Slow Travel Experience: सोशल मीडिया के दौर में इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर रील्स के माध्यम से आपने तमाम लोगों को घूमते-फिरते देखा ही होगा। रील्स देखकर आपका भी घूमने का मन हुआ ही होगा या आपने भी घूमने का प्लान किया होगा। यात्रा करने से पहले यात्रा क्या होती है ये जानना बेहद जरूरी है। उदाहरण के माध्यम से इसे समझने की कोशिश करते हैं। जैसे- आपने ऋषिकेश घूमने का प्लान किया फिर ऋषिकेश गए राफ्टिंग की, गंगा आरती में शामिल हुए, लक्ष्मण झूला और राम झूला देखा, बंजी जंपिंग की और घर वापस आ गए और ऋषिकेश की यात्रा समाप्त हुई।
सुकून के करीब तलाशिए अपना ठिकाना
यात्रा का सही मतलब
जब भी आप किसी जगह घूमने का प्लान करें तो सिर्फ फेमस जगहों पर ही घूमकर वापस मत लौट आइए। कोशिश करें ऐसी जगहों पर जाने की जहां ज्यादा लोग न आते हों। स्थानीय लोगों से मिले, होटल की जगह होमस्टे का चुनाव करें। शांत जगहों पर खुद के साथ समय बिताएं, एडवेंचर एक्टिविटी का हिस्सा बनें, ट्रेक करें और कुछ ऐसी यादें लेकर आएं जो जीवन भर आपके साथ रहे। हर बार घूमने जाने से पहले खुद से ये सवाल करें कि ये यात्रा आपके जीवन में क्या बदलाव करने वाली है।
टूरिस्ट नहीं ट्रैवलर बनिए इस बात को अपने जीवन में उतार लें। ऐसे में अगली बार जब आप ऋषिकेश जाने का प्लान करें तो- नीर गढ़ झरने तक ट्रेक करें, आश्रमों में योग, ध्यान और आध्यात्मिक रिट्रीट का अनुभव लें। गंगा किनारे कैंपिंग, रात में तारों को देखना और बोनफायर के साथ समय बिताएं जो आपकी ट्रिप को खास बना देगी।
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नेचर के करीब जाने का बढ़ रहा है ट्रेंड
रील्स देखकर ज्यादा प्लानिंग ने करें बल्कि ऐसी जगह की तलाश करें जहां मोबाइल और काम की दुनिया से थोड़ा ब्रेक मिल सके। जंगलों के बीच रहना, झीलों के किनारे समय बिताना और प्रकृति को करीब से महसूस करना ये कुछ बातें हैं जिनका ध्यान रखें। घूमने का मतलब सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि अपने मन को भी एक नई ऊर्जा देना है।
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सफर जो आपको खुद से मिलाए
ध्यान रहे कि एक अच्छा सफर आपको दोबारा खुद से जोड़ सकता है। नई चीजें सीखना और नई संस्कृति को समझना जीवन को एक अलग नजरिया देता है। टूरिस्ट बनकर नहीं, बल्कि एक ट्रैवलर की तरह निकलें। ऐसी जगह चुनें जहां सिर्फ आंखों को खूबसूरती नहीं, बल्कि दिल को भी सुकून मिले।
