Times Now Navbharat
live-tv
Premium

AI नौकरियां नहीं छिनेगा… आखिर सैम ऑल्टमैन और NVIDIA CEO को क्यों देनी पड़ रही सफाई? समझिए बयानों के मायने

AI इंसानों की जरूरत खत्म कर देगा... यह लाइन हम तब से सुन रहे हैं जब से ChatGPT लॉन्च हुआ है। पहले टेक सीईओ ने भी ये बातें कही थी, लेकिन अब सभी के सुर बदल रहे हैं, आखिर क्यों?

Image
AI नौकरियां नहीं छिनेगा… आखिर सैम ऑल्टमैन और NVIDIA CEO को क्यों देनी पड़ रही सफाई? समझिए बयानों के मायने
Authored by: Pradeep Pandey
Updated May 27, 2026, 11:28 IST

पिछले दो वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया भर में सबसे बड़ी चिंता यही रही कि क्या यह इंसानों की नौकरियां खत्म कर देगा। खासतौर पर ChatGPT जैसे जनरेटिव AI टूल्स के आने के बाद टेक इंडस्ट्री में यह डर तेजी से फैला कि लाखों व्हाइट-कॉलर कर्मचारी आने वाले समय में बेरोजगार हो सकते हैं। कई बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुखों ने भी AI के कारण बड़े स्तर पर जॉब कटौती की आशंका जताई थी, लेकिन अब तस्वीर कुछ बदलती दिखाई दे रही है।

AI को लेकर पहले चेतावनी देने वाले कई बड़े टेक लीडर्स अब अपने पुराने बयानों को नरम करते नजर आ रहे हैं। ओपनआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन से लेकर अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस और एनवीडिया के सीईओ जेनसन हुआंग जैसे दिग्गज अब यह कह रहे हैं कि AI इंसानों की नौकरियां पूरी तरह खत्म नहीं करेगा, बल्कि काम करने का तरीका बदलेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन दिग्गजों को सफाई देने की जरूरत क्यों पड़ रही है और इन बयानों के पीछे असली मायने क्या हैं?

सैम ऑल्टमैन ने माना- AI को लेकर डर बढ़ा-चढ़ाकर देखा गया

OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि AI की वजह से नौकरियां खत्म होने को लेकर उनकी पहले की आशंकाएं पूरी तरह सही साबित नहीं हुईं। उन्होंने कहा कि ChatGPT लॉन्च होने के बाद OpenAI ने AI की तकनीकी प्रगति का अनुमान तो काफी हद तक सही लगाया था, लेकिन समाज और ऑफिस कल्चर इस तकनीक को कैसे अपनाएंगे, इसे लेकर कंपनी गलत साबित हुई।

AI and Human

AI and Human

ऑल्टमैन के मुताबिक, उन्हें उम्मीद थी कि एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियों पर अब तक काफी असर दिखने लगेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच इंसानी संवाद और व्यक्तिगत संपर्क की अहमियत अब भी बनी हुई है, जिसे AI पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर पाया है।

उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि एक समय उन्होंने ईमेल और Slack मैसेज के जवाब AI से दिलाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में खुद कई मैसेज का जवाब देने लगे। इससे उन्हें महसूस हुआ कि इंसान अब भी इंसानों से जुड़ाव को ज्यादा महत्व देते हैं।

AI नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि काम का स्वरूप बदलेगा

सैम ऑल्टमैन अब मानते हैं कि AI के आने से नौकरियों का “एपोकैलिप्स” यानी बड़े पैमाने पर अंत नहीं होने वाला। उनकी नजर में AI इंसानों की जगह लेने के बजाय उनके काम को बदलने और आसान बनाने का माध्यम बनेगा। कम्युनिकेशन, क्रिएटिविटी, निर्णय लेने की क्षमता और भावनात्मक समझ जैसी चीजें अब भी इंसानों की सबसे बड़ी ताकत हैं। AI कुछ कामों को ऑटोमेट जरूर करेगा, लेकिन हर क्षेत्र में इंसानों की भूमिका बनी रहेगी।

जेफ बेजोस बोले- AI इंसानों की क्षमता बढ़ाएगा

Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस ने भी AI को लेकर संतुलित नजरिया पेश किया है। CNBC को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि AI कर्मचारियों को रिप्लेस करने के बजाय उनकी उत्पादकता बढ़ाएगा। उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि कोड लिखना किसी इंजीनियर की नौकरी का केवल एक हिस्सा है। असली काम यह तय करना होता है कि क्या बनाना है, क्यों बनाना है और समस्या का समाधान कैसे करना है।

