Uttarakhand Treks: अगर आप पहाड़ों के दीवाने हैं, और ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहां बादल नीचे हों और सूरज आपके सामने उगता दिखे, तो उत्तराखंड का ये ट्रेक आपके लिए किसी सपने से कम नहीं है। आज हम आपको बताएंगे चंद्रशिला के बारे में जो सिर्फ एक ट्रेक नहीं, बल्कि एक अनुभव है। चंद्रशिला ट्रेक (Chandrashila Trek) इसलिए भी खास है क्योंकि इसे बड़े आराम से सिर्फ 2 दिनों में पूरा किया जा सकता है। यानी कम समय में पूरा एडवेंचर, वो भी जबरदस्त नजारों के साथ।
उत्तराखंड की वादियों में छुपा चंद्रशिला ट्रेक
चंद्रशिला ट्रेक आखिर है क्या?
चंद्रशिला का मतलब होता है चांद की चोटी। यह तुंगनाथ मंदिर के ऊपर स्थित एक ऊंची चोटी है, जो लगभग 13,000 फीट से भी ज्यादा की ऊंचाई पर है। यहां पहुंचकर ऐसा लगता है जैसे आप बादलों के ऊपर खड़े हैं। इस ट्रेक की शुरुआत होती है चोपता नाम की जगह से होती है जिसे लोग मिनी स्विट्जरलैंड भी कहते हैं।
चोपता तक पहुंचना ही अपने आप में एक खूबसूरत सफर है। रास्ते में हरे-भरे जंगल, घुमावदार सड़कें और दूर-दूर तक फैली घाटियां आपको लगातार रोमांच में रखती हैं। चोपता पहुंचकर जैसे ही आप ठंडी हवा महसूस करते हैं, समझ आ जाता है कि अब असली पहाड़ी सफर शुरू होने वाला है।
चंद्रशिला ट्रेक जहां हर कोने से दिखती है जन्नत
सिर्फ एक दिन में पूरा करें ट्रेक
पहला पड़ाव 3.5 से 4 किलोमीटर का होता है, जो आपको चोपता से तुंगनाथ मंदिर तक ले जाता है। तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। यहां पहुंचकर मन को एक अलग ही शांति मिलती है। तुंगनाथ मंदिर तक की यात्रा ना ज्यादा कठिन है और ना ज्यादा आसान। अनुभवी और शुरुआती दोनों ट्रेकर्स के लिए ये यात्रा परफेक्ट है। चोपता नामक स्थान से ये यात्रा शुरू होती है। अगर आप पहली बार ट्रेकिंग कर रहे हैं तो भी रुकते-रुकाते आप 2 से 3 घंटें में चोपता से तुंगनाथ पहुंच जाएंगे। रास्ते में छोटे-छोटे ढाबे, घोड़े और लकड़ी के घर मिलते हैं।
चंद्रशिला चोटी की असली जर्नी
तुंगनाथ पहुंचने के बाद आपको कुछ कदम दूरी पर ही चंद्रशिला दिखने लगेगा लेकिन, यकीन मानें ये आंखों का धोखा है। कहने को तो चंद्रशिला की तुंगनाथ से दूरी तकरीबन 1.5 किलोमीटर है लेकिन, तुंगनाथ के मुकाबले ये यात्रा ज्यादा कठिन है। एक-एक कदम चलते हुए आपके मन से ये आवाज आ सकती है भाई कितना दूर और बचा है।
यहां रास्ता पत्थरों और बर्फ से भरा हो सकता है। जैसे-जैसे आप ऊपर बढ़ते हैं आपका उत्साह भी बढ़ता जाता है। और फिर जब आप चंद्रशिला की चोटी पर पहुंचते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे पूरी दुनिया आपके पैरों के नीचे है। अगर आप सुबह-सुबह चंद्रशिला पहुंच जाएं तो सूर्योदय का नजारा जिंदगी का सबसे यादगार पल होगा। जैसे ही सूरज की पहली किरणें हिमालय की बर्फीली चोटियों पर पड़ती हैं, पूरा आसमान सुनहरा और गुलाबी हो जाता है।
चंद्रशिला चोटी की असली जर्नी
चंद्रशिला ट्रेक से जुड़ी 5 जरूरी बातें
