Home Loan Tips: घर खरीदना हर किसी का सपना होता है। आजकल घर खरीदने के लिए ज्यादातर लोन लेने को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन बिना सही जानकारी के लिया गया होम लोन इस सपने को बोझ में बदल सकता है। अक्सर लोग जल्दबाजी में लोन ले लेते हैं और बाद में ज्यादा ब्याज, कम अमाउंट या ज्यादा किस्त (ईएमआई) की वजह से परेशान होते हैं। अगर आप भी होम लोन लेने की सोच रहे हैं, तो कुछ अहम बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
होम लोन लेने से पहले आपको ये 4 सबसे जरूरी बातें जान लेना चाहिए ताकि आपके ऊपर आर्थिक बोझ न पड़े। (फोटो साभार- istock)
1. ब्याज दर और चार्जेस को लेकर न बनाएं भ्रम
होम लोन लेने से पहले सबसे जरूरी है कि आप ब्याज दर को अच्छी तरह समझें। फ्लोटिंग रेट और फिक्स्ड रेट में क्या अंतर है, इसका विश्लेषण करें क्योंकि लंबे समय में यही आपकी कुल लागत को तय करता है। साथ ही प्रोसेसिंग फीस, फोरक्लोजर चार्ज और अन्य हिडन चार्जेस को लेकर भी पूरी पारदर्शिता जरूरी है। कम EMI के लालच में न पड़ें क्योंकि इससे आपको ब्याज अधिक देना पड़ सकता है।
2. लोन अमाउंट की सीमा को लेकर रहें स्पष्ट
कई बार लोग सोचते हैं कि उन्हें पूरी प्रॉपर्टी की कीमत का लोन मिल जाएगा, जबकि हकीकत इससे अलग होती है। आमतौर पर बैंक प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 75% से 90% तक ही लोन देते हैं। बाकी रकम डाउन पेमेंट के रूप में आपको खुद से देनी होती है। उदाहरण के दौर पर यदि आपकी प्रॉपर्टी की कीमत 30 लाख रुपये है तो बैंक आपको 25-26 लाख रुपये का ही लोन देता है। बाकी की रकम आपको ही जुटानी होती है। अगर आपको यह अंदाजा पहले से नहीं होता, तो अचानक रकम जुटाना मुश्किल हो सकता है।
3. जरूरत से कम लोन मिले तो अपनाएं ये उपाय
अगर बैंक आपकी आवश्यकता से कम लोन अमाउंट पास करता है, तो घबराएं नहीं। आप अपने जीवनसाथी या किसी अन्य परिजन को को-एप्लीकेंट बनाकर लोन अमाउंट बढ़वा सकते हैं। इससे न सिर्फ आपको अधिक लोन मिलेगा, बल्कि लोन अप्रूवल में भी आसानी होगी। लोन लेने से पहले पात्रता की सही गणना के लिए हाउसिंग लोन कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
4. EMI तय करने में न करें जल्दबाजी
EMI यानी मासिक किस्त आपकी मासिक आय और खर्चों पर सीधा असर डालती है। कम EMI अच्छी लग सकती है, लेकिन इससे लोन अवधि और कुल ब्याज दोनों बढ़ जाते हैं। बेहतर यही होगा कि आप अपने खर्चों का मूल्यांकन करके संतुलित EMI चुनें ताकि लोन भुगतान के दौरान कोई आर्थिक दबाव न बने।
