भुगतान के लिए यूपीआई के जरिए लेनदेन की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये प्रति लेनदेन करने का प्रस्ताव है।
उन्होंने कहा कि इससे उपभोक्ताओं को शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल उद्देश्यों के लिए अधिक राशि का यूपीआई के जरिए पेमेंट करने में मदद मिलेगी। म्यूचुअल फंड सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम सब्सक्रिप्शन और क्रेडिट कार्ड भुगतान के लिए लिमिट लाख रुपये तक बढ़ा दी गई है। नवंबर 2023 में यूपीआई ट्रांजेक्शन ने 17.4 लाख करोड़ रुपये का नया रिकॉर्ड बनाया और 11 बिलियन वॉल्यूम संख्या को पार कर लिया।
