दुनियाभर में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ मुकदमों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। Meta, TikTok, YouTube और Snap पर यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालने के आरोप लग रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों के खिलाफ राज्य और संघीय अदालतों में हजारों केस चल रहे हैं।
सोशल मीडिया की लत बनी गूगल और मेटा के गले की फांस, कोर्ट ने दोनों को दिया दोषी करार/Photo-Canva
Meta पर भारी जुर्माना, कोर्ट में अपील की तैयारी
न्यू मेक्सिको में एक जूरी ने Meta को दोषी ठहराते हुए कहा कि कंपनी ने 75,000 से ज्यादा बार राज्य के व्यापार नियमों का उल्लंघन किया। इसके बाद कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया गया। हालांकि, Meta ने इस फैसले को चुनौती देने और अपील करने की बात कही है।
सोशल मीडिया की लत बन रही बड़ी समस्या
एक अध्ययन के मुताबिक, करीब 36% किशोर ऐसे हैं जो लगभग हर समय सोशल मीडिया या वीडियो एप्स का इस्तेमाल करते हैं। YouTube और TikTok सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले प्लेटफॉर्म हैं। एक केस में “Kaley” नाम से पहचानी गई लड़की ने बताया कि उसने 6 साल की उम्र में YouTube और 9 साल की उम्र में Instagram इस्तेमाल करना शुरू किया था और वह इन ऐप्स की आदी हो गई थी।Meta और Google पर मुआवजे का आदेश
अदालत ने Meta और Google को एक पीड़िता को 3 मिलियन डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस राशि में से 70% Meta और 30% YouTube को देना होगा। पीड़िता का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स के फीचर्स ने उसे ऐप्स का आदी बना दिया।
TikTok और Snap ने किया समझौता
इस मामले में TikTok और Snap को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन दोनों कंपनियों ने अदालत के बाहर ही समझौता कर लिया। हालांकि, समझौते की राशि का खुलासा नहीं किया गया है। मार्क जुकरबर्ग और एडम मोसेरी ने कोर्ट में गवाही देते हुए कहा कि उनका मकसद ऐसे प्लेटफॉर्म बनाना है जो लोगों के जीवन में सकारात्मक योगदान दें। वहीं Meta और Google दोनों ने फैसले से असहमति जताई है और इसे चुनौती देने की बात कही है।
शेयर बाजार पर मामूली असर
इस फैसले का कंपनियों के शेयरों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। Meta के शेयर में हल्की बढ़त देखी गई, जबकि Google की पैरेंट कंपनी Alphabet के शेयर में मामूली गिरावट आई। लगातार बढ़ते मुकदमों और आरोपों के बीच सोशल मीडिया कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूजर्स की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। आने वाले समय में इन कंपनियों पर नियम और भी सख्त हो सकते हैं, जिससे डिजिटल दुनिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