अगर आप चंद्रशिला ट्रेक पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सही तैयारी के साथ यह ट्रिप ना सिर्फ आसान बन जाती है बल्कि मजा भी दोगुना हो जाता है। चाहे आप दोस्तों, परिवार या फिर सोलो ट्रिप पर जा रहे हों, छोटी-छोटी चीजें आपकी पूरी यात्रा को शानदार बना सकती हैं। अगर आप इन जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे, तो चंद्रशिला का रोमांच और खूबसूरत नजारे जिंदगीभर याद रहेंगे।1- चंद्रशिला ट्रेक की कठिनाई: यह ट्रेक मॉडरेट लेवल का माना जाता है। शुरुआती लोग भी इसे कर सकते हैं, लेकिन अंतिम चढ़ाई काफी खड़ी और फिसलन भरी होती है, खासकर बर्फ के समय।
2- चंद्रशिला ट्रेक जाने का सबसे अच्छा समय: चंद्रशिला ट्रेक के लिए दो सीजन सबसे अच्छे हैं। साफ मौसम और हरियाली का मजा लेना चाहते हैं तो अप्रैल से जून के बीच यात्रा करें। साफ आसमान और हिमालय का बेहतरीन व्यू मानसून के बाद सितंबर से नवंबर के बीच आपको देखने को मिलेगा।
3- चंद्रशिला ट्रेक जाने से पहले कैसे करें तैयारी: ट्रेक शुरू करने से पहले कम से कम 1 हफ्ते की वॉकिंग या कार्डियो प्रैक्टिस जरूर कर लें। अच्छे ग्रिप वाले ट्रेकिंग शूज, गर्म कपड़े (खासकर ठंड के समय), पानी और एनर्जी स्नैक्स ये सब साथ रखना बहुत जरूरी है।
4- चंद्रशिला ट्रेक का मौसम: हिमालयी मौसम कभी भी बदल सकता है, इसलिए हमेशा मौसम की अपडेट चेक करें। बारिश या भारी बर्फ में भूलकर भी ट्रेक ना करें। बिना गाइड के भी आसानी से आप यात्रा कर सकते हैं।
5- चंद्रशिला ट्रेक के आसपास खाने-पीने और रहने की व्यवस्था: चोपता में छोटे-छोटे गेस्ट हाउस और होमस्टे मिल जाते हैं। तुंगनाथ के रास्ते में भी छोटे ढाबे होते हैं, लेकिन ऊपर चंद्रशिला पर कोई सुविधा नहीं होती, इसलिए सब कुछ पहले से तैयार रखना जरूरी है।
चंद्रशिला ट्रेक से जुड़ी जरूरी बातें
चंद्रशिला ट्रेक तक कैसे पहुंचें
चंद्रशिला ट्रेक करने का प्लान बना रहे हैं तो सबसे आसान तरीका है सड़क मार्ग से सफर करना। इसके लिए सबसे पहले आपको ऋषिकेश पहुंचना होता है, जो उत्तराखंड का एक बड़ा ट्रैवल हब है और जहां से आगे पहाड़ों की असली यात्रा शुरू होती है। ऋषिकेश से आगे का सफर आप उखीमठ होते हुए कर सकते हो। उखीमठ एक छोटा सा कस्बा है, जहां से आपको पहाड़ी रास्तों का असली अनुभव मिलने लगता है। यहां से आगे बढ़ते हुए आप सीधे चोपता गांव पहुंचते हैं।
चोपता के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि यहां तक कोई सीधी बस सेवा नहीं चलती। इसलिए आपको या तो अपनी निजी गाड़ी ले जानी होगी या फिर टैक्सी बुक करनी होगी। कई लोग ऋषिकेश या रुद्रप्रयाग से शेयर टैक्सी लेकर भी चोपता पहुंचते हैं, जो थोड़ा सस्ता विकल्प होता है।
अगर आप दिल्ली से निकल रहे हो तो चोपता पहुंचने में आपको आराम से 10 से 11 घंटे का समय लग सकता है। यह पूरा रास्ता मैदानी इलाकों से शुरू होकर धीरे-धीरे पहाड़ों में बदल जाता है, जिससे सफर और भी रोमांचक हो जाता है। चोपता पहुंचने के बाद ही ट्रेक की असली शुरुआत होती है।
