Travel Trend: दुनियाभर में घूमने-फिरने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। लोग छुट्टियां तो लेते हैं, लेकिन अब छुट्टियां पहले जैसी सुकूनभरी नहीं रही है। घूमने-फिरने के दौरान भी कई बार आपको ऐसा लग सकता है कि ऑफिस की टू-डू लिस्ट की जगह ट्रैवल की टू-डू लिस्ट ने ले ली है। सुबह से शाम तक कौन-सी जगह देखनी है, कहां फोटो लेनी है, क्या खाना है और क्या-क्या एक्सप्लोर करना है, इसी भागदौड़ में छुट्टी भी थका देती है। इसी बीच एक नया ट्रैवल ट्रेंड लोगों को खूब पसंद आ रहा है, जिसका नाम है डस्किंग (Dusking)।
क्या है डस्किंग
डस्किंग का मतलब बहुत आसान है। धीरे चलिए और सूर्यास्त का आनंद लीजिए। इस ट्रेंड में आपको किसी लंबी चेकलिस्ट को पूरा नहीं करना होता। ना ही हर घंटे कुछ नया देखने या करने का दबाव होता है। बस दिन को आराम से बिताइए और शाम होते ही किसी खूबसूरत जगह पर जाकर डूबते सूरज को निहारिए।
डस्किंग का सबसे अहम नियम है कि उस समय मोबाइल फोन और बाकी डिजिटल चीजों से दूरी बनाई जाए। यानी ना लगातार फोटो खींचने की चिंता और ना ही सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की जल्दबाजी। डस्किंग का मकसद सिर्फ उस पल को महसूस करना है।
लोग क्यों पसंद कर रहे हैं डस्किंग
यह ट्रेंड लोगों को यह याद दिलाता है कि हर दिन को उपलब्धियों की लिस्ट के साथ खत्म करना जरूरी नहीं है। छुट्टियों का असली मकसद खुद को आराम देना और मानसिक शांति पाना है। जब आप बिना किसी जल्दबाजी के सिर्फ आसमान के बदलते रंग, ठंडी हवा और डूबते सूरज को देखते हैं, तो मन अपने आप शांत होने लगता है। यह एक तरह का डिजिटल डिटॉक्स भी है, जो दिमाग को तरोताजा कर देता है।
लोग पसंद कर रहे हैं डस्किंग (फोटो: canva)
डस्किंग को लेकर क्यों है इतना क्रेज
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में असली आराम या कुछ देर की शांति भी लोगों को अजीब लगने लगी है। जरा सोचिए, कितनी बार ऐसा हुआ है कि छुट्टियों पर होने के बावजूद आपको लगा हो कि दिन बेकार चला गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि आप किसी मशहूर जगह पर नहीं जा पाए या सोशल मीडिया पर दिखने वाली किसी लोकप्रिय लोकेशन तक नहीं पहुंच सके?
आपको ये समझना होगा कि अगर ऑफिस की भागदौड़, डेडलाइन और लगातार काम के दबाव ने आपको मानसिक और शारीरिक रूप से थका दिया है, तो आपकी छुट्टियों का मकसद खुद को और ज्यादा व्यस्त रखना नहीं होना चाहिए। छुट्टियां इस बात को साबित करने का जरिया नहीं हैं कि आप एक दिन में कितनी जगहें घूम सकते हैं। बल्कि यह वह समय है जब आप खुद को फिर से तरोताजा कर सकते हैं, अपनी ऊर्जा वापस पा सकते हैं और मन को सुकून दे सकते हैं।
यही वजह है कि डस्किंग जैसे ट्रेंड लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। इसमें आपको कुछ हासिल करने, कहीं पहुंचने या किसी चेकलिस्ट को पूरा करने की जरूरत नहीं होती। आप बस रुकते हैं, आराम करते हैं और प्रकृति के एक खूबसूरत पल जैसे- सूर्यास्त का आनंद लेते हैं।
डस्किंग को लेकर बढ़ रहा है क्रेज (फोटो: canva)
भारत की 5 बेहतरीन जगहें जहां ले सकते हैं डस्किंग का मजा
1- उदयपुर (राजस्थान): पिछोला झील के किनारे बैठकर डूबते सूरज का नजारा आप देख सकते हैं। झील में पड़ती सुनहरी रोशनी शानदार छुट्टी के लिए परफेक्ट माहौल बनाती है।
2- वर्कला (केरल): यहां का माहौल शांत है और किसी भी अन्य हिल स्टेशन की तुलना में आपको यहां कम भीड़ मिलेगी। यहां अरब सागर के किनारे ऊंची चट्टानों से सूर्यास्त देखना एक यादगार अनुभव होता है।
3- मुन्नार (केरल): यहां की ठंडी हवा और हरियाली तनाव दूर करने का काम करती है। यहां चाय बागानों और पहाड़ियों के बीच ढलती शाम डस्किंग के लिए परफेक्ट माहौल प्रदान करती है।
4- कोडईकनाल (तमिलनाडु): अगर आप तमिलनाडु में कम भीड़ वाली जगह की तलाश में हैं तो कोडईकनाल आपके लिए परफेक्ट है। यहां बादलों से घिरी पहाड़ियां और शांत झीलें डस्किंग के लिए शानदार माहौल देती हैं।
5- दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल): पहाड़ों के बीच बदलते रंगों वाला आसमान देखना अपने आप में खूबसूरत अनुभव होता है। यात्रा के दौरान यहां चाय की चुस्की के साथ डस्किंग का मजा दोगुना हो जाता है।
डस्किंग का मजा (फोटो: canva)
डस्किंग के लिए याद रखें ये 3 बातें
1-सूर्यास्त के समय मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम करें।
2- किसी चेकलिस्ट को पूरा करने के बजाय उस पल को महसूस करें।
3- शांत जगह चुनें, जहां प्रकृति की आवाजें सुनाई दें।
'डस्किंग' ट्रेंड हमारे शरीर और दिमाग को लगातार मिलने वाले तनाव से थोड़ी राहत देने का तरीका है। शायद यही वजह है कि आज की तेज रफ्तार दुनिया में डस्किंग सिर्फ एक ट्रैवल ट्रेंड नहीं, बल्कि मानसिक शांति पाने का एक नया तरीका बनता जा रहा है। डस्किंग हमें यही सिखाता है कि हर पल को किसी उपलब्धि से जोड़ना जरूरी नहीं है बिना किसी तनाव के हमारा दिमाग और शरीर दोनों आराम महसूस कर सकते हैं।
