Ladakh Snow Leopard: अगर आप लद्दाख घूमने का प्लान कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। ज्यादातर लोग लद्दाख की यात्रा एडवेंचर, ऊंचे पहाड़, खूबसूरत झीलें और बर्फीली वादियां ही देखने के लिए करते थे लेकिन अब आपको यहां दुर्लभ स्नो लेपर्ड यानी हिम तेंदुए को देखने का मौका भी मिल सकता है। लद्दाख में भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड यानी ऊंचाई वाले इलाके की वन्यजीव सफारी शुरू करने की तैयारी की गई है। यह सफारी (Snow Leopard Safari) करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर होगी और इसका सबसे बड़ा आकर्षण स्नो लेपर्ड होगा। लद्दाख प्रशासन की इस पहल का मकसद केवल पर्यटकों को रोमांचक अनुभव देना नहीं है, बल्कि वन्यजीवों और खासकर स्नो लेपर्ड के संरक्षण को बढ़ावा देना भी है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़कर उनकी कमाई बढ़ाने की कोशिश भी की जाएगी।
स्नो लेपर्ड सफारी
किन इलाकों में होगी स्नो लेपर्ड सफारी
जहां वन्यजीवों की अच्छी संख्या है ऐसे इलाकों की पहचान की जा रही है। हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य और कराकोरम वन्यजीव अभयारण्य इस लिस्ट में टॉप पर हैं। इसके अलावा नुब्रा, जांस्कर, शम, कारगिल और द्रास जैसे इलाके भी इस योजना में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
कैसी होगी स्नो लेपर्ड सफारी
लद्दाख की यह सफारी काजीरंगा या रणथंभौर की जीप सफारी जैसी हो सकती है। खुली जीपों में आपको वन्यजीव क्षेत्रों तक ले जाया जाएगा। पर्यटकों का अनुभव शानदार हो सके इसके लिए स्थानीय समुदाय के लोग भी मदद करेंगे और उन्हें आसपास पाए जाने वाले वन्यजीवों और पक्षियों के बारे में जानकारी देंगे। हालांकि स्नो लेपर्ड को देखना आसान नहीं होगा। यह बेहद शर्मीला और रहस्यमयी जानवर है, जो ऊंचे पहाड़ी इलाकों में चट्टानों और बर्फ के बीच छिपकर रहता है। इसलिए सफारी के दौरान इसे देखना अपने आप में एक रोमांचक अनुभव होगा।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: गुफा के भीतर विराजमान हैं भगवान शिव, जानिए क्यों खास है श्री केशवनाथेश्वर मंदिर की यात्रा
स्थानीय युवाओं को भी मिलेगा फायदा
इस योजना में स्थानीय लोगों को भी शामिल किया जा रहा है। करीब 20 स्थानीय युवाओं को पक्षियों की पहचान और उनकी निगरानी के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा अलग-अलग महत्वपूर्ण जगहों पर करीब 10 नए बर्डवॉचिंग हाइड बनाए जाने की योजना है। इससे पक्षियों को देखने में रुचि रखने वाले पर्यटकों को भी बेहतर अनुभव मिलेगा। इस पहल से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। वे सफारी गाइड, ड्राइवर और वन्यजीव विशेषज्ञों की सहायता जैसे कामों से जुड़ सकते हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़े: भारत में बढ़ रहा है Second City Tourism का ट्रेंड, जानें क्यों बदल रही है घूमने की सोच
लद्दाख में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं स्नो लेपर्ड
लद्दाख स्नो लेपर्ड के लिए भारत के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में पाए जाने वाले करीब 718 स्नो लेपर्ड में से लगभग 477 लद्दाख में हैं। लद्दाख की जैव विविधता भी काफी समृद्ध है। यहां 38 से ज्यादा स्तनधारी प्रजातियां, करीब 340 पक्षी प्रजातियां और लगभग 1,800 वनस्पति प्रजातियां पाई जाती हैं। यही वजह है कि लद्दाख को वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से बेहद खास माना जाता है।
