भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन (Satcom) सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े नियम अगले दो महीनों के भीतर तय हो जाएंगे। एक सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। ये नियम Elon Musk की अगुवाई वाली Starlink, Bharti Group समर्थित Eutelsat OneWeb, और Jio SES जैसी कंपनियों के लिए अंतिम बाधा हैं, जिनके बाद वे रेडियो तरंगों (radiowaves) के लिए आवेदन कर सकेंगी और देश में अपनी सेवाओं की शुरुआत कर सकेंगी।
TRAI ने सुझाव दिया है कि Satcom स्पेक्ट्रम को अधिकतम 5 वर्षों के लिए आवंटित किया जा सकता है। (फोटो सोर्स-istock)
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अधिकारी ने कहा, "स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों को तय करने की प्रक्रिया अगले दो महीनों में पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद Satcom सेवाओं पर निर्भर करेगा कि वे कब अपने नेटवर्क का रोलआउट करना चाहती हैं।"
स्पेक्ट्रम की नीलामी होगी या नहीं ?
TRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण) ने सरकार को सलाह दी है कि सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी न की जाए, बल्कि इसे प्रशासनिक प्रक्रिया (administrative process) के तहत आवंटित किया जाए। हालांकि इस प्रस्ताव का Reliance Jio और Bharti Airtel जैसी पारंपरिक टेलीकॉम कंपनियों ने पहले विरोध किया था। TRAI ने सुझाव दिया है कि Satcom स्पेक्ट्रम को अधिकतम 5 वर्षों के लिए आवंटित किया जा सकता है। इसके बाद, बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, सरकार इस अवधि को अतिरिक्त 2 वर्षों तक बढ़ा सकती है।
NGSO सेटेलाइट सेवाओं पर 4% AGR का सुझाव
इसके अलावा, ट्राई ने सुझाव दिया है कि जीएसओ (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) और एनजीएसओ (नॉन-जियोस्टेशनरी ऑर्बिट) आधारित फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विसेज के लिए स्पेक्ट्रम एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) का 4 प्रतिशत तय किया जाए। वनवेब और स्टारलिंक जैसी कंपनियां LEO (लो अर्थ ऑर्बिट) सैटेलाइट्स की कैटेगरी में आती हैं, जिनमें NGSO भी शामिल है। एनजीएसओ आधारित फिक्स्ड सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए ट्राई ने अतिरिक्त शर्त रखी है कि शहरी क्षेत्र में प्रति ग्राहक औसत ₹500 का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। हालाँकि, ग्रामीण और उद्यमियों के लिए इस अतिरिक्त शुल्क से छूट दी गई है।
