ना ट्रेन थी ना गाड़ी, जब एक कलमकार ने पैरों से माप लिया था हिमालय, 135 साल पुरानी कहानी

Himalaya Travel: घूमने का दिल तो करता है लेकिन मन कोई ना कोई बहाना बताकर आपके प्लान को कैंसिल करवा देता है तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है। आज हम आपको एक ऐसे नाम से परिचित कराने जा रहे हैं जिन्होंने 1890 में बिना किसी आधुनिक सुविधा के पैदल हिमालय की यात्रा करने के साथ ही यात्रा वृत्तांत भी लिखा था।

Travel Stories: 'सड़क पर पहुंचकर, हमें चारों तरफ झरने और नदियां दिखाई दीं, जिससे साफ जाहिर था कि रात में जोरदार बारिश हुई है।' ये लाइन पढ़कर आपके मन में भी घटना की खूबसूरत तस्वीर साफ-साफ बन गई होगी। ये जादू है बंगाली साहित्यकार, कवि और एक साहसी यात्री जलधर सेन का जिन्होंने 1890 में, पवित्र हिमालय पर्वत की ओर एक अद्भुत और साहसिक यात्रा की थी जिसे जानकर आप भी ट्रैवल पर जाने के लिए मोटिवेट हो सकते हैं। पहले के जमाने में यात्रा करना आज की तुलना में बेहद कठिन और जोखिम भरा होता था ऐसे में हिमालय की यात्रा के बारे में शायद ही कोई सोच भी सकता हो। जलधर सेन ने यात्रा के दौरान देखे हुए नजारों, लोगों और संस्कृति का बेहद मार्मिक और सजीव चित्रण किया था जिसे पढ़कर आपको ऐसा लगेगा कि मानो घटना आपकी आंखों के सामने ही घट रही हो। पुराने युग की झलक उनकी लेखनी में साफ देखने को मिलती है।

जलधर सेन की हिमालय यात्रा के चुनिंदा अंश

हिमालय की पहली झलक का वर्णन करते हुए उन्होंने लिखा, 'जैसे ही मैं पहाड़ियों की ओर बढ़ा, हवा में एक अनोखा ठंडापन और शांति महसूस होने लगी। सूर्य की पहली किरणें हिमालय की चोटियों को सुनहरा रंग दे रही थीं। यह नजारा देखते ही मन विस्मित हो उठा।'

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