भारत सरकार ने हाल ही में Telegram पर अस्थायी बैन लगाया है। सरकार ने यह फैसला Neet के आगामी एग्जाम को लेकर लिया है, क्योंकि पिछली बार टेलीग्राम से ही पेपर लीक हुए थे। अब टेलीग्राम के सीईओ पावेल दुरोव ने Reliance पर गंभीर आरोप लगाया है। पावेल ने रिलायंस पर टेलीग्राम की पहुंच को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा किया गया है कि रिलायंस की नेटवर्क रूटिंग से जुड़ी एक तकनीक के जरिए भारत के बाहर भी कई देशों में टेलीग्राम यूजर्स को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि इस दावे में जियो का कोई जिक्र नहीं है। ऐसे में यह आरोप रिलायंस कम्युनिकेशन पर लगाए गए हैं।
BGP हाइजैकिंग के जरिए रूट बदलने का आरोप
पावेल ने एक्स पर पोस्ट करके रिलायंस पर BGP (Border Gateway Protocol) हाइजैकिंग का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। BGP इंटरनेट की वह व्यवस्था है जो अलग-अलग नेटवर्क के बीच डेटा के रास्ते तय करती है। आरोप है कि रिलायंस के नेटवर्क (AS18101) से गलत रूट घोषणाएं (unauthorized BGP announcements) की गईं, जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में टेलीग्राम ट्रैफिक सही तरीके से अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाया। इसका असर भारत के बाहर मौजूद कुछ यूजर्स, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे क्षेत्र भी शामिल बताए जा रहे हैं, पर पड़ने का दावा किया गया है।
जानबूझकर किए जाने की आशंका
आरोप लगाने वालों का कहना है कि रिलायंस को इस समस्या की कई बार जानकारी दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से इसे गलती के बजाय जानबूझकर किया गया कदम बताया जा रहा है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और रिलायंस की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देख रहे लोग
कुछ लोगों ने इस मामले को टेलीकॉम और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के बीच प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा है। उनका तर्क है कि रिलायंस का संबंध Meta Platforms से है, जो WhatsApp की पैरेंट कंपनी है। इसी आधार पर सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने दावा किया कि यह टेलीग्राम के खिलाफ प्रतिस्पर्धी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
इंटरनेट रूटिंग सुरक्षा पर उठे सवाल
अगर BGP हाइजैकिंग जैसी घटना वास्तव में होती है, तो यह वैश्विक इंटरनेट सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय मानी जाती है। नेटवर्क ऑपरेटरों को सलाह दी जाती है कि वे अनधिकृत BGP घोषणाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय अपनाएं, ताकि यूजर्स को स्थिर इंटरनेट एक्सेस मिलता रहे। वहीं, टेलीग्राम पर भारत में प्रतिबंध लगाने की कथित लॉबिंग से जोड़ने वाले दावों को भी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है।
NEET पेपर लीक रोकने के लिए Telegram बैन करना समाधान नहीं: पावेल दुरोव
NEET पेपर लीक मामले को लेकर Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर पावेल ने कहा कि Telegram पर बैन लगाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि इससे करोड़ों आम यूजर्स को परेशानी होगी। दुरोव के अनुसार, पेपर लीक जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए सिर्फ किसी एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को बंद करना प्रभावी कदम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बैन के बाद भी ऐसी गतिविधियां दूसरे एप्स पर चली गई हैं और इससे समस्या का समाधान नहीं हुआ।
भारत में Telegram पर अस्थायी रोक
बता दें कि भारत सरकार ने NEET-UG 2026 री-टेस्ट से पहले Telegram पर अस्थायी रोक लगाई। सरकार का कहना था कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मेडिकल प्रवेश परीक्षा के उम्मीदवारों को ठगने और कथित पेपर लीक से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
यह फैसला उस समय लिया गया जब NEET परीक्षा पहले से ही पेपर लीक के आरोपों को लेकर विवादों में थी। आरोपों के बाद बड़ी संख्या में छात्रों के परीक्षा परिणाम रद्द किए गए थे और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।
150 मिलियन से ज्यादा यूजर्स पर असर का दावा
Telegram के संस्थापक ने कहा कि भारत में Telegram के 150 मिलियन से अधिक सामान्य यूजर्स हैं, जिनमें अधिकतर लोग मैसेजिंग, शिक्षा, बिजनेस और सामान्य बातचीत के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। उनके अनुसार, बैन का असर उन आम लोगों पर पड़ेगा जिनका किसी भी गलत गतिविधि से संबंध नहीं है।