भारत सरकार ने रविवार को एपल को बड़ी राहत देते हुए विदेशी कंपनियों को यह अनुमति दे दी कि वे अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को मशीनें उपलब्ध करा सकेंगी, बिना किसी टैक्स जोखिम के। यह छूट खास तौर पर उन क्षेत्रों में लागू होगी, जहां कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित हैं। यह नियम अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
apple gets a big benefit from the budget/Photo-x.com/tim cook
आयकर कानून को लेकर एपल की चिंता
स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ एजेंडे का अहम हिस्सा है। हालांकि, एपल भारत में आयकर कानूनों को लेकर चिंतित था। कंपनी को डर था कि अगर वह अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के लिए मशीनों का भुगतान करती है, तो इसे भारत में ‘बिजनेस कनेक्शन’ माना जा सकता है, जिससे उसकी आईफोन बिक्री से होने वाली कमाई पर टैक्स लगाया जा सकता है।
चीन की तुलना में भारत में अलग स्थिति
चीन के मुकाबले भारत में कानून अलग होने के कारण एपल को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही थी। इसी वजह से अब तक फॉक्सकॉन और टाटा जैसी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को खुद ही अरबों डॉलर की मशीनरी में निवेश करना पड़ा।
बजट 2026-27 में हुआ बड़ा ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए इस बदलाव की घोषणा की। सरकार ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सामान के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कानून में संशोधन किया जा रहा है, ताकि केवल मशीनों के स्वामित्व के आधार पर किसी विदेशी कंपनी पर आयकर न लगाया जाए।
2030-31 तक लागू रहेगा नियम
यह नया नियम 2030-31 के टैक्स वर्ष तक लागू रहेगा और सिर्फ कस्टम्स-बॉन्डेड क्षेत्रों में स्थापित फैक्ट्रियों पर ही प्रभावी होगा। ये क्षेत्र तकनीकी रूप से भारत की कस्टम सीमा से बाहर माने जाते हैं। हालांकि, अगर यहां बने उत्पाद भारत में बेचे जाते हैं, तो उन पर आयात शुल्क लगेगा, जिससे ये यूनिट्स मुख्य रूप से निर्यात के लिए ही आकर्षक होंगी।
सरकार की आधिकारिक व्याख्या
बजट से जुड़े एक स्पष्टीकरण दस्तावेज में सरकार ने कहा कि किसी विदेशी कंपनी द्वारा भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर को पूंजीगत सामान, उपकरण या टूलिंग उपलब्ध कराने से होने वाली आय को टैक्स से छूट दी जाएगी।
मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा
टैक्स मामलों की विशेषज्ञ लॉ फर्म बीएमआर लीगल के पार्टनर शंकी अग्रवाल के अनुसार, यह फैसला इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में एक बड़ी बाधा को दूर करता है। इससे भारत में तेजी से उत्पादन बढ़ेगा और वैश्विक कंपनियों का भरोसा मजबूत होगा।
भारत में एपल की बढ़ती मौजूदगी
एपल लगातार चीन से बाहर अपने मैन्युफैक्चरिंग बेस को विस्तार दे रहा है, जिसमें भारत की भूमिका अहम होती जा रही है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, 2022 के बाद से भारत में आईफोन की बाजार हिस्सेदारी दोगुनी होकर 8% हो गई है। वहीं, वैश्विक आईफोन शिपमेंट में चीन की हिस्सेदारी अभी भी 75% है, लेकिन भारत की हिस्सेदारी 2022 के बाद चार गुना बढ़कर 25% तक पहुंच चुकी है।
सरकार से लगातार बातचीत
रिपोर्ट्स के अनुसार, एपल ने हाल के महीनों में भारतीय अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। कंपनी को आशंका थी कि मौजूदा कानून उसके भविष्य के विस्तार में रुकावट बन सकते हैं, इसी कारण वह नियमों में बदलाव चाहती थी।
