Banana Peel Fertilizer : बारिश का मौसम पेड़-पौधों और गार्डनिंग के शौकीनों के लिए सबसे बेहतरीन समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने घरों की छतों, बालकनी और बगीचों में नए-नए पौधे लगाते हैं और उनकी अच्छी ग्रोथ के लिए तरह-तरह की महंगी खादों का इस्तेमाल करते हैं। दूसरी ओर, इस मौसम में बाजार में केले की भरपूर बिक्री होती है। अक्सर लोग केला खाने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझकर कचरे में फेंक देते हैं। हालांकि, ये साधारण से दिखने वाले छिलके आपके घर के पौधों के लिए किसी नेचुरल टॉनिक और संजीवनी से कम नहीं हैं। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर ये छिलके न सिर्फ आपके पौधों को हरा-भरा रखेंगे, बल्कि बाजार से केमिकल वाली महंगी खाद खरीदने के खर्च को भी बचाएंगे।
केले के छिलके से बनाएं पौधों के लिए 'सुपर खाद'
पोषक तत्वों का खजाना हैं केले के छिलके
केले के छिलके में पोटैशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पौधों के समग्र विकास के लिए बेहद मददगार माने जाते हैं। इसमें मौजूद पोटैशियम पौधों की जड़ों को गहराई से मजबूत बनाता है, उनमें बीमारियां और कीट लगने की संभावना को कम करता है और फूल-फल आने की प्रक्रिया को तेज करता है। यही कारण है कि ऑर्गेनिक गार्डनिंग करने वाले लोग केले के छिलकों को फेंकने के बजाय उनका फर्टिलाइजर बनाना पसंद करते हैं। इससे किचन वेस्ट का भी सही निपटारा हो जाता है और पौधों को पूरी तरह से प्राकृतिक पोषण मिलता है।
घर पर ऐसे बनाएं लिक्विड फर्टिलाइजर
केले के छिलकों से घर पर ही लिक्विड फर्टिलाइजर तैयार करना बेहद आसान और किफायती प्रक्रिया है। इसके लिए सबसे पहले 3 से 4 केले के छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। फिर इन्हें किसी प्लास्टिक या कांच के बर्तन में रखकर करीब एक से डेढ़ लीटर पानी में पूरी तरह डुबो दें। इसके बाद बर्तन को ढककर 3 से 5 दिनों के लिए किसी ठंडी और छायादार जगह पर रख दें। इस समय के दौरान छिलकों के सभी पोषक तत्व धीरे-धीरे पानी में घुल जाते हैं। 5 दिन बाद इस पानी को अच्छी तरह छान लें। ध्यान रखें कि इस तैयार घोल को सीधे पौधों में डालने के बजाय इसमें बराबर मात्रा में सादा पानी मिला लें, जिससे फर्टिलाइजर कॉन्सेंट्रेडेट न रहे और पौधों की जड़ों को संतुलित मात्रा में पोषण मिल सके।
इस्तेमाल करने का सही तरीका और सावधानियां
तैयार लिक्विड फर्टिलाइजर को सप्ताह में केवल एक बार ही पौधों की जड़ों के पास मिट्टी में डालना चाहिए। इसे पत्तियों पर छिड़कने के बजाय सीधे मिट्टी में देना ज्यादा फायदेमंद होता है। गुलाब, गुड़हल, मनी प्लांट, टमाटर, मिर्च और बैंगन जैसे फूल-सब्जियों वाले पौधों में इसका असर काफी तेजी से दिखाई देता है। हालांकि, इस्तेमाल से पहले यह ध्यान रखें कि गमले की मिट्टी बहुत अधिक गीली न हो। इसके अलावा छिलकों को सुखाकर उनका पाउडर बनाकर भी मिट्टी में मिलाया जा सकता है। किसी भी देसी या जैविक खाद का असर धीरे-धीरे दिखता है, इसलिए नियमित और संतुलित उपयोग के साथ-साथ पौधों को सही धूप और पानी देना भी उतना ही जरूरी है।