बेजोस ने AI की तुलना बुलडोजर से करते हुए कहा कि जैसे बुलडोजर मजदूरों को खत्म नहीं करता बल्कि उनका काम तेज और आसान बनाता है, उसी तरह AI भी इंसानों की कार्यक्षमता बढ़ाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि भविष्य में AI की वजह से बेरोजगारी नहीं बल्कि लेबर शॉर्टेज यानी कर्मचारियों की कमी भी पैदा हो सकती है, क्योंकि कंपनियां ज्यादा तेजी से काम करने लगेंगी।

NVIDIA CEO जेनसन हुआंग ने कंपनियों पर उठाए सवाल

NVIDIA के CEO जेनसन हुआंग ने उन कंपनियों की आलोचना की जो कर्मचारियों की छंटनी के लिए AI को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। उन्होंने इस नैरेटिव को “लेजी एक्सक्यूज” यानी आलसी बहाना बताया। सिंगापुर के चैनल CNA को दिए इंटरव्यू में हुआंग ने कहा कि जनरेटिव AI अभी कुछ महीनों पहले ही कार्यस्थलों में उपयोगी बनना शुरू हुआ है, फिर कंपनियां दो साल पहले हुई छंटनी को AI से कैसे जोड़ सकती हैं।

उनके मुताबिक, कई कंपनियां लागत कम करने या री-स्ट्रक्चरिंग जैसे फैसलों को AI के नाम पर पेश कर रही हैं ताकि वे आधुनिक और टेक-फ्रेंडली दिखाई दें। उन्होंने कहा कि AI को लेकर डर फैलाना गैर-जिम्मेदाराना रवैया है।

फिर भी क्यों बना हुआ है नौकरी जाने का डर?

हालांकि टेक दिग्गज अब AI को लेकर नरम रुख दिखा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ कई बड़ी कंपनियों में लगातार छंटनी भी हो रहे हैं। Amazon, Meta, HSBC और स्टैंडर्ट चार्टेड जैसी कंपनियों ने हाल के वर्षों में कर्मचारियों की संख्या घटाई है और साथ ही AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश बढ़ाया है।

AI On Work

AI On Work

यही वजह है कि कर्मचारियों के बीच डर बना हुआ है। लोगों को लगता है कि कंपनियां धीरे-धीरे AI टूल्स के जरिए इंसानी श्रम पर निर्भरता कम करेंगी। एक्सपर्ट का मानना है कि AI कुछ दोहराव वाले कामों को जरूर कम करेगा, लेकिन इसके साथ ही नए तरह के रोजगार भी पैदा होंगे। जैसे इंटरनेट आने के बाद कई पुरानी नौकरियां खत्म हुईं, लेकिन उससे कहीं ज्यादा नए अवसर बने।

टेक कंपनियों को सफाई देने की जरूरत क्यों पड़ रही?

दरअसल, AI को लेकर पिछले कुछ समय में इतना डर और भ्रम फैल गया कि अब टेक कंपनियों को अपनी छवि संतुलित करनी पड़ रही है। अगर लोगों में यह धारणा बनती है कि AI सिर्फ नौकरियां खत्म करेगा, तो इसका असर तकनीक की स्वीकार्यता और निवेश दोनों पर पड़ सकता है।

इसीलिए अब टेक लीडर्स यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि AI इंसानों का विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी तकनीक है। वे यह दिखाना चाहते हैं कि भविष्य “Human + AI” मॉडल का होगा, जहां मशीनें इंसानों की मदद करेंगी, न कि पूरी तरह उनकी जगह लेंगी।

संतुलित सोच की जरूरत

AI को लेकर डर और उत्साह, दोनों ही चरम पर हैं। सच यह है कि AI आने वाले वर्षों में काम करने का तरीका जरूर बदलेगा, लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह इंसानों की नौकरियां पूरी तरह खत्म कर देगा। टेक दिग्गजों के हालिया बयान यही संकेत देते हैं कि AI को लेकर अब ज्यादा संतुलित और व्यावहारिक सोच अपनाने की जरूरत है। आने वाले समय में वही लोग सबसे आगे होंगे, जो AI को खतरे की तरह नहीं बल्कि एक नए टूल की तरह इस्तेमाल करना सीखेंगे।

End of Article