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EXPLAINER: ऐप्स की जगह अब 'इंटेंट' का दौर! जानिए AI एजेंट्स कैसे बदलेंगे आपके स्मार्टफोन का इस्तेमाल

सिर्फ अपनी जरूरत बतानी होगी और AI तय करेगा कि कौन-सी सर्विस, किस प्लेटफॉर्म और किस तरीके से सबसे बेहतर परिणाम दे सकती है यानी आने वाले वर्षों में स्मार्टफोन का अनुभव 'Tap to Open' से बदलकर 'Ask to Get Things Done' का हो सकता है।

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AI-First फोन में आज की तरह दर्जनों ऐप आइकन नहीं होंगे। Photo-AI
Authored by: Pradeep Pandey
Updated Aug 4, 2026, 14:35 IST
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स्मार्टफोन की दुनिया पिछले लगभग 20 वर्षों से एक ही मॉडल पर चल रही है। टैक्सी बुक करनी हो, खाना ऑर्डर करना हो, बैंकिंग करनी हो या टिकट बुक करनी हो, हर काम के लिए अलग-अलग ऐप खोलना पड़ता है, लेकिन अब यह तरीका तेजी से बदलने वाला है। AI एजेंट्स और AI-First Smartphone की नई अवधारणा भविष्य में ऐप्स की जरूरत को काफी हद तक खत्म कर सकती है। आने वाले वर्षों में स्मार्टफोन का इस्तेमाल ऐप खोलने के बजाय केवल अपनी जरूरत बताने (Intent) पर आधारित होगा। यानी यूजर सिर्फ बोलेगा कि उसे क्या चाहिए और बाकी का काम AI एजेंट खुद करेगा।

क्या है AI-First Smartphone?

आज के स्मार्टफोन ऐप्स के इर्द-गिर्द बनाए गए हैं। हर कंपनी का अपना ऐप, अपना इंटरफेस और अपना लॉगिन सिस्टम होता है। लेकिन AI-First फोन में पूरा सिस्टम AI एजेंट्स के इर्द-गिर्द काम करेगा। इन स्मार्टफोन्स में छोटे Small Language Models (SLMs) और मल्टीमॉडल AI एजेंट्स फोन के अंदर ही कई काम करेंगे, जबकि जटिल काम क्लाउड या एज कंप्यूटिंग की मदद से पूरे होंगे। इसका उद्देश्य यूजर को अलग-अलग ऐप्स में भटकने से बचाना है।

'Intent Engine' क्या है?

AI-First फोन का सबसे अहम हिस्सा होगा Intent Engine। यह एक ऐसा AI आधारित ऑपरेटिंग लेयर होगा जो यूजर के इरादे (Intent) को समझकर खुद तय करेगा कि कौन-सी सर्विस का इस्तेमाल करना है। उदाहरण के लिए अगर आप कहें, "इस वीकेंड 20 हजार रुपये के अंदर बीच ट्रिप प्लान कर दो और रविवार रात तक घर पहुंचा देना", तो AI एजेंट खुद फ्लाइट, होटल, मौसम, आपके कैलेंडर और बजट की जांच करेगा। फिर सारी बुकिंग एक साथ पूरी करके केवल भुगतान की पुष्टि मांगेगा। आपको किसी ट्रैवल ऐप, होटल ऐप या पेमेंट ऐप को अलग-अलग खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

होम स्क्रीन भी पूरी तरह बदल जाएगी

AI-First फोन में आज की तरह दर्जनों ऐप आइकन नहीं होंगे। उनकी जगह ऐसे विकल्प दिखाई दे सकते हैं जैसे-

  • Plan My Weekend
  • Track Expenses
  • What's in the News?
  • Book Appointment
इन पर टैप करते ही AI एजेंट अलग-अलग सेवाओं को जोड़कर पूरा काम कर देगा।

रोजमर्रा के काम होंगे आसान

हेल्थ मैनेजमेंट- अगर आप कहें, "पिछले कुछ दिनों से नींद पूरी नहीं हो रही, मदद करो", तो AI आपकी स्मार्टवॉच, हेल्थ रिकॉर्ड, दवाइयों और डॉक्टर की उपलब्धता को देखकर सलाह देगा और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की अपॉइंटमेंट भी बुक कर देगा।

बैंकिंग और फाइनेंस- अगर आप कहें, "क्रेडिट कार्ड का बिल भर दो, बाकी पैसे सेविंग्स में डाल दो और खर्च ज्यादा हो तो मुझे बता देना", तो AI एजेंट अलग-अलग बैंकिंग और पेमेंट सेवाओं से जुड़कर पूरा काम कर देगा।

रोजमर्रा के काम होंगे आसान

रोजमर्रा के काम होंगे आसान

हार्डवेयर में भी आएंगे बड़े बदलाव

जब ऐप्स का महत्व कम होगा तो स्मार्टफोन डिजाइन भी बदलेगा।

  • भविष्य के फोन में ज्यादा फोकस होगा
  • बेहतर माइक्रो कैमरा
  • एडवांस सेंसर
  • हेल्थ ट्रैकिंग फीचर्स
  • वॉयस इंटरफेस
  • जेस्चर कंट्रोल
  • एम्बिएंट डिस्प्ले

यानी स्क्रीन अहम रहेगी, लेकिन फोन को कंट्रोल करने का मुख्य तरीका आवाज और AI होगा।

App Store और Play Store पर क्या पड़ेगा असर?

Apple App Store और Google Play Store पिछले कई वर्षों से मोबाइल इकोसिस्टम का सबसे बड़ा बिजनेस मॉडल रहे हैं। कंपनियां ऐप डाउनलोड और डिजिटल खरीदारी पर कमीशन कमाती हैं। लेकिन AI एजेंट्स के दौर में यह मॉडल बदल सकता है।

भविष्य में यूजर ऐप डाउनलोड नहीं करेगा, बल्कि AI एजेंट जरूरत के हिसाब से किसी भी सर्विस से जुड़ जाएगा। ऐसे में कंपनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज उनका API (Application Programming Interface) होगा, ताकि AI एजेंट उनकी सेवा तक आसानी से पहुंच सके।

कंपनियों की रणनीति भी बदलेगी

अब तक कंपनियां सबसे आकर्षक ऐप और बेहतर UI बनाने पर ध्यान देती थीं लेकिन AI एजेंट्स के दौर में सफलता इन बातों पर निर्भर करेगी-

  • तेज सेवा
  • भरोसेमंद API
  • पारदर्शी कीमत
  • बेहतर डेटा गुणवत्ता
  • मजबूत सुरक्षा

यानी भविष्य में कंपनियां Google Search या App Store में ऊपर आने के बजाय इस बात पर काम करेंगी कि AI एजेंट सबसे पहले उनकी सेवा को चुने।

क्या ऐप्स पूरी तरह खत्म हो जाएंगे?

ऐसा नहीं है कि ऐप्स पूरी तरह गायब हो जाएंगे। गेमिंग, वीडियो एडिटिंग, फोटो एडिटिंग और प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों में अलग ऐप्स की जरूरत बनी रहेगी, लेकिन रोजमर्रा के ज्यादातर काम जैसे-

  • ऑनलाइन शॉपिंग
  • बिल भुगतान
  • टिकट बुकिंग
  • खाना ऑर्डर करना
  • अपॉइंटमेंट लेना
  • बैंकिंग
  • न्यूज पढ़ना
इनमें AI एजेंट्स की भूमिका तेजी से बढ़ सकती है।

भविष्य कैसा होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन का अगला बड़ा बदलाव ऐप्स से AI एजेंट्स की ओर होगा। जिस तरह आज इंटरनेट इस्तेमाल करते समय लोग उसके तकनीकी प्रोटोकॉल के बारे में नहीं सोचते, उसी तरह आने वाले समय में लोग ऐप्स के बारे में भी नहीं सोचेंगे।

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